00:00अशोक बाटी का जहां हवा भी सांस लेने से डढ़ती थी जहां पेडों की परिशाई जिंदा लगती थी उसी अंदेरे में एक शोटा सा बानर पेड की डाल पर बैठा लंका को देख रहा था लेकिन तबी उसकी नजर पड़ी एक पेड के नीचे बैठी माता सीता पर उनकी
00:30सीता माता ने उपर देखा इतना शोटा बानर लेकि उसकी आँखों में आग जल रही थी हनुमान जी बोले मा जदी जी आग बढ़क गई तो पूरी लंका राक बन जाएगी और मुझे डर है कहीं मैं प्रभु शिरी राम की आग्या तोड़ न दू आसमान में काले बादल
01:00जैसी थी ऐसे दड़ार रही थी मानो अकास फट जाएगा माता सीता काम पुठी बेटा रुक जाओ अपना सब रूप शोटा करो कोई देख लेगा एक पल में सब शांत बेभ्यान करो फिर से एक शोटे बानर में बदल गया हनुमान जुकर बोले मा जे शक्ती मेरे लिए क
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