00:00जैन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालनी दुरगा शमा शिवाधात्री श्वाहा श्वधा नमोस्त्ते प्यारे मित्रों जेश्यारम जैमातादी
00:09मित्रों आज आप से चर्चा करते हैं बट सावित्री व्रत पूजन कब किया जाएगा पंद्रा मई या सोला मई
00:17क्या है वास्तों में सही तिथी आज इसी भी से पे करेंगे चर्चा बट सावित्री व्रत जेश्ट महा की अमावस्या
00:25के दिन रखा जाता है इस दिन बरगद व्रक्ष की पूजा करने का महत्त बताया गया है इस दिन महिलाएं
00:32कठिन व्रत करती हैं और उसका पालन करती हैं
00:36हिंदू धर्म में बट सावित्री ब्रत बेहद ही सुब और महत्वपून बताया गया है यह ब्रत जेश्ट माह की अमावस्या
00:44के दिन किया जाता है धार्मिक माननेताओं की अगर हम चर्चा करें तो इशे दिन शावित्री ने अपने द्रण शंकल्प
00:52और शतीत्त के बल पर य
01:05इस ब्रत को कब किया जाएगा थोड़ी कंफ्यूजन की स्थितियां बनी हुई है मैं पूरी तरह से आपको निर्भीक करता
01:13हूं और बताता हूं कब आपको यह बैदिक विदी के द्वारा सुब महूरत में पूजन कब करना चाहिए तो पंचांगे
01:20के नुचार जेश्ट मा
01:21कि अमावस्या तिथी की जो सुरुवात हो रही है 16 माई को सुबह 5 बच करके 11 मिनट पर हो
01:28रही है तो इसका समापन जो है यह 17 माई को रात में 1 बच करके 30 मिनट पर होगा
01:35तो पंचांग को देखते हुए बट सावित्री बृत का जो पावन पूजन है महिलाएं जिस दिन ब
01:53अब लुग बट वहां पूजन है जैसे कि ब्रह्म महुरत में प्रातेकाल 4 बच करके 7 मिनट से 4 मिनट
02:0148 मिनट पर होगा फिर इसके बाद में बीजै महुरत पर होगा दो पार में 2 बच करके 4 मिनट
02:08से 3 वच करके 28ρά के
02:10रहेगा फिर इसके बाद में गोधूली मुहूरत रहेगा जो शाम को 7 बच करके 4 मिनट से 7 बच करके
02:1625 मिनट तक रहेगा इस मुहूरतों में आप अच्छे रूप से बट सावित्री व्रत को संपन्न कर सकते हैं और
02:26आज के दिन बट सावित्री व्रत का पूजन किया जाता है �
02:30परिक्रमा की जाती है तो हमने आपको बताया कि बट सावित्री व्रत जो है यह 16 मई को ही रखा
02:39जाएगा बट सावित्री पूजा का महत्यों शास्त्रों में बरगत के पेड़ को पुजनी बताया गया है क्योंकि इसमें ब्रह्मा विष्टु
02:48महेस्त्रिदेवताओं का नि�
02:58पूजा के दवरान बट व्रक्ष पर साथ परिक्रमा की जाती है और उसमें धागा लपेटा जाता है पूजा बिधी भी
03:08बताई गई है कि महिलाएं इस दिन सुबई उठकर के इश्प्नान करके सुद्ध वस्त्रों को धारण करें पैरों में रंग
03:16लगा करके सुन्दर
03:1716 प्रकार के स्रंगार से अपने आपको सुसज्जित करें इसके बाद में पूजा की थाली में धूप, दीप, रोली, अक्षत,
03:25कच्चा, सूच, फल, भीगे हुए चने इत्यादी रख करके और सावित्री शत्यवान की कथा सुने अंत्यमें बढ़ों का आसरबाद लेकर
03:34के व
03:45पूजन करिए, 16 माई 2026 दिन सनी मार को पावन बट सावित्री वरत का पूजन शंपन्न किया जाएगा, जै स्री
03:55कृष्णा, जै श्याराम
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