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  • 6/17/2025

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Transcript
00:00एक लंबह समय पहले एक बड़ी शहर में बड़ी गंदी हालत में एक गरीब लड़की जीती थी।
00:06उसका नाम सरला था। वो अपने माता, पिता और भाई के साथ एक छोटी सी घर में रहती थी।
00:12उसका पिता शहर में मिल रहे छोटे मोटे काम करता था।
00:17और इतना ही नहीं सारा दिन मेहनत करके कमाई हुए पैसों में से आधे पैसे वो दारू में लगा देता था
00:25इसलिए उनकी घर की हालत दिन बदिन बिगड़ती गई
00:29ना उनको हर रोज खाने के लिए खाना था ना पहनने के लिए कपड़े थे
00:34सरला का भाई भी हमेशा भूप के वज़े से रोते रहता था और उसकी मा की तव्यत हमेशा खराब थी
00:44इसलिए सरला उसके भाई का ध्यान रगती थी सारे घर का काम भी वही करती थी
00:50जितना था उतने में ही खाना पकाकर अपने भाई को देती थी
00:55और अपने मापो भी खिला देती थी
00:58अगर कुछ बच्चता तो खाती थी
01:01वरना वो भी नहीं करती
01:05ऐसे दिन बीचते गये और उसकी मापी हालक बिगरता गया
01:10इसलिए कम से कम दो दिनों में एक बार भी खाना मिलना मुश्किल बन गया था
01:15इसी कारण वो फैसला करती है कि वो भी कोई न कोई काम करेगी और पैसे कमाएगी
01:20ताकि उनको खाने के लिए खाना मिले और उनकी मा के लिए दवाईया भी
01:24उसके बाद वो अपने एरिया में कुछ बच्छों से गुलाब के फूल खरीदती है
01:31और उसके बाद ट्राफिक सिगनल में जाकर उनी फूलों को बेचने लगती है
01:37ऐसे दिन पूरा खाये बिना सोये बिना मेहनत करके कमाए हुए कुछ पैसों से वो अपने भाई और मा को खाना देती थी
01:49बचे पैसों से वो जब अपनी मा के लिए दवाया खरीदने जा रही थी वहाँ उसका पिता हकर
01:55यह सब खाने के लिए तुम लोगों को पैसे कहां से आए तब सरला घबराते हुए वो आज पूरा दिन में ट्राफिक सिगनल के पास फूल पेच कर कमाए हैं पपा
02:12कुछ पैसे बचे हैं क्या हां कुछ बचे हैं पापा मा के लिए दवाया खरीदने जा रही है
02:21ठीक है इधर देदो मैं जाकर लेके आऊंगा दवाया
02:27मैं जाकर लाओंगे न पपा
02:30एए पैसे दो इधर दवाया लाएगे दवाया
02:35यह कहकर उसके पास मौजूद पैसे सारे खींच लेता है
02:40सरला रोते रोते ऐसे ही सो जाती है
02:43आगरे दिन कुछ खिलोने लेकर उसी ट्राफिक सिगनल के पास उन्हें बेचने जाती है सरला
02:50आज कुछ भी करके मा के लिए दवाया लेके ही जाना होगा
02:54पापा को तो एक भी रुपए नहीं मिलना चाहिए
02:57ये फैसला करती है
02:58उस ट्राफिक सिगनल में रुके हर कार के पास जाकर ऐसे ही पूछती है
03:02खिलोने चाहिए क्या भाया
03:04दीदी खिलोने है दीदी
03:07सर एक लेलो सर
03:09मैडम मैडम एक खिलोना लेलो मैडम
03:11सर सर एक खिलोना करीदो सर
03:15दीदी एक खिलोना दीदी
03:18ऐसे वहाँ आते जाते सब लोगों से वो विंती करती है
03:21लेकिन दोपैर होने के बावजूद एक बिखिलोना कोई भी नहीं खरीदता है
03:26और उसे एक फूटी कौडी भी नहीं मिलती है
03:29इसलिए सरला बहुत निराश होती है
03:31और क्योंकि वो सुबसे कुछ नहीं खाई है उसे बहुत थकान सा होता है
03:36लेकिन फिर भी जैसे ही ट्राफिक सिगनल के पास गाड़ियां रुकते हैं
03:40वो भागते हुए फिर से बेचने की कोशिश करती है
03:44लेकिन इतने में वो एक कार के सामने थकान के कारण
03:48चक्करा कर गिर जाती है
03:49जब आंके खोड कर देखती है
03:51तो सरला एक बड़ी सी घर में और बड़ी से बेट पर सोती रहती है
03:56और वहां मौजो दो आदमी
03:59मेरा नाम सुरेश है बेटी
04:01और ये मेरी बीवी है सुमती
04:04तुम चक्करा कर गिर गई थी
04:06इसलिए हम तुमें घर ले आए
04:08तुम फिकर मत करो
04:09ऐसे कहते है
04:10तुम्हारी नाम क्या है बेटी?
