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US stares at the de-Dollarisation as Russia-Ukraine are back to square one. Saurabh Shahi explains
’ڈی ڈالرائزیشن‘ اس وقت سرخیوں میں ہے اور کئی ممالک اس کی حمایت کر رہے ہیں۔ پروگرام ’دنیا مرے آگے‘ میں اس تعلق سے سوربھ کمار شاہی نے بہت واضح اور سہل انداز میں حقیقی صورت حال کو سامنے رکھا۔ ’قومی آواز‘ کے ڈیجیٹل ایڈیٹر سید خرم رضا نے اس قسط میں روس-یوکرین جنگ کے تازہ حالات پر بھی سوربھ شاہی سے گفتگو کی۔ دیکھیں یہ ویڈیو۔

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00:09कि कमोधिति मार्केट में एक्पोर्ट में डॉलर को प्राइमरी करेंसी न मानके तमाम दूसरे चीजों से ट्रेड करना है
00:18इसमें लोकल करिंसी भी हो सकती है फिर्ड करेंसी ह
00:21इसमें युर्प के बड़ी कंट्रिज हैं ये भी दबी जुबान में ये काम कर रहे हैं
00:25और सबसे अवल इसमें अमेरिकाsongy देश इसमें शामिल है
00:29वो इसकेंडीनेविया के कंट्रिय है, डन्मर्क, स्वीडन, नौर्वे, ये सबसे डादा इसमें पहल ले रहे हैं, रूस के हक में
00:35नहीं है, रूस तो चाहता है कि जितनी जादा एरिया पे उसका खब्जा होगा, कॉन्फिलिक्ट लाइन वही पे फ्रोज हो
00:40जाए, तो अगर
00:59कौमी आवास का डिटल एडिटर की प्रोग्राम, नैशनल हेरड, नवजीवन और कौमी आवास की जानेप से पेश किया जा रहा
01:07है, आज की गुफ्तगों में हमालमी सियासत और महीशत के दो ऐसे मौज़वात पर गुफ्तगों करने जा रहे हैं, जो
01:16आने वाले बरसों में
01:17दुनिया की सिल्फ मतायन कर सकते हैं, एक तरफ डी डॉलर एडिशन का बरता हुआ रुजान जहां कई हमालिक अमरीकी
01:28डॉलर की बाला जस्ती को चेलिंज करते हुए मतावादिल मालियाती निजाम की तलाश में हैं, सवाल यह है, कि क्या
01:36ये महज सियासी दबाओ की हिकमत हम
01:47है, जो सिर्फ दो मामालिक का तनाजा नहीं रही, बलके यूरोप की सलामती, आलमी ताफ़तों का तवादन और अम्न के
01:55मुस्तक्विल से जुड़ चुकी है, हाल ही में यूकरेन सडर जेलिंसकी ने डेडलाइन कर दिक्र किया है, हम इस डेडलाइन
02:04की हकी जानने कोशिश कर
02:08में हम अपने महमान सौर्फ कुमार शाही से अपने नाजरीन और सामीन के लिए जानना चाहते हैं कि यह डी
02:16डी डॉलराइजेशन गुनियाली तोर पे है क्या, जी जैसा कि आप नाम में ही देख रहे हैं कि डॉलराइजेशन का
02:26मतलब है कि कोई एसीची जिसमें डॉलर डॉ
02:37करिंसी की जहां बात आती है, वहां डॉलर का एस अ सुप्रीम करिंसी रूल करना उसको डॉलराइजेशन कहते हैं, डी
02:45डॉलराइजेशन कहने का मतलब है कि इन सारे चीजों में रिवर्सल देखी जाए, यानि ज्यादा से ज्यादा ट्रेड जो है
02:52वो उसमें डॉलर का रोल
03:07कमी देख रहे हैं तो उसको डी डॉलराइजेशन कहते हैं, याद रहे है डी डॉलराइजेशन कोई concerted campaign नहीं है,
03:16ऐसा नहीं है कि दुनिया के कोई एक मुल्क या दो चार मुमालिक मिलके इसको implement करने की कोशिश कर
