00:03वट सावित्री वरत सुहागेनों के लिएक बड़ा तेवहार है क्योंकि ग्रंथों के अनुसार ये वरत स्त्रियों की सुहा की रख्षा
00:10करने में मददगार है।
00:30इसके बिना वरत पूजन अधूरा होता है। हालाकि बड़े बड़े शहरों या फिर जो महलाएं विदेश में रह रही हैं
00:37उनके लिए बर्गर जैसे विशाल पेड़ घर के पास नजर नहीं आते हैं।
01:00इसके दिन पहले वट सावेत्री वरत के लगा सकती हैं। उसके बाद विदिवत पूजा उसी गंबले में लगे टेहनी की
01:07की जा सकती है।
01:08इस वरत में बर्गत के पेड़ को पहले जल और दूर चड़ाएं फिर रोली हल्दी अरपित करें।
01:14इसके बाद साथ 11, 21 या 51 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटे और पती की लंबी आयू की
01:21काम ना करें।
01:22इस दोरान मंत्र जाब भी करें मम सौभाग्यम देही, आईश्यम आरोग्यम देही में पती सुखम चा देही त्वं पत्वरिक्ष नमोस्तुते।
01:32लेकिन अगर आपके घर के आसपास तो दूर बलकि दूर दराज में भी बर्गत का पेड़ और टहनी नहीं मिल
01:39रही।
01:40तो भी कई आसान तरिकों से आप ये पूजा कर सकते हैं। आप दिवार पर बर्गत के पेड़ का चित्र
01:45बना लें, इसे साफ कागज या फिर दिवार पर सीधे ही गेरु या हल्दी की मदद से बनाएं, इस आकरती
01:51को साक्षात वटवरिक्ष मान कर उनकी इसी विधी से प�
02:07अगर ऐसा करना संभव नहीं हैं, तो भी मानसिक पूजा की जा सकती हैं, एक शांत जगह पर बैटकर आखे
02:14बंद करके ध्यान करें कि आप एक विशाल अक्षयवट वरिक्ष के सामने खड़ी हैं, मने वन उस वरिक्ष को जलर
02:20पित करें, रोली लगाएं और परिक्रमा करें
02:23सत्यवान सावित्री की कथा का पाट करें, इश्वर भाव देखते हैं वस्तुने हैं, आप चाहें तो एक प्रिंट आउट बरगत
02:29के पेड़ का निकाल कर रख सकती हैं, और उस पर भी विदिवत तरीके से पूजा की जा सकती हैं,
02:35इन सब के बावजूद आप चाहें तो त
02:38पूजा कर सकती हैं, तुल्सी के गंबले के पास बैठ कर सावित्री सत्यवान की कथा सुनें, वहीं दीपक जला कर
02:44मनुकामना पूर्ती की कामना करें, ध्यान रहे कि तुल्सी पर सूत लपेटते समय बहुत साफ धानी बरते ताकि पौधे को
02:51नुकसान नहों, इसके अलाव
03:04या फिर सूर्यदेप को अर्गस्वरू परपित कर दें, फिल्हाल इस वीडियो में इतना ही, वीडियो को लाइक और शेयर करें,
03:11साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें