00:09मुंबई के बारे में जब कभी भी आपने कुछ पढ़ा हो देखा हो सुना हो या कभी आप मुंबई आये
00:14हो तो एक जो इलाका है जिसका जिक्स हमेशा हुआ होगा और वो है भेंडी बजार नाम का यह इलाका
00:25कि मुंबई के उस इलाकों में से एक है जहां पर बहुत भीड है वहां पर गूम कर इसका जाइजा
00:46लेंगे और साथ ही साथ जेसे समय बदलता जा रहा है
00:49अपनि कुछ पूरानी वाक्पे चोड़ कुछ नया यहां पर खड़ा होने जा रहा है।
00:54उसके में भी मिम्भि nggak, Mumbai का भ्याद्र०ी बजार।
01:08कि अच्छी जिसे भेंडी बजार कहा जाता है वह कहा से शुरू होता है और का फ़त्व अत्ना गलियों वाला
01:14चोड़िशेट गलियों वाला यह इलाका है?
01:16एक्षिली भेंदी बजार जो है मलब हम इसको किसी पर्टिक्लर मुनिस्पल जूरिजिक्शन की लिमिट में कनफाई नहीं कर सकते हैं
01:24भेंदी बजार एक आईडिया है कंसेप्ट है क्यों लोग यह समझते हैं लोगों की संसिल्विटी यह है मेरी संसिल्विटी यह
01:32है कि कराफट मार्किर से शुरू होता है इवराईम रहमितला रोड भेंदी बजार जंक्शन जेजे जंक्शन नाकपाड़ा मदनपूरा डोंग
01:57कि यह सबके लिए एक इंटरस्ट का सवाल होता है यह भेंडी बजार नाम कहां से आया क्या वाके में
02:03भेंडी यानि लेडी फिंगर इससे सब्जी बनती है उसका बजार यहां पे था या फिर और कोई उसका रीजन है
02:09ओखरा या भेंडी के मिल्लब इनी फील्स ती यहां प
02:46तो कुछ लोगों का यह है कि बनते बंते वो ब्हेंडी बजार हो गया है
02:57बेंडी बजार के जिस गणी में अभी फिलहाल मैं हूँ लोग इसे कई अलग-अलग नामों से जानते हैं
03:03कोई से शोर बजार कहते हैं क्योंकि यहां पे बहुत शोर होता है
03:06कोई से चोर बाजार भी कहते हैं क्योंकि कई सरी आइंटिक चीज़े आपको कही दुम्या भर पे नहीं मिलेगी
03:12यहाँ पे जरूर मिली होगी
03:14कुछ लोग इसे मटन रोड की नाम से भी कहते हैं
03:17वहाँ का बाजार भी उसे जाना जाता है
03:19लेकिन आपकभी यह पे आओगे, एक साथी आपको दिखाहिए देगी
03:24मानों एक म constitutional ப यहाँ पे जो है वह यहाँ पे है
03:26अलग-अलग तरीकिती दुपान्य यहां पे जिन्मनें एंटिक्स है परमीचर की चीज़े
03:31लकडी की चीज़े हैं, कई फ्रेम्स हैं, कई म्यूजिकल रेकॉर्ड्स हैं, कई सारी मूर्थिया हैं, अलग-अलग धातु होंकी
03:38और दुम्या भर के लोग कभी भी मुंबई आते हैं, यहां आये बिना वो कभी वापस नहीं जाते
03:44अधरा मारượng और यह शोर के लिगो इसे 이제 अने अधरागे में, में लागे कर यहां यहां रखुज़ की आते
04:08पहुते जहा कि लोग आते हैं, भागाने वागरी MR मुरह का रहां।
04:26जब हम भूम रहे हैं तो मैं देख रहा हूंगी कई सारे पुराने होटल जो है वो अभी भी इस
04:31इलाके में बहनी बजार उसके अगल बगल वाले इलाके में शुनो है
04:34बिल्कुल यह जितनी भी पहले पुराने मनलब इन होटने हैं यहां लिडिचर, अदब, हिस्ट्री, पॉलिटिक सारी चीज मनलब इनी डिस्कास
04:45होती थी और यहां इस होटल में खास होते सारवी में सादात हसन मंटो साब शाम में आके इनी किसी
04:52टेबलों पर बैठ के चाय प
05:04अखेल पर शबादी यहां पर कई सालों पहले आई यहां पे से्टल हो गई तो उसकी बारे में थोड़ा बता
05:10यह ना में तो यह एक भी जगह से आ हूए है या अलग-अलग एरिया से आ हुए, अलग