03:22रहा है, ये एक बड़ा ही organic process है, जो अपने आप हो रहा है
03:28हला कि इसमें बाकी जो मुमालिक हैं उनके भी interest हैं और वो इसको कम और ज्यादा करने में मदद
03:34करते हैं, लेकिन हो ये अपने तरीके से रहा है, या अपने process से ही ये हो रहा है, और
03:41प्रोग्राम के शुरू में हम थोड़ा से बता दें कि ये कहां पर पहुंचा हुआ है ता
03:5872 से कड़ी 74 फीसद दुनिया का trade डॉलर में की जाती है, ये नंबर आज अब हम जो फरवरी
04:08महिने में एक दूसरे के साथ बैठ के बात कर रहे हैं, तो ये 74 फीसद से घटके 56 फीसद
04:13पे आ चुकी है, तो आप एक clear देख सकते हैं, एक departure होता हुआ दिख रहा है, हलाकि अभी
04:20ये 50 फीसद के उपर है, और इसमें एक और चीज़ साथ में मैं जोर दूँ कि किसी महिने जो
04:27हुई है, जिसके कारण से आज हम जो प्रोग्राम कर रहे हैं, उसका रीजन ये है कि जिस तरह से
04:33गोल्ड के प्राइसे आपने देखे होंगे, पिछले 18 महिने में दो गुना होग
04:49पिछले 30 साल में पहली बार ऐसा हुआ है, जब गोल्ड में होल्डिंग, डॉलर में जो दुनिया के बैंक्स की
05:00होल्डिंग है, उससे ज़ादा हो गई है, आज अगर हम जिस दिन बैठे हुएं और ये बात कर रहे हैं,
05:07उस दिन गोल्ड में होल्डिंग पुरे दुरे दुन
05:19on वह रूभिकॉन इस महीने क्रॉस हो गया है लेकिन इतनी शांती
05:24ही उाफने की इसकी मैं तफसीर से जानना चाहता हूँ कि डी को बुने िो नहीं
05:45अब देखें इसको इस तरह से देखें कि भारत को रस्या से तेल खरीद रहा है तेल भारत रूस से
05:54खरीद रहा है ना रूस की करेंसी डॉलर है ना भारत की करेंसी डॉलर है लेकिन भारत रूस से जो
06:01तेल खरीदेगा उसकी पेमेंट वो डॉलर ले करता है ठीक है यानि डॉल
06:15से फिर चीन से कोई समान खरीदता है जो उसको खरीदना है ठीक है अब अगर यह हो कि किसी
06:23कारणवश कैसे अभी हमने देखा कि युक्रेइन वार को लेके आपने प्रतिबंद डॉलर पे लगा दी यानि रूस पर आपने
06:29प्रतिबंद लगा दी तो रूस अगर डॉलर में को�
06:46तो रूस यह भारत को कहेगा कि ऐसा करो कि तुम हमें डॉलर में ना देखे कुछ पेमेंट हमें रूबल
06:53में कर दो कुछ हमें रुपया में कर दो और कुछ हमें चाइनिज युवान में कर दो उससे क्या होगा
06:59कि जो रूबल में पे किया वो तो सीरा आ गया जो रूपे में
07:02पे किया उससे भारत से अगर कुछी दूस को खरीजना फर्च करें कि बासमती राइस बहुत बरिताद में खरीदी जा
07:09रही है वो भारत को उसमें रुपे से पे कर देगा और जो जुवान में उसको भारत में पे किया
07:15है वो उससे वो चाइना से समान करी सकता है तो सड़ली य
07:30पार्केट में, एक्सपोर्ट में, डॉलर को प्राइमरी करेंसी ना मानके तमाम दूसरे चीजों से ट्रेड करना, इसमें लोकल करेंसी भी
07:40हो सकती है, ठर्ड करेंसी भी है, लेकिन ये प्रॉसेस इतना आसान नहीं है, क्योंकि जिस किसम का प्री फ्लोटिंग
07:50इंटरनेस्टल
