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00:29। अपने हिंदू पडोसियों के साथ शाना बशाना खड़े होकर दिवाली की खुशियों में बिल्कुल उसी तरह शरीक होते हैं
00:35जैसे वो अपना ही तैवार हो और इसका जवाब है कराची पाकिस्तान जी हां ये कोई अफसाना नहीं है।
01:00दरसल यही वो चीज़ है जिससे बेनल मजाहब हमाहंगी कहा जाता है। ये सिर्फ एक तहवार मनाने की बात नहीं
01:05है बलके ये एक ऐसा अमली नमूना है जो मुखतलफ कम्यूनिटीज को एक दूसरे के अकायत को करीव से देखने
01:11और उनका तह दिल से इहतराम करने का मौका द
01:26इस मंदिर के हवाले से जो बात सबसे ज्यादा है वो इसका वसीर रखबा है। ये कोई छोटी जगा नहीं
01:33बलके 32306 मुरब्बा गस से ज्यादा के रखबे पर फैला हुआ एक शांदार कमपाउंड है। इतनी बड़ी और कुशादा जगा
01:42का मतलब है कि ये सिर्फ एक अ�
01:50नारायन मंदिर की तारीख और उसका सदियों पर मुहित सफर। इसकी एहमियत को समझने के लिए हमें जरा माजी में
01:57जाना होगा। 1788 में तामीर होने वाला ये मंदर 1947 की तक्सीम के उस कठन मक्त में उन हिंदूओं के
02:04लिए एक पनागा और रिफ्यूजी कैम्प बन गया थ
02:06जो बहरी जहाजों के जरीए इंडिया जाने के मुंतजिर थे। ये वो तारीखी दौर था जब पाकिस्तान के बानी मुहम्मद
02:13अली जिना ने भी अकलियतों से एक जहती के लिए इस मंदर का दौरा किया था। इसके बाद 1989 में
02:18एहमद अबाद से सादूओं की आमद और फ
02:361947 के इस पुराशूब दौर में मंदर की असली और मुकदस मूर्तियां बहफाजत इंडिया मुंतकिल कर दी गई। बताया जाता
02:45है कि इन में से एक मूर्ती आज भी राजिस्थान के खान गाउं में मौजूद है। ये इस बात का
02:52सुबूत है कि तारीखी मकामात अपनी ज�
03:06अंदर के महल पर नज़र डालते हैं। ये वाकई हैरत अंगीज है कि किस तरह एक हिंदू मंदर की चारदेवारी
03:12के अंदर एक सिख गुर्दवारा इंतहाई पुरावन अंदाज में मौजूद है। और उससे भी जादा कमाल की बात ये है
03:18कि इस सिख अबादतगा के एन अ
03:33बलके ये कराची में हिंदू तहवारों का सबसे बड़ा गड़ है। यहां शहर का सबसे बड़ा हुली का तहवार मनाया
03:40जाता है, दिवाली पर चरागा होता है और तो और यहीं से हर साल बलोचिस्तान की तरफ जाने वाली मशूर
03:46जमाना हिंगलाज यात्रा का बकाइदा �
03:48आगाज भी होता है। ये तमाम चीजें मिलकर इसे एक भरपूर और मुतहर्रिक सकाफती मरकज बनाती हैं। चौथा हिस्सा गदीम
03:57आसार की दर्याफ्त पंच मुखी हनुआन मंदिर की कहानी।
04:18बहुत बहुत पीछे ले जाता है। इस कदीम मंदिर के सबसे खास बात ये है कि यहां भगवान हनुआन का
04:24जो मरकजी मुझसमा है वो कुदरती तोर पर वजूद में आया है। उसे इनसानी हातों से तराशा नहीं गया। और
04:30इसी कदीम पंच मुखी हनुआन मंदिर के पा
04:48किसी ठोस चीज से टकरा रहे हैं। जब उन्होंने मौतात अंदाज में वहां से मिटी हटाई तो जो कुछ सामने
04:54आया उसकी किसी को बिलकुल भी तवक्व नहीं थी। इस खुदाई के नतीजे में जो मूर्तियां जमीन से बरामद हुई
04:59अंदाजा लगाया गया कि वो तक
05:18बेहतियाती से होने वाली खुदाई रुकवा दी। उनके अलफाज उस वक्त की नजाकत को बखुबी बयान करते हैं। उन्होंने कहा
05:25कि ये मूर्तियां महज एक बरादरी का नहीं बलके पूरी का एक कौमी असासा हैं। और वाकी जमीन से निकलने
05:32वाली तारीख तो हम सब
05:33की मुश्टर का मेरास होती है। इस गेर मामूली खबर ने फौरन हर तरफ हलचल मचा दी। महकमा आसार-कदीमा
05:40हरकत में आया, तहकीकाती टीम मौके पर पहुची और दूसरी जाने मुकामी लोगों का तो जैसे तांता बन गया। हर
05:46कोई अपनी आखों से सदियों पुरान
05:59के एन नीचे, पंद्रा सो साल पुराने आसार इतनी सदियों तक इस तरह महफूज रह सकते हैं, तो फिर जरा
06:06गोर करें, कराची के इस वसी और गुंजान दिल में, जमीन की तहके बिलकुल नीचे, मजीद कितनी अजीम उश्चान और
06:14हमारी मुश्तरिका तारीख तर्याफ
06:29स्थाबुत होगा.