04:14मेरा नाम सरला है
04:17मुझे घर जाना है
04:19तुम कहा रहती हो बेटी?
04:22हम यही सिगनल के पास
04:24मौजूर बस्ती में रहते हैं
04:27हम तुमें खूप बढ़ाएंगे
04:28तुम हमारे साथ रह जाओगी क्या?
04:31नहीं, मुझे घर जाना है
04:33मेरा भाई छोटा है
04:35और मा का तब्यत भी खराब है
04:37आज मैंने एक भी खिलोना नहीं बेचा है
04:40कुछ भी करके
04:41अज मा के लिए दवाईयां लेके जाना ही होगा
04:44मैं घर चली जाओंगी
04:46यह कहकर वहाँ से निकलने ही लगती है कि
04:49रुको बेटी
04:50तुम्हें जो दवाईयां चाहिए
04:52वो मैं खरीद दूँगा
04:53और मैं तुम्हारी घर के पास भी तुम्हें छोड़ दूँगा
04:55यह कहकर सरला को कार में बिठा कर
05:00कुछ दवाईयां और खाना खरीद कर
05:03सरला को उसके घर में ड्रॉप कर देते हैं
05:10तब उस दिन सरला जो कुछ भी हुआ
05:12उसकी मा को बताती है
05:13अगर वो लोग फिर से दिक है
05:17तो मेरी तरफ से शुक्रियादा करो उनका
05:20ठीक है मा
05:22यह कहकर वो उस दिन पेट भर खाना खाती है
05:26और खुशी से सोती है सरला
05:28अगले दिन सुरेश और सुमती सरला के घर आकर
05:33सरला के मा के साथ ऐसे कहते है
05:35हमारी भी सरला जैसी ही एक बेटी थी
05:38तब्यत खराब होने के कारण वो गुजर गए
05:41अगर आपको एतराज नहो तो आपकी बेटी को हम अपना लेंगे
05:45हम वैसे भी करीब हैं
05:48कम से कम उसको तो एक अच्छी जिंदगी मिलेगी
05:51ऐसे उसकी मा को एतराज होने के बावजूद
05:54वो हां कहती है
05:55मां मैं नहीं जाऊंगी मां तुमें छोड़ कर नहीं जाना मुझे
06:00ये कहते हुए सरला रोव पड़ती है
06:03तब सरला को वो लोग समझ कर ऐसे कहते हैं
06:07तुम्हारा सारा परिवार हमारे साथ रह सकता है
06:11हमारे तो रिष्टेदार भी नहीं है और आउलाद भी नहीं है
06:14हमारे पास बहुत सारे पैसे हैं
06:17और तुम सब का देखबाल हम कर सकते हैं
06:20सरला की मा को ये बात मंजूर होती है
06:23तब सुरेश और सुमती सरला के साथ उसकी सारी परिवार को उनके घर ले जाते है
06:29अगले ही दिन से सरला एक बड़ी पाच्छाला में पढ़ने के लिए जाती है
06:37और सरला के भाई को खेलने के लिए बहुत सारे खिलोना खरीद कर देते हैं
06:42सरला की मा को भी एक अच्छी अस्पताल में इलाज करवाते हैं
06:46और सरला के पिता को काम करने के लिए एक अच्छी नौकरी देते हैं।
06:50ऐसे उस गरीब लड़की सरला को सुरेश और सिमती के कारण एक अच्छा जिंदगी मिलता है।
06:56और उसके साथ साथ उसके परिवार को भी।

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