00:00रात के बारा बजे खाटू के मंदीर में जब कोई नहीं होता तो फिर भी घंटिया कोन बजाता है कहते हैं खाटू शाओं का दरबाद दिन में भक्तों से बरार रहता है लेकिन रात में ये जगा साधारन रही रहती
00:11सेवा दर बताते हैं अचानक थंडी हवा चनले लगती है दीपक अपने आप कामपने लगते हैं मंदीर के गर्व ग्रह से कदमों की आहर सुनाई देती है जो सर्दा में कमी रखता है उसे डर गिर लेता हो जो सच्चा बक्त होते हैं उससी अंदेरे में शाओं की उपस्तिती
00:41को बूला रहे हैं, जए, शिज्चिशाम।
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