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00:0019-20 सदी के लोगों ने अपनी जिन्दगी में एक ऐसी जंग भी देखी थी जो 10-20 साल नहीं बलके सिर्फ और सिर्फ 38 मिनिट्स तक चली थी।
00:11हिस्टरी में ऐसा पहली बार हो रहा था कि किसी जंग की खबर कहीं तक पहुंचने से पहले ही जंग खतम हो गई।
00:18अफरीका में लड़ी जाने वाली एंगलो जंजिबार वार को गिनीज बुक की तरफ से दुनिया की सबसे चोटी जंग होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मिल चुका है।
00:28पर सवाल ये है कि एंगलो जंजिबार की ये तारीखी जंग किन दो देशों के दर्मियान होई थी और महज सिर्फ पौने घंटे के अंदर अंदर इसका फैसला कैसे हो गया।
00:40जैम टीवी की वीडियोज में एक बार फिर से खुशाम दी थी।
00:43नाजरीन ये तारीखी जंग इस आईलेंड पे हुई थी जो के इंडियन ओशन में जैन्जिबार के नाम से एक आईलेंड कंट्री हुआ करती थी।
00:51इस्ट अफरीका के कोस्ट से सिर्फ 40 किलो मिटर दूर जैन्जिबार सलतनत अमान के कंट्रोल में हुआ करता था।
00:59सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था लेकिन फिर एंट्री हुई एक ऐसी पावर की जिसने पॉलिटिक्स के जरिए जंजिबार और इस्ट अफरीका पे अपना राज चलाने की कोशिश की।
01:10जी हाँ हम बात कर रहे हैं ब्रिटिश रूल की।
01:13एस्ट अफरीका समेथ जंजिबार आईलैंड पर ब्रिटिश एमपायर की बहुत पहले से नजर थी।
01:19उनको यहां की स्ट्रटीजिक लोकेशन का फाइदा उठा कर यहां के कीमती रिसोर्स को कैसे भी करके अपने कंट्रोल में लेकर आना था।
01:27ब्रिटिशर्स खुद को काफी ज्यादा एडवांस समझते थे खास्ट और पर इस्टरन कंट्रीज के मकाबले में यानि इंडिया, अफरीका और कई अरब कंट्रीज में लेकिन क्यूंके जंजिबार आईलैंड ओमान के कंट्रोल में था और ब्रिटिशर्स का ये खुआ�
01:57यही वज़ा थी कि अक्सर ये लाइन ओफ उमान के लकब से भी चाने जाते थे, अब जाहर है इनके रहते हुए ब्रिटिश इंपायर का उमान के किसी भी हिस्से पर कबजा करना मुम्किन नहीं था, 1856 में जब इनकी मौत हुई तो उमान के तخت के लिए इनके बेटों में �
02:27उमान से अलग करके एक नएा मुलक बना दिया, जन्जी बार जो पिछली कई सद्यों से उमान का हिस्सा रहा था, माजिद बिन सैद के इस फैसले से कई अर्ब सल्तानों ने जन्जी बार को नएा मुलक एक्सेप्ट करने से इनकार कर दिया, लेकिन ब्रिटिश इंपायर के
02:57जन्जिबार की मेन सोर्स आफ इंकम यहां मौजूद दुनिया की आखरी सिलेव मारकेट थी
03:04यानि वो मारकेट जहां घुलामों की ट्रेडिंग होती थी
03:07घुलामों को अफरीका के मेन लेंड से जन्जिबार आईलेंड तक रसीयों से बांध कर लाया जाता था
03:12शिप में अकसर घुलाम अपनी रसीयों खोल कर इंडियन ओशन में कूद जाते थे
03:17कई बिमार पड़ जाते थे और कई सिर्फ 40 किलो मिटर के चोटे से सफर के दुरान ही घुट कर मर जाते थे
03:24उनकी लाशों को बेदर्दी से समंदर में फैंक दिया जाता था
03:29जन्जिबार में मौझूद गुलामों की मार्किट में इनको बेचा जाता था
03:33यहां चोटे चोटे सेल्स में कई सो गुलामों को थोड़ी सी हवा और बिना खाने पीने के बंद रखा जाता था
03:40गुलामों की बुलियां ऐसे लगती थी कि पहले उनको लाइन से खड़ा करके दरगतों के साथ बांध दिया जाता था
03:47और फिर हर किसी को जोर जोर से कोड़े मारे जाते थे
