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Vat Savitri Vrat 2026:आज हम बात करेंगे अखंड सौभाग्य के प्रतीक 'वट सावित्री व्रत' की। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह व्रत देवी सावित्री के त्याग और संकल्प की याद दिलाता है, जिन्होंने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे। लेकिन इस पूजा की पूर्ण फल प्राप्ति के लिए सही सामग्री का होना बहुत जरूरी है। तो चलिए, जानते हैं कि वट सावित्री की थाली में क्या-क्या होना चाहिए।
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~HT.504~PR.114~ED.120~

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00:03आज हम बात करेंगे खंड सो भागे के प्रतीक वट सावित्री वृत की जिस्ट मास के अमवस्या को मनाय जाने
00:10वाला ये वृत देवी सावित्री के त्याग और संकल्प की याद दिलाता है जिनोंने यम्राज से अपने पती सत्यवान के
00:17प्राण वापस मांग लिये थे लेकि
00:23सारी चीज़े शाही होती हैं जो की काफी महतपून होती हैं ऐसे में चलिए आपको बताते हैं इस वीडियो में
00:29कि वट सावित्री व्रत में क्या-क्या चढ़ाया जाता है दरसल इस साल 16 माई 2026 को वट सावित्री व्रत
00:37रखा जाएगा इस दिन सुबह जल्दे उठकर इस नार
00:52कर शाली कहीं सिलाकर उसकी पूजा कर सकते हैं इस व्रत में बांस के पंखे का विशेश महत्वे हैं इसे
00:59बर्गत के पीड को और पती को हवा की जाती है वही कच्चा-सूत बहुत जरूरी है विग बर्गत के
01:05पेड़ की परिकमा करते समय हाँ और इसे हल्दी के पीला करके �
01:09लपीटा जाता है वहीं चढ़ाने के लिए फल और अनाज जरूरी हैं मुखे रूप से खरबोजा आम और मौसमिन फल
01:16चढ़ाय जाते हैं साथी देसी काले चने भीगाव कर चढ़ाय जाता है इसके लावा शुद्ध देसी घी से बनी पूरी
01:24और गुड के गुलगुले जिसे
01:26बरारा भी कहा जाता है इसे बरगत के पेड के पास बास के पंखे के उपर रखकर चढ़ाय जाता है
01:33इसके लावा सुहाक के समान चढ़ाय जाता है जिसमें लाल चुनरे, सिंदूर, बिंदी, चूडिया, महंदी, काजल और बिच्छिया जरूरी है
01:41इसके लावा तामबे य
01:50फूल अच्छत और रोली भी चुड़ाई जाती है
01:53बता दें कि बर्गत के पेड़ में
01:56ब्रह्मा, विश्णो और महेश्ट तीनों का वास माना जाता है
01:59इसकी लटकती, जटाएं, सावित्री के संकल्प का पतीक है
02:03पूजा के दोरान महिलाएं बर्गत के तने पर
02:06साथ, बारा या एक सो आठ बार सूत लपेट कर परिक्रमा करती है
02:10जो उनके अटूट रिष्टे को दर्शाता है
02:13मैं पूजा के बाद सावित्री और सत्तिवान की गथा सुनी जाती है
02:17और अंत में चनी को निकला जाता है
02:19कई जगहों पर पूजा की सारी समागरी बास की दो टोकरियों में रख दी जाती है
02:25एक सावित्री सत्तिवान के लिए और दूसरी दान के लिए
02:29वही इस पूजा में जो सबसे जरूरी है वो है वटब्रिक्ष, कच्चा सूत, बास का पंखा और काले देसी चने
02:36जिसके बिना ये पूजा नहीं हो सकती
02:39उमीद करती हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
02:41फिलहल हमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक, शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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