00:03अखंड सौभागे का वट सावित्री वरत जेश्ट अमावस्या की दिन रखा जाता है।
00:30अखंड सौभागे का अश्रवाद मिलता है और दामपत्य जीवन सुखमय होता है।
01:00स्नान के बाद वट सावित्री वरत और पूजा का संकल पलें। उसके बाद पूजन सामगरी की व्यवस्था कर लें।
01:07पूजा सामगरी में बास का पंखा, कच्चा सूत, भीगे हुए चने, धूप, दीप, गाय का घी, फूल, मौसमी, फल, सुहाग
01:14सामगरी, सिंदूर, बिंदी, चूडी, आदी, बर्गत के फल, सावित्री और सत्यवान की तस्वीर को शामल करना ना भूले।
01:21इस वरत में वटवरिक्ष यानी बर्गत के पेड की पूजा करते हैं, ये एक देव वरिक्ष है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णो
01:27और महेश का वास होता है।
01:51वरिक्ष और उसके बाद पती को हवा करें। इस वरत को नर्जला और फलहार दोनों तरह से रख सकते हैं।
01:57आपसे जो संभव हो या आपके यहां जो प्रचलन हो उसका पालन करें।
02:02कुछ स्थानों पर पूजा के बाद वरिक्ष की एक कली और एक भीगा चना पानी की मदद से निगलते हैं।
02:08उसके बाद सास और परिवार और बुजर्ग महलाओं का अशरवाद भी लेते हैं।
02:12वहीं वरिक्ष की एक कली और भीगा चना खाने के बाद शाम के समय अगर आपने निर्जला वरत रखा है
02:19तो पानी पीकर और अगर फलाहार रखा है तो सात्वे को भोजन करके वरत का पारण किया जा सकता है।
02:25फिलहाल अस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें साती चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।
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