07:50करेंसी डॉलर है, उसके मकाबले की दुनिया की और कोई करेंसी ना तो यूरो है, ना तो पाउंड है, ना
07:57तो यूवान, कोई भी इंटरनेस्टली उस तरह से फ्लोट नहीं करती, इसलिए जो आप ये प्रॉसेस देख रहे हैं, ये
08:03स्लो है, यानि धीरे-धीरे हो रही है, �
08:06लेकिन इसका मतलब ये नहीं है, कि प्रॉसेस हो नहीं है, अच्छा इसमें जो दो चीज़ आपको नज़र आएगी, वो
08:12ये आएगी कि वो देश जिस पर यूवेस जो है, सैंसन को as a weapon बनाके उस पर इस्तमाल करता
08:18है, चाहे वो इरान हो, चाहे वो वेनेजवेला हो, चाहे
08:32से लेकि अभी तक है, वो ये है कि यूवेस के जो एलाइज भी है, उनका एतमाद डॉलर पे as
08:41a safe currency और United States पे as a safe heaven, वो एतमाद घटा जा रहा है, और रादर कहलें
08:49कि अभी जो ग्रिनलेंड वाला मामला हुआ, उसमें आप ये भी कह सकते हैं कि वो फतम हो गया है,
08:54मतलब ये �
08:55कि कल कम्प्लीट जो इनके एलाइज है, उरोपियन डी डॉलराइज कर जाएंगे, लेकिन इसका मतलब है कि अब ये प्रॉसेस
09:01रिवर्सेबल नहीं है, अब इसको अमेरिका वापस नहीं करते हैं, नहीं कर सकता, जिन ममालिक का आपने जिक्र किया, वो
09:11अमरीकी मुहालिफ ह
09:12पुरिया जो डी डॉलरिजेशन की हमायत कर रहे हैं, इनके अलावा कौन से इतहादी मुल्क हैं, जो डी डॉलरिजेशन की
09:21हमायत कर रहे हैं?
09:23मैं एक मौर्गन स्टेनले बहुत फेमस कंसल्टेंसी और बैंकिंग कॉर्म है, मैं उसकी एक रिपोर्ट से अपने दर्सकों के लिए
09:32यहां पे कुछ परना चाहता है, उसकी रिपोर्ट ने एक बात बताई थी कि यह जो अलाइंसे होती हैं, यानि
09:41अमेरिका के अलाइंस किस
10:00इसके कारण अमेरिका का रिजर्व कम से कम 30% बूस्ट हुआ, अगर इन से अलाइंस फ्रे होते हैं, यानि
10:08इन कंट्रीज से अलाइंसे जो हैं उसमें बीग रिडेशन पाया जाता है, तो अपनी आप डी डॉलराइजेशन का प्रोसेस जो
10:15है, स्पीड अप हो जाएगा, य�
10:20जो फेडरल डिजर्व है, अमेरिका का वो एक इन्डिपैन्ड़न अगेंसी है, अमेरिका की हकूमत जो है, वो उसके काम में
10:28दखलन डाजी नहीं करते हैं, जब से डॉनल ट्रम्प आएं हैं, वो उसमें अफेंली दखलन डाजी करते रहें, उसके जो
10:34हेड हैं, जरौम पौ
10:48जो है अब उसके हेड़ बन के आ रहा है अब इससे जो यूरोपियन बैंक्स हैं उनमें ये डर्समा गया
10:54है कि जैसे ही एग्जेकेटिव ब्रांच और फेड के बीच में दोस्ती होती नजर आएगी उसका मतलब है कि फिर
11:01वो उसको इंफ्लूएंस कर सकते हैं तो ये खतरा का �
11:11मुखालिक मुलकों के लिए नहीं है उनके लिए तो अल्रेडी खतरा था और उसके काम कर रहे हैं अब खतरे
11:18की घंटी अमेरिका हामी जो देश जो रखके उसके लिए बन गई है और डबी जुबान में ऑफ दे रिकॉर्ड
11:27जो यूरोपियन सेंट्रल बैंक के जो सुपरव
11:41में एक दम क्रिटिकल घारी में पंटिंग स अप्लाई कर सकते हैं तो पर उनके पैसे वहां जमा है ऑल्डिंक
11:47रहा रकी नहीं तो जब जो
11:59रूस के केस में ये बार बार कहते हैं कि रूस का जो सौवरेन एसेट अमेरिका के बैंक्स में है
