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00:00दूर दराज पैसिफिक कोशन में मौजूद ये है पॉम्पी आइलेंड जो अपने मैंगरूव्स के जंगलात के नीचे एक ऐसा राज छुपाए बैटा है जिसको देखकर इनसानी दिमाग दंग रह जाता है।
00:13पॉम्पी आइलेंड की तनहाई का अंदाजा लगाया जाए तो इसके सबसे करीब पापा न्यूग गीनी है और वो भी यहां से 1900 किलो मिटर दूर है और दूसरे नमबर पे जबान है जो के 3600 किलो मिटर दूर है उपर से देखा जाए तो पॉम्पी आइलेंड सिर्फ जंगल
00:43माना जाता है कि अगर किसी ने यहां जाने की कोशिश की या इस शहर के बारे में बात करने की भी कोशिश की तो उनकी मौत हो सकती है जैम टीवी की वीडियो में एक बार फिर से खुशाम दी देए नाजरीन नैन मेडोल नामी ये शहर पॉम्पी आइलेंड के इस्ट में फ
01:13जाती है जिसको एक पत्थर पर रगड रगड कर वनाया जाता है ऐसा मना जाता है कि ये सारी रسم पूरी करने के बाद नैन मेडोल की आतमाहें हमला नहीं करتी जंगल में जाने के बाद भी नैन मेडोल को पूरी तरहां से नहीं देखा जा सकता क्यूकिणके मैंगरूवव �
01:43पत्रों के बड़े बड़े पिलर्स की मदद से बनाया गया था ये खास पत्थर बसाल्ट रॉक कहलाता है जो लावा के ठंडे होने की वज़ा से बनता है एक एक पत्थर का सिलैब कम से कम भी पांच टन वजनी है यानि करीब चार सेडान गाडियों के बराबर पर यहां कु�
02:13चैलेंजिंग हो सकता है तो सोचें ये काम 800 साल पहले पैसिफिक ओशन की विरानियों में कैसे किया गया होगा इस पहली की दिल्चसपी गीजा के पिरमिड्स और इस्टर आइलेंड्स में बने पत्थरों के इस कल्चर से हर्गिस कम नहीं है सबसे बड़ी बात ये है कि आस
02:43कैसे गया होगा लोकल्स के बीच कहानिया मशूर है कि ये काम जादू की मदद से किया गया था पर इसकी असल वज़ा क्या है ये जानना काफी मुश्किल हो सकता है क्योंके ना ही यहां की कोई रिटन हिस्टरी है और ना ही एविडेंस सिर्फ कहानिया है जो सदियों से चें
03:13लेने का फैसला किया गया लिडार स्कैनिंग डिवाइस को ड्रोन में इंस्टाल करके इस पूरे एरिया की स्कैनिंग स्टार्ट टी गई लिडार की वेवज दरखतों के बीच में से तो गुजर सकती हैं लेकिन ठोस पत्थरों से टकरा कर वापस लिडार डिवाइस में रिक�
03:43के चुपे हुए स्ट्रक्चर्ज का एक शांदार मंजर पेश किया यहां दरखतों के नीचे चुपे करीब 90 स्ट्रक्चर्ज उभर कर सामने आ गए इसमें रिजिडेंशल कॉम्पलेक्सेज टेंपल्स और रिच्वल प्लेसेज भी थी एक चुपे हुए रिच्वल स्ट्र
04:13मजीद इन्वेस्टिकेशन की गई तो मालुम पड़ा के असल में हर एक स्ट्रक्चर एक अलग मैन मेड आईलेंड पे बनाया गया है और इन तमाम आईलेंड्स के गिर्द बड़े बड़े पत्थरों से आर्टिफिशल सी वाल भी बनाई गई थी ताके समंदरी लहरों से �
04:43वाकई किसी चमतकार से कम नहीं है एक तरफ आज की इतनी एडवांस टेकनोलोजी के बावजूद भी दुबई के वर्ल आईलेंड्स वापस समंदर की नजर हो रही है और दूसरी तरफ नैन मेडोल में बसने वाले आठ सो साल पहले मैन मेड आईलेंड्स का पूरा शहर बन
05:13इतना आठ एरक्राफ्ट केरियर्स का होता है यहां फिर दुनिया की सबसे बड़ी फरेट ट्रेन जो के आठ किलो मिंटर लंबी थी ऐसी आठ ट्रेन्स का वजन नैन मेडोल के स्ट्रक्चर्स के वजन के बराबर बनता है अब सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी तादात म
05:43डेड़ 200 फिट उन्ची कोईरी पे चड़कर देखा गया तो वहां हैरतंगे स्टॉर पे अभी तक बसाल्ट रॉक के स्लैब्स मौजूद थे जो शायद किसी वज़ा से यहीं पड़े रह गए इन स्लैब्स पर धुएं और राख के निशानात पाए गए जिससे ये जाहर ह
06:13कुछ हिस्सा तो सौल्फ हो चुका था अब बारी थी ये जाने की कि इन पत्थरों को कोईरी से 18 किलो मिटर दूर नैन मेडोल तक कैसे ले जाया जाता था जैसा कि आपने पहले जाना कि एक एक पत्थर 5 टन से 70 टन तक वसनी है इतना ज्यादा वजन वामफी आइलेंड के �
06:43यहां से किसी तरहां इन पत्थरों को ओशन तक पहुंचाया जाता था और फिर आईलेंड की दूसरी साइड तक किसी बोट में रख कर पूरा गोल घूमकर नैन मेडोल तक पहुंचाया जाता था इस थियोरी को साबित करने के लिए नैन मेडोल के साथ सी फलोर को सोनार स्क
07:13वोशन के फिलोर पर भी मौजूद थे जो शायद ट्रांसपोर्ट के दौरान समंदर में गिर गए थे ये पिलर्ज इस बात का सबूत है कि नैन मेडोल तक इतने भारी पत्थर समंदर के जरीए ही लाए जाते थे नैन मेडोल पर रिसर्च के दौरान हर मोड पर कुछ नया द
07:43पॉमफी आइलेंड से 15 किलो मिटर दूर एंड अटोल नामी आइलेंड का जायजा लिया गया वहां पर भी कई मकामात पर बसाल्ट रॉक के पिलर्ज और धेर सारे सकाव स्टोन्स नजर आए यानि ये कोई मामुली लोग नहीं बलके बहुत ज्यादा स्किल्ड लोग थे �
08:13स्टोन आर्ट की साइट नजर आई जहां पत्रों पर मुक्तलिफ कार्विंग्स हो रखी थी अब ये कार्विंग्स आट सो नहीं बलके करीब 2000 साल पुरानी है जिन में एक अनुखा सिंबल भी तराशा हुआ दिखाई दिया हैरत की बात ये है कि ऐसा ही सेम सिंबल 3600 किलो म
08:43इतना बड़ा सफर बगएर GPS और advanced equipment के करना और कई सदियों पहले man-made islands और उसके उपर इतने बड़े structures बनाना ये जाहर करता है कि यहां उस दोर की ruling elite रहती थी पर अभी तक ये किसी को भी मालूम नहीं है कि इतना बड़ा सिस्टम छोड़कर ये आखिर चले कहां गए
09:04क्या यहां कोई natural disaster आया था या फिर उनको समंदर निगल गया उमीद है Zen TV की ये वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे
09:15आप लोगों के प्यार भरे comments का बेहत शुक्रिया मिलते हैं अगली शांदार वीडियो में
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