05:15-अलग सेक्स से आई हुए सारे लोग है
05:22यहां सारे कम्यूटिस पहले यहां पर आये थे दावडी सूर्ती और दावडी बोराज आये जिन्नों ने यहां को इसको बनाया
05:28फिर खोजाज आये मेमंद आये और कोकनी यहां के तो मलब मुल निवासी थे जो मलब नाकपाड़े पर मलबारिस लोग
05:37आए हैं मदनपूरी पर
05:39मलब मेने यूपी के लोग आये अंसारी बरादरी आई है यहां पर छिपा कौम आई है तो सारे यह गुलदस्ता
05:47जो है यहां पर भिंडी बजार में यह सारी लोग आकर मनलब में सजाये हैं इनकी जबान तो मुक्तलिफ थी
05:55लेकिर इनकी कॉमन जो लिंगवा फ्रेंका था �
06:08अब हम एक ऐसी जगा पे आए हैं जो सिर्फ उर्दू साहित्य में नहीं बलकि पूरी दुनिया की साहित्य में
06:17एहमानी जा सकती है
06:18जो कि नाम ही ऐसा है नाम है साधत हसन मंटो एक ऐसे कथाकार ऐसे लेखक जो आज भी इतने
06:26बरसों बाद खास तोर पर भारत पाकिस्तान बटवारा हुआ उस वक्त की सितियों पर जो उनोंने कथाएं लिखी आज भी
06:32जब कोई भी उसे पढ़ता है वो दिल के अंदर घुश �
06:39स्याधत हसन मंटो बटवार के बाद पाकिस्तान में चले गए उनकी अपनी अलग जिन्दगी वहां पर थी लेकिन उन्होंने कई
06:46साल उससे पहले मुंबई में गुजारे वो फिल्म इंडस्री में थे वो जर्नलिजम करते थे पत्रिकाओं में लिखते थे और
06:54यहीं अदेल
06:56चेंबर्स जो यह बिल्डिंग है बहुत फुरानी बिल्डिंग है यहीं पर स्याधत असन मंटो रहते थे
07:04मंटो करीब करीब आठ साल तक यहां रहे इसके पहले वह अरब गली बे रहते थे जब आये नहें अरब
07:10गली यह एरिया के पास है कमादी पूरे के पार्थ है बाद में वह यहां पर शिफ्ट हुए मंटो फिल्मों
07:18भी लिखते थे मैगजिन भी लिखते थे और आप मोधी �
07:21से एक फिल्म मनाई थी मिर्दा गालिप तो जिसकी स्टोरी खुद मंटों ने यहीं बैट के लिखती है और उर्दू
07:27के जितने उसको करनी कंटर्वरी राइटर्स थे इसमत शुक्ताई थे और फारे लोग आके यहीं पे इनका मिलना था बैटना
07:35था शामे गुजरती थी
07:38मुंबई हमीशा से मल्टिलिंग्वल बहुत सारी जुबानों से जोड़ा हुआ शहर रहा है और उर्दू और मुंबई की भी एक
07:46खास अलग अपनी एक संबन्द है रिष्टा है और उसकी वज़ा भेंडी बजार ही है कैसे वो ज़रूर बात करेंगे
07:53और इसलिए आए यहा
07:57एक 104 साल पुरानी किताब की दुकान है और उर्दू लिट्रेचर यहां पे हमेशा मिलता है और सिफ मिलता नहीं
08:05बल्कि एक उर्दू लेखकों का एक गढ़ भी रहा है यहीं पर हमें बात भी करनी पड़ेगी प्रोग्रेसिव राइटर असोसिएशन
08:13की जिसके लिए भी भ
08:26उर्दू कुम्बे में भी आजादी से पहले से यह बना हुआ है तो बहुत से लोग जो गोईट्स हैं आदीब
08:34हैं नौमिल निगार हैं जो आजादी की तहरीक में शामिल रहे और यहां आया करते थे उस में प्रोग्रेशी राइटर
08:42भी थे यानि तरक्ति पसंद तहरी से �
08:43जिनको 30% तहरी एक उसको अद्धू में बोलते हैं
08:46उस मुविमिन्ट के भी लोग ते जिसे जाफरी सहाब थे
08:51अली सरदार जाफरी थे
08:52मज़र सिल्टान पुरी थे
08:54जोनसारी सहाब थे
08:55कैफी सहाब थे, कैफी आद्मी सहाब थे
08:57आप ये कह सकते हैं कि उर्दु जमान से तालुक रखने वाले जो भी अदिव हुआ करते थे, किसी भी
09:03मुविमिन से जुड़े रहे हों, वो यहां आया करते थे, यहां बेड़ते थे.