12:05और यूरप के बैंक्स में उसको जब्ट करने लेंगे बार बार आपने ये चर्चा सुनी होगी लेकि वो जब्ट करने
12:10ही पाते हैं इसी डरते हैं कि जैसे ही आपने एक बार य
12:27जो कंट्रीज हैं, ये भी दबी जुबान में ये काम कर रहे हैं, और सबसे अवल जो इसमें अमेरिका हामी
12:32देश इसमें शामिल है, वो इसके अंडीनेविया के कंट्रीज है, डन्मर्क, स्वीडन, नॉर्वे, ये सबसे ज़ादा इसमें पहल ले रहे
12:39हैं, लेकिन वो इसको �
12:41मुद्दाना बनाके दबी जुबान में ये काम है जैसा आपके बात उसे अंदाज़ा है कि डी डॉलरिजिशन का अमरीका के
12:47लिए खत्रा तो है लेकिन ये किस हद तक है देखें कि पीछे चीजें दीरे दीरे चल रही होती है
12:58हमें उसकी भनक नहीं लगती वो जब एक दिन ज
13:10आपको एक मेधक को बॉइल करना है आपने अगर पानी गरम किया गरम पानी में आपने मेधक को डाल दिया
13:15तो मेधक तूर के बाहरा आगा वो मरेगा लेकिन अगर आपने ठंडे पानी में मेधक को डाला और उस पानी
13:21को आपने गैस पर चला कि उसको धीरे धीरे गरम करना �
13:24शुरू किया तो मेड़क को पता भी नहीं चलेगा कि पानी कब गर्म हो और कब उसकी मौत हो गई
13:29इसको psychology में boiling the frog syndrome को डी डॉलराइजेशन में वही चीज हो रहा है boiling the frog syndrome
13:36हो रहा है कि अमेरिका को भी पता नहीं चल रहा है कि वो boil हो रहा है पता चल
13:42भी रहा है तो वो इतना बड
13:46ट्रम्प ने धंकी दी कि जो कंट्री डी डॉलराइजेशन में मलविस होंगे उनको उन पर मैं अगर आपने किसी को
13:58धंकी दी कि तुमको डालोगा फिर तो वो और ज्यादा मोटिवेटेड होगा ना कि वो डी डॉलराइजेशन करें तो वो
14:05अब ट्रम्प की जितनी IQ है उस
14:14जितना हास पाव मारेगा यह उतना और बरेगा यह उसी तरह है जब आप डल्दले में फस्ते हैं जितना पाव
14:19मारतें आप उर दल्दल के अंदर घुजते जाते� mechanियार यहीं है कि डि डॉलराइजेशन फिर श्रहरा है जहां तक आमेरीका
14:39के लिए खतरा है तो मैंने अभी
14:44bonds के gains जो है वो बर रहा है जैसे जैसे आपका bond जो है उस उस पे लोगों का
14:51इतमाद जो है घरता जाएगा और वो आपके
14:53internal debt के लिए भी मुश्किल का चीज है यह मैं समझा दू अमेरिका को अमेरिका का दुनिया के एक
15:00लोता देश है जो जितनी चाहे
15:03dollar print कर सकता है और उसके inflation नहीं होगा पैसा जितनी चाहे प्रिंट कर सकता है उसके inflation नहीं
15:09बरता क्योंकि वो पैसा दुनिया यूज कर रहे है भारत अगर अबी रुपिया
15:27अपने पूरे उसका 10% हमें इसलिए पता नहीं चलता क्योंकि रुपिय इतना तेजी से गिर रहा है कि हम
15:35रुपिय के मुकाबले उसको देखते हैं और कहते हैं कि नहीं रुपिय का मुकाबला पाउंड से करेंगे अगर आप रुपिय
15:43का मुकाबला यूरो से करेंगे तो आ
15:57करन्सी के इसाथ पगी रहा है शायद इसी लिए हमारे जहन में वो चीज देंगा तरब की पजीर ममालिक का
