00:04हिंदू धर में वर्ट सावित्री का विशेश महत बताया गया है धार्मिक मानेताओं के अनुसार वर्ट सावित्री का वरत करने
00:11से सुहागिन महिलाओं को अखंड सो भागय का अशिरबात प्राप्त होता है और उनके पती दिरगायू होते हैं
00:18हर साथ जेस्ट महा के अमावस्या के दिर महिलाएं पती की लंबी आयो की कामना के लिए वर्ट सावित्री का
00:25वरत रखती हैं अगर आप इस साल पहली बार ये वरत करने जा रही हैं तो वरत करने से पहले
00:31कुछ नियमों का खास ध्यान रखें वरना आपको वर्ट सावित्री व
00:43वरतनी चाहिए और किन नियमों का पालन करना चाहिए अगर आप वर्ट सावित्री का वरत पहली बार रख रहे हैं
00:49तो वर्ट सावित्री वरत के दिन भूल कर भी नीला काला सफेद और ग्रे जैसे अशुब रंगों के कपड़े ना
00:56पहने इस दिन शुब और और सुहा का रं�
00:59ताल, पीला, गुलाबी जैसे रंगों का इस्तिमाल करें इनी रंगों के कपड़े पहने शिंगार में भी नीला, काला, सफेद और
01:06ग्रे रंग का उपयोग ना करें वर्ट सावित्री वरत का पर्व सुहागिनों के लिए होता है ऐसे में इस दिन
01:12पूरा सोला शिंगार करें
01:14और फिर पूजा का आरंब करें वर्ट सावित्री वरत के दिन बर्गत के पेड़ की पूजा की जाती है ऐसे
01:20में इस दिन बर्गत के पेड़ के आसपास वाली जगह को अच्छे से साफ करें इसके बाद गंगा जल जड़क
01:26कर सफाई के बाद ही पूजा आरंब करें साथी व
01:42बट्व सावित्री का व्रत रख रही हैं। इसलिए पूजा समागरी का विशेश ध्या लगे। पूजा में बास का पंखा, कच्चा
01:48सूत, भीगे हुए जने, सोलर शिंगार की समागरी आधी चीजे सरूर शामिल करे। बट्व रिक्ष में ब्रह्मा, विश्नु और महेश
01:56का
01:56वास होता है। पूजा के दोरान पेड़ की परिक्रमा जरूर करें और परिक्रमा करते समय कच्चा सूत, अवश्यल पेटें। परिक्रमा
02:04पाँच, साथ, ग्यारा या एक सो आठ बार करें। इसके साथी सावित्री और सत्यवान की कथा के बिना ये व्रत
02:10अधूरा माना जा
02:11अगर आप पहले वर व्रत कर रही हैं तो वट सावित्री व्रत की कथा जरूर सुने। फिर पूजा के बाद
02:17सावित्री मा परियम देवता से अपने पती की लंबी आयू की काम ना करें। वहीं वट सावित्री व्रत की पूजा
02:23के बाद सासू मा को पैसे देकर उनका अशिर
02:41झाल झाल
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