03:51जिसमें बरदाश्ट ज्यादा होती थी और वो कोड़े खाने के बाद भी रोता या चिलाता नहीं था उसके दाम ज्यादा लगते थे
03:59साल गुजरते गए और जन्जिबार के सुल्तान भी बदलते गए
04:04उनका मेन इंकम सोर्स, सिलेव मारकेट और सबसे बढ़कर ब्रेटिशर्स की सपोर्ट भी हासिल थी
04:10सुल्तान के लिए जन्जिबार में एक आली शान महल बनाया गया जो के बिलकुल सी फरंट पे था
04:17इस महल में सुल्तान के लिए हर वो फैसलिटी थी जिसको उस वक्त इमेजिन करना भी पॉसिबल नहीं था
04:23सबसे बढ़कर ये पैलिस एस्ट अफरिका में वो पहली बिल्डिंग थी जिसमें अलेक्रिसिटी कनेक्शन मौजूद था
04:30इस महल में ज्यादा तर लकडी का काम हो रखा था और इसमें मौजूद तमाम बिल्डिंग्स एक दूसरे से ब्रिज के जरीए कनेक्टेट थी
04:37अब इस पॉइंट पे ब्रिटिशर्स का जन्जिबार की सलेव मार्किट को लेकर दुनिया में काफी बुरा इंप्रेशन जा रहा था
04:45क्योंके वो ही को थे जो जन्जिबार के सल्तान को सपोर्ट करते थे
04:49लेहाजा उन्होंने जन्जिबार के सुल्तान पर प्रेशर डाला कि वो सलेव मार्किट को बंद कर दे
04:54काफी कोशिशों और एक्रिमेंट्स के बाद 1873 में दुनिया की आखरी सलेव मार्किट को हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया
05:04इस सब में एक बात तो किलियर थी कि ब्रेटिश का जन्जिबार पर कंट्रोल काफी मजबूत होता जा रहा था
05:10फास्ट फारवड करके चलते हैं 25 आउगस्ट 1896 जन्जिबार के प्रो ब्रेटिश सुल्तान की अचानक मौत हो जाती है
05:19उनको अपने ही कजन खालिद बिन भरगश ने जहर देकर मारा और जन्जिबार का सुल्तान बनकर बैट गया
05:26वो भी बिना ब्रेटिशर्स की मरजी के
05:29क्योंके ब्रेटिशर्स चाहते थे कि अगला सुल्तान भी उनकी ही मरजी का बने
05:34और इस काम के लिए उन्होंने हमूद बिन मुहम्मद को चुना था
05:37ब्रेटिशर्स को खालिद बिन भरगश की साज़िश का इलम हुआ
05:41तो उन्होंने उसके महल में एक पेगाम भिजवाया
05:44जिसमें सीधी सीधी धंकी थी
05:46धंकी में बोला गया कि 27 आउगस्ट सुभा 9 बजे तक महल खाली हो जाना चाहिए
05:52जन्जिबार के नए सुल्तान खालिद ने अपनी फोर्स कठी की और महल में खुद को बंद कर दिया
05:58धंकी के साथ ही जन्जिबार आईलेंड को ब्रिटिश नेवी की शिप्स ने चारों तरफ से घेड लिया
06:04अगली दो राते महल में काफी टेंशन रही
06:0727 आउगस्ट की सुभा 8 बजे यानी अल्टी मिल्टम खतम होने से एक गंटा पहले
06:13ब्रिटिश काउंसल के पास सुल्तान की तरफ से एक पेगाम आया
06:17जिसमें लिखा था कि वो बातचीट से मामले को खतम करने के लिए तयार है
06:22ब्रिटिश काउंसल ने जवाब दिया कि बातचीट सिर्फ तब हो सकती है अगर तुम हमारे दिये हुए हुकम को मान जा
06:29आट बच कर तीस मिन्टों पे खालिद ने एक और पेगाम भेजा कि मेरा जन्जिबार के तخت को छोड़ने का कोई इरादा नहीं है
06:38और मुझे नहीं लगता कि ब्रिटिशर्स हम से जंग लडने की हिम्मत करेंगे
06:42ब्रिटिश काउंसिल ने जवाब दिया कि हमारा भी हमला करने का कोई इरादा नहीं है
06:47लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हमला कर नहीं सकते
06:51इस वक्त जन्जिबार के आली शान महल के बाहर 2800 गार्ड्स मौझूद थे
06:58इसमें कुछ सिविल लोग, कुछ महल के अपने गार्ड्स और कई सो सुल्तान के अपने सर्वेंट्स और गुलाम भी शामल थे
07:06इसके साथ साथ रॉयल निवी को टकर देने के लिए सुल्तान के महल के बाहर इंडियन ओशन में एक शिप भी खड़ी की गई