16:03पर क्या असर पड़ेगा इस डी डॉलराइजेशन का
16:09देखें डी डॉलराइजेशन मुझे यह गाता है कि ये जो इंस्क्रूमेंट
16:14कोरसिफ इंस्क्रूमेंट है अमेरका के हांच में पहली बार के बार आपपे अगर हमला कर दिया तो इस्की वैल्यू है
16:34लेकिन अगली बार से आप भी तैयार रहेंगे कि ये आदमी मेरे पर हमला कर सकता है, इसको law of
16:39diminishing return कहते हैं, हर बार आप उस चीज का इस्तमाल जितनी बार करते जाएंगे, उसका value उतना घटा जाएगा,
16:45मुझे ये लगता है कि एक alternative financial system का है, वो BRICS के तत्वावधान में हो, �
16:51या और किसी SEO के तत्वावधान में हो, एक alternative financial system जो हो, वो आपको immerd होता हुआ, यहाँ
16:58पर नजर आ रहा है, और जैसा मैंने कहा, ये irreversible है, दूसरा एहम मौजू जो है, यूकरेन और रूस
17:06के दर्मियान चल रही जंग है, क्या इसमें अमरीका या खुच जेलेंस की जाने �
17:10से कोई deadline, यानि जून में जंग बंदी का जिक्र है, और अगर है, तो जून ही क्यों? टाइम लाइन
17:18तो अमेरिका अपने तरीके से लगाता रहता है, वो टाइम लाइन अभी तक follow होई, मसला ये है कि यूकरेन
17:26में भी अमेरिका का कोई बहुत जादा, मतलब वो धकल तो है,
17:29वो हत्यार वगरे तो रोग सकता है, लेकिन यूप्रेनियन जो रोग element है, उनके काम को नहीं ले सकता है,
17:35अभी आपने देखा दो रोजा मजाकरात जो है, वो अबुदाबी में पेश आए, और उसके next day, मतलब उसके दो
17:43दिन बाद ही, जो एक बहुत बड़े general थे, रस्या क
17:57को भी पता है कि वो शहर दर शहर जीतता जाएगा, वो यूकरेन के energy infrastructure को डिग्रेड करता जाएगा,
18:05वार को जल्दी रुकवाना यूकरेन के हक में, वार को जल्दी रुकना रूस के हक में नहीं है, रूस तो
18:12चाहता है कि जितनी ज़्यादा एरिया पे उसका कब्जा होगा
18:16conflict line वहीं पे फिरोज हो जाएगा, तो अगर 10 km हम और आगे जाते हैं, तो तो रूस के
18:22हक में 10 km आगे line जो है, तो इसलिए रूस के यह हक में है, इसलिए रूस कहता है
18:29कि हम ceasefire नहीं करेंगे, कि ceasefire का फाइदा उठाती है यूकरेन, re-arm होने के लिए, तो बोलता हम
18:35ceasefire नहीं कर
18:45नहीं करता है, मैं तफसील से आप से जनना चाहता हूँ, इस जन्ग ने आलबी सियासत और मेरिशत को किस
18:53तरह मतासिर किया है, तो आपको नजर आही रहा है कि यूरप की जो डिपेंडेंसी अमेरिका पे हुई है, और
19:02एक यूरप का जो आप डी इंडिस्क्राइजेशन दे
19:15गैस रूस से हम लेंगे और उससे हमारा इंपुट कॉस्ट कम होगा और हम प्रोडक्शन करते रहेंगे, वो सस्ता गैस
19:22अमेरिका ने बम मारके उड़ा दिया, नौर इस जो आपना वो सस्ती गैस आपके पास नहीं है, तो आप अमेरिका
19:32का शेल गैस और ये तमाम चीज़े
19:34ले रहे हैं जो एक्स्टोली में महंगी परती है, तो सड्ली इंपूर्ड कॉस्ट बर गया, आपके प्रोडक्श अब चाइना के