09:08मगर ये भींडी बजार अब बदल रहा है, भीडवाली गलियों को पीछे छोड़, आसमान छूते टौवर्स यहां आ रहे हैं,
09:18वजह है, यहां चल रहा भींडी बजार रीडेवलप्मेंट प्रोजेक्ट, पिछले 10-15 साल से चल रहा ये प्रोजेक्ट काफी चर्चा
09:25में रह
09:27है, यहां जो सब के घर थे, सब के घर बहुत छोटे थे, डेर सो स्कुरी फीड के घर थे,
09:35अभी एक घर में हस्बंड, वाईब, बच्या और माबाप पाच जन रहते थे, अभी डेर सो पूट के घर में
09:44रात को सोए गे कैसे, तो बीज में एक परदा लगता थे, और यह सब
09:50पुब्लिक के पगरी के टेनेंटेट थे, मींज लैंडोर्ट की बिलिंग थी, बिलिंग बड़ी डिलापलेटेट थी, प्री इंडिपेंडेंट बिलिंग थी, और
09:58ये सब सेस्ट बिलिंग थी, मादा सेस्ट बिलिंग, तो मादा इसको रिपैर कर रही थी, तो कई बिलिंग म
10:04बैंबू लगे हुए थे कई बिलिंग में स्टील के फिलर्ड लगे हुए थे क्योंकि लैंडलोड की कपैसिटी के बाहर था
10:11मेंटेन करना भी शेयरना साब का विजन था और बहुत अच्छा भी था कि सब के अपने ओनर्शिप गर होने
10:18से और सेल्फ कंटेंड अच्छे गर हो
10:33और हमारे चारेक तावर आएगे इसके सिवा भी चारिया पाच तावर आएगे
10:40मुंबई जैसे शहर में री डेवलप्मेंट हमेशा से ही एक सेंसिटिव और डिबेटेबल मुद्दा रहा है
10:45और भिंडी बजार जैसे इलाकों में ये और भी मुश्किल हो जाता है जब सेकडों साल पुरानी इमारते कानूनी लडाईयों
10:53का सामना कर रही होती है
10:54और उन में रहने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डालते हैं
10:57लेकिन जब ये मामला आया तो सैफी बुरुहानी अप्लिफ्मेंट ट्रस्ट के दखल ने फर्क पैदा किया
11:04यहां रहने वाली ज्यादा दर आबादी का तालुग दाउदी बोहरा मुस्लिम कमिनिटे से है
11:11मनसूर वाला फैमिली भी अगले ही महने अपने नए घर में शिफ्ट होने के लिए एक्साइटेड है
11:17चार लोगों की ये फैमिली पहले पुराने गलाबाई चॉल में सिर्फ 260 स्क्वेर फीट के एक छोटे घर में रहते
11:23थी
11:23उन्हें अब तिरपन मन्जिला अलेज टॉवर में 460 स्क्वेर फीट के घर की चाविया मिल गई हैं
11:31लोगों को ट्रस्ट फेक्टर नहीं था कि यहां से कैसे हम जाएंगे
11:34वहाँ बनेगा नहीं बनेगा क्या होगा कितना टाइम लगेगा किसी को नहीं पताता हो चीज के आपार में और लोगों
11:40के
11:41इमोशन अटेच्ट है यहां पर यहां पर 100 प्लस यह ओल्ड बिल्डिंग थी मतलब लोगों के
12:10समय के तकाजे पर बिंडी बजार में हो रहे बदलाव की तरफ देखने के कई नजर यह है
12:16बिल्डिंग बनी है और यह हाई राइस डेवलपेट हुआ है वो इतना ही आइलेंड जैसा बन गया है एक अच्छा
12:23सा बना है मैं दुबई जाता हूं तो मुझे पूरा ऐसा लगता है कि दुब भिंडी बजार में दुबई
12:29रीक्रियेट हो गया लेकिन एक दूसरा भंडी बजार एस ब्यूटी के बाहर का है जो और गिनाइस्ट रीडेवलप्मेंट नहीं हो
12:38रहा है अन्य हर महले में दूसरे महले में जिस तरह से वो कोई भी बिल्डर एक हाई राइस बना
12:44रहा है तो एक रीडेवलप्मेंट
12:47प्लैंट रीडेवलप्मेंट में और एक इंडिविज्वल हाई रेस्ट से बनती है उसमें फरक होता है तो उसके इंपक्ट भी खराब
12:56लग रहे हैं क्योंकि होसी जगह जाएंगे गलियों में बड़े-बड़े टावर आ गए तो वहां पर पार्किंग नहीं है
13:02रोड पर �
13:03जगह मीं हैं हो वर्टिकल भिए बजार आ गया अरस रतर था का ख़ए किसा कड्स की साथ था वर्टिकल
13:11भिड्डीबजार बीज़ार में भिड़ेधिवाजर
13:33एक पैर अभी भी माजी में है लेकिन इसके बीचों बीच बसे साड़े सोला एकड के टुकडे ने अब एक
13:40नई दुनिया में कदम रखा है
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