07:13ये उस वक्त 32,000 पौंड्स की HHS क्लासको रॉयल यार्ड थी जो 1873 में कुईन विक्टॉरिया की तरफ से ही जन्जिबार के सुल्तान को गिफ्ट की गई थी
07:25इसके अलावा जन्जिबार की दो स्टीम बोर्ट्स भी ब्रिटिश रॉयल निवी को टकर देने के लिए मौजूद दी
07:31ठीक 9 बजे जब सुल्तान को दिया गया अल्टिमेटम खतम हुआ
07:36तो ब्रिटिश निवी की दो क्रूजर शिप्स, तीन गन बोर्ट्स और डेट सो मरीन्स आईलेंड की तरफ बढ़ना शुरू हुए
07:43याद रहे कि इन 150 लोगों का मुकाबला सुल्तान के 2800 गार्ड्स के साथ था
07:50ठीक 9 बज कर 2 मिन्टों पे तीनों गन बोर्ट्स, रैकून, थ्रश और इस्पैरो ने महल पे अंदा धुन फायर खोल दिये
07:58पहले ही हमले में महल के अंदर 12 पाउंडर कैनन को तबा कर दिया गया
08:03हमले में सुल्तान की रॉयल यार्ड HHS ग्लास्को को भी एक ही जटके में तबा कर दिया गया
08:09लेकिन क्यूंके वो हारबर पे ही खड़ी थी जहां पानी कम था
08:12इसलिए उसका उपर वाला हिस्सा पानी के बाहर था
08:16ग्लास्को के कर्यू ने फॉरण ब्रिटिश फ्लैक दिखा कर खुद को सरेंडर कर दिया
08:21ब्रिटिशर्स का प्लैन था कि सुल्तान खालिब बिन भरगश को अरेस्ट करके उसको इंडिया लेकर जाएंगे
08:27लेकिन पहले ही फायर पर सुल्तान अपने दूसरे अरब साथियों के साथ चोरी छुपे महल से फरार हो गया
08:34सुल्तान की 2800 की आर्मी में से 500 सोलजर्स हैवी बंबार्डमेंट की वज़ा से मारे गए
08:40बिटिश नेवी ने टोटल 500 शेल्स, 4100 मशीन गन के राउंड्स और 1000 राइफल राउंड्स फायर किये थे
08:489 बचकर 37 मिन्टों पे बिटिश सोलजर्स महल के अंदर गुस चुके थे जिस पर बचे हुए पैलिस गार्ड्स ने भी सरिंडर कर दिया
08:58ठीक एक मिन्ट के बाद 9 बचकर 38 मिन्टों पे बिटिश मेरीन्स ने महल की च्छत पे लगा सुल्तान का जंडा उखार दिया
09:06और यहीं पर 38 मिन्टों तक चलने वाली ये जंग अपने इختताम को पहुँची
09:11हैरत की बात यह है कि जहां इस पूरी जंग में सुल्तान के 500 लोग मारे गए
09:16वहीं बिटिश नेवी का सिर्फ एक सेलर जखमी हुआ था
09:21बाद में मालुम पड़ा कि सुल्तान खालिद बिन बरगश ने जर्मन इस्ट अफरीका में जाकर पना ली है
09:26उस वक्त इस अफरीका में दो बड़ी ताकते मौझूद थी एक तो थे बिटिशर्स और दूसरे थे जर्मन्स
09:33वहां महल पे बिरिटिश ने कबजा जमाने के फौरण बाद उसी दिन अपने पसंद के सुल्तान हमूद बिन मौम्मद को जन्जिबार का नया सुल्तान बना दिया
09:43इतिहास में लड़ी जाने वाली इस 38 मिनिट्स की जंग ने जन्जिबार में भारी बिरिटिश रूल का एक नया सिल्सला शुरू कर दिया
09:52इसके बाद जन्जिबार बिरिटिशर्ज की एक इंडिरेक्ट कॉलनी बन कर सुल्तान हमूद बिन मौम्मद की सरबराही में चलती रही
10:00और अगले 10 सालों में 17,200 जन्जिबारी घुलामों को अजाद करके जन्जिबार के कौने कौने से सलेव कल्चर को जड़ से उकार दिया गया
10:1018 और 19 सेंचरी में बिरिटिश ने जिन जिन मुलकों पर कबजा करके उनको अपनी कॉलनी बनाया था
10:17इस से ह्यूमन सिविलाइजेशन को फाइदा हुआ या नुकसांग आपकी इस बारे में क्या राय है
10:22उमीद है जेम टीवी की ये वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे
10:27आप लोगों के प्यार भरे कॉमेंट्स का बेहद शुक्रिया मिलते हैं अगली शांदार वीडियो में
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