19:41मुकाबले कॉंपीटिट Armor नहीं रहे गए हैं, तो उन शित्रों में भी जहां आपकी बरतरी चाइना पो थी पर्स करें,
19:51कि जैसे
19:52हाई टेक इंडस्ट्री में आपकी बरतरी की वहाँ पे भी अब चाइना आपको पचाता है
19:57तो एक यूरप का जो एकनॉमिक दिक्लाइन है वो आपको नजर आ रहा है
20:02सोशल डिक्लाइन भी आपको इसकी नजर आ रही है
20:05क्योंकि जैसे ही नैटो में यूरप जो है एक देर परसंट अपने बजट का खल्च करता है
20:10अब रोड़ाल टरम्प सबसे प्रेशर डाल रहे हैं कि पाँच परसंट खल्च करो
20:14तो वो चार परसंट कहां से आएगा वो कहीं से तो खीचा जाएगा
20:17तो वो जो सोशल प्रोग्राम है जिसकी लोग आदी हो चुते हैं
20:21वहां से पैसे लिये जा रहे हैं तो इससे यूरप में आपको अंडरेस्ट और दिख रही है
20:25और जो दाएं बाजू की पार्टियां हैं वो इस अंडरेस्ट का फाइदा उठा के
20:29तमाम जग़ों में बारबार रिटानी कर रही हैं
20:33कुछ जगों पे जो बाएं बाजू की बी जो एक्ट्रीम पार्टियं है
20:48और यह मेरे ख्याल से यूरप के लिए बहुत ही यानि खत्रे का वो विशह बन चुकी
20:56इंटरनेस्टनली भी जैसा हमने कहा कि एक एक रफ इनफॉर्मल एलाइंस जो है वो रश्या और चाइना के बीचा को
21:04नजर आ रही है भारत ने तेल लेना कम किया है रश्या से चाइना ने इस महिने पिछले दो महिने
21:11में तेल लेना बढ़ा दिया है दुनिया में एक अमुक �
21:15एमाउंट ही पेल निकलता है, आप एक आदमी नहीं लेगा तो कोई दूसरा लेगा, यानि वो कान इधर से पकड़िये,
21:20उधर से पकड़िये, वो घूम पिर के कही न कहीं पहुंचाता है, रशिया ने अभी तक financial pressure sustain किया
21:27है, कितने दिन कर सकता है, ये इसकी position गोई हम नहीं कर
21:30सकते हो, सकता है साल भर और कर ले, सकता है डेर साल और कर ले, इसलिए वो भी ये
21:34लराई बन करना चाहता है, लेकिन अगर आप तमाम पाटीज को देखें जो इस लराई में involved हैं, तो सबसे
21:41अच्छे financial condition में अभी रशिया ही है, और वो इसको कई सालों, अभी साल, डेर साल, क
21:47कम से कम, बिना किसी major problem के इसको continue कर सकता है, उसके बाद हो सकता है कि जो
21:53economic pressures है, वो खेवी होने लगे रशिया के ऊपर में, लेकिन एक और साल का वक्फा उसके पास है,
22:00जिसमें कि वो मदीद area जो है वो जीत सकता है, मदीद अपने आपको युकरेन में इंट्रेंच कर सकता है
22:07और अपने economic, political और military goals को परदर achieve कर सकता है, यह थे हमारे मेमान सौरब कुमार शाही
22:16जो हमारे नादरीन को आलमे मुद्दों के तालुक से रोशना सकरा रहे थे, हमेशा की तरह आखिर में, मैं तमाम
22:23नादरीन और सामाईन से गुजारिश करता हूँ, कि वो अपनी खीमते आ
22:37हम अगले प्रोग्राम में फिर हाजर होंगे एक नए रुख और एक नई सोच के साथ, तब तक के लिए
22:44अपनी मुद्बस सोच को जिन्दा रखिए और प्रोग्राम दुनिया मेरे आगे को देखते रहिए
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