00:02वर्ट सावित्री वरत की पूजा साल 16 मईदिन शनिवार को पढ़ रहा है।
00:31कारण इसे दिन सावित्री ने अपने पती सत्यवान को मृत्यू के मुह से वापस खीच लाया था और वो भी
00:37बर्गत के पेड के नीचे ही विराजवान थी।
01:00हाथ में जल लेकर संकल पिलें कि आप अच्छेवर की प्राप्ती के लिए वरत कर रही है।
01:04पेड की जड में जल अर्पित करें चंदन फूल और धूपदीप दिखाएं।
01:09अच्छा सूत या कलावा लेकर पेड की साथ या ग्यारा बार पर इक्रमा करें।
01:13इसके बाद सावित्री और सत्तेवान की कथा सुनें ये वरत की सबसे जरूरी कड़ी है।
01:18पूजा के बाद भीगे चने और फल अर्पित करें, सामर्थ अनुसार कुछ दान करें।
01:22ध्यान रहें कुवारी हैं तो अपनी मांग में सिंदूर ना भरें, माथे पर तिलख लगा लें।
01:27पूजा में खरबूजा और आम का भोग लगाना शुब होगा, आसपास बरगत का पेड नहीं है, तो आप घर पर
01:33बरगत की तस्वीर या छोटी टहनी के सामने भी मांसिक रूप से पूजा कर सकती हैं।
01:38पहली बार ये वरत कर रही हैं, तो पूरी शुरद्धा के साथ करें और कोशश करें कि वरत के दौरान
01:43मन शांत रहें।
01:44वरत पारण के लिए आपको भी चने और बरगत की कली को निगल कर ही अपना वरत पूरा करना होगा।
01:50खुवारी महिलाएं चाहें तो फलाहार खाकर भी ये वरत रख सकती हैं।
01:54लेकिन पूजा संपन्न होने के बाद उन्हें भी भीगे चने और कोपल खाना जरूरी है।
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