00:00बनवास का समय था रात का अंधेरा और हिमाले का वो इलाका जहां सूरज भी डर कर देर से निकलता है
00:06द्रोपती को मिला एक दिब्बय फुट जिसकी खुश्बू पूरे आश्रों में फैल गी लेकिन उस खुश्बू में कुश अजीब सा था
00:12कुश अलोकी कुश ब्यानक बीम उस फूल की तलास में एक सुनसान परवत की और बड़े तभी रास्ता अचानक रुक गया जमीन पर पड़ी थी एक बिशाल बानर की पूश इतनी बड़ी की पूरा रास्ता दग गया बानर की अवाज आई कम जोड तूटी हुई बीर भूम
00:42शीली तक नहीं तभी जंगल से तेज हवा चलने लगी पेड चर्म राने लगे आसमान में बादल गर्ज उठे बीम का दिल काम गया उन्होंने कामती अवाज में कहा आप कोई सधारन बानर नहीं है अचानक बो बानर खड़ा हुआ और उसी पल पूरा परवत काम उठा बो
01:12दुनिया को पता चल गया तो धरती सह नहीं पाएगी अगले ही शन सब कुछ शांत बीम अकेले खड़ेते दर से कामते हुए और कहा जाता है उस परवत पर रात पे जाने वाले लोग कभी बापिस नहीं लोड़ते वो परवत कौन सा था और क्या हनुमान जी आज भी वहीं
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