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Vat Savitri Vrat 2026: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री का व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके पति दीर्घायु होते हैं। हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना के लिए वट सावित्री का व्रत रखती हैं। अगर आप इस साल पहली बार यह व्रत करने जा रही हैं तो इन बातों और नियमों का खास ध्यान रखें।

Vat Savitri Vrat 2026: The Vat Savitri Vrat holds special significance in the Hindu religion. According to religious beliefs, observing the Vat Savitri fast bestows upon married women the blessing of eternal marital bliss and ensures longevity for their husbands. Every year, on the day of Amavasya (New Moon) during the month of Jyeshtha, women observe the Vat Savitri fast to pray for the long life of their husbands. If you are planning to observe this fast for the first time this year, please pay special attention to the following points and guidelines.

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00:04हिंदू धर में वर्ट सावित्री का विशेश महत बताया गया है धार्मिक मानेताओं के अनुसार वर्ट सावित्री का वरत करने
00:11से सुहागिन महिलाओं को अखंड सो भागय का अशिरबात प्राप्त होता है और उनके पती दिरगायू होते हैं
00:18हर साथ जेस्ट महा के अमावस्या के दिर महिलाएं पती की लंबी आयो की कामना के लिए वर्ट सावित्री का
00:25वरत रखती हैं अगर आप इस साल पहली बार ये वरत करने जा रही हैं तो वरत करने से पहले
00:31कुछ नियमों का खास ध्यान रखें वरना आपको वर्ट सावित्री व
00:43वरतनी चाहिए और किन नियमों का पालन करना चाहिए अगर आप वर्ट सावित्री का वरत पहली बार रख रहे हैं
00:49तो वर्ट सावित्री वरत के दिन भूल कर भी नीला काला सफेद और ग्रे जैसे अशुब रंगों के कपड़े ना
00:56पहने इस दिन शुब और और सुहा का रं�
00:59ताल, पीला, गुलाबी जैसे रंगों का इस्तिमाल करें इनी रंगों के कपड़े पहने शिंगार में भी नीला, काला, सफेद और
01:06ग्रे रंग का उपयोग ना करें वर्ट सावित्री वरत का पर्व सुहागिनों के लिए होता है ऐसे में इस दिन
01:12पूरा सोला शिंगार करें
01:14और फिर पूजा का आरंब करें वर्ट सावित्री वरत के दिन बर्गत के पेड़ की पूजा की जाती है ऐसे
01:20में इस दिन बर्गत के पेड़ के आसपास वाली जगह को अच्छे से साफ करें इसके बाद गंगा जल जड़क
01:26कर सफाई के बाद ही पूजा आरंब करें साथी व
01:42बट्व सावित्री का व्रत रख रही हैं। इसलिए पूजा समागरी का विशेश ध्या लगे। पूजा में बास का पंखा, कच्चा
01:48सूत, भीगे हुए जने, सोलर शिंगार की समागरी आधी चीजे सरूर शामिल करे। बट्व रिक्ष में ब्रह्मा, विश्नु और महेश
01:56का
01:56वास होता है। पूजा के दोरान पेड़ की परिक्रमा जरूर करें और परिक्रमा करते समय कच्चा सूत, अवश्यल पेटें। परिक्रमा
02:04पाँच, साथ, ग्यारा या एक सो आठ बार करें। इसके साथी सावित्री और सत्यवान की कथा के बिना ये व्रत
02:10अधूरा माना जा
02:11अगर आप पहले वर व्रत कर रही हैं तो वट सावित्री व्रत की कथा जरूर सुने। फिर पूजा के बाद
02:17सावित्री मा परियम देवता से अपने पती की लंबी आयू की काम ना करें। वहीं वट सावित्री व्रत की पूजा
02:23के बाद सासू मा को पैसे देकर उनका अशिर
02:41झाल झाल
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