00:00आज की इस वजाहती निशिस्त में हम सीधा तारीख के एक बेहच शांदार और रंगीन सफर में च्छलांग लगाते हैं
00:06एक ऐसी तहजीब के राजों से परदा उठाने वाले हैं जिसने वक्त के साथ खुद को ना सिर्फ बचाए रखा
00:12है बलके एक बिलकुल नए सांचे में ढाल लिया है
00:15जी हाँ हम बात कर रहे हैं सिंद के 7000 साला कदीम सकाफती विर्से की
00:20अब जरा इस बात पर गोर कीजिए 7000 साल पुराने प्रीस्ट किंग यानी एक कदीम पजारी बाच्छा का जदीद नियोनाट
00:28और यकीन मानिये उंट के गोवर से भला क्या तालुक हो सकता है
00:31सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा है ना बिलकुल लेकिन आज हम इसी हैरानकुन तालुक की गिराई में जाएंगे
00:36और देखेंगे किस तरह माजी की धुन्दाली पढ़ती रवायात आज के जदीद, हिस्सी और रंगीन शाकारों के साथ जुड़ी हुई
00:43है
00:43चलिए, शिरुआत करते हैं अपने पहले हिस्से से
00:46अधीम जड़ें
00:47देखते हैं कि इस खिते की शनाहत के बुन्यादें दरसल कितनी गहरी हैं
00:51अगर तारीख के औराग पल्टें तो वादिये सिंध की तहजीब का असल वजन समझ में आता है
00:57सोचिए, साथ हजार साल पहले इस तहजीब ने जनम लिया
01:00फिर तीन हजार कबले मसी आते आते महंजोदाडों जैसे बेहतरीन और मुनज़म शेर अपने अरूज पर थे
01:06और थोड़ा और आ गया है
01:08तो आठवी सदी के आसपास सिंधी वो पहली मश्री की जुबान बनी जिसमें कुरान पाक का तरजमा किया गया
01:13ये कोई मामूली बात नहीं है
01:15ये इस खित्ते की जबरदस्त इल्मी और सकाफती बालदस्ती का सुबूत है
01:18और अब जरा इस फासले को देखिए
01:21बीस किलो मीटर
01:23ये कोई आम रास्ता नहीं है
01:25ये किला रनी कोट की फसील की लंबाई है
01:28लोग इसे अकसर सिंध की दिवारे चीन भी कहते हैं
01:32दुनिया के सबसे बड़े किले की ये दिवारें
01:35इस अजीम उशान माद्दी विरसे की अलामत है
01:37जो सदियों के थपेड़े खाकर
01:39आज भी सीना ताने खड़ी है
01:41यहां से हम आगे बढ़ते हैं अपने दूसरे हिस्से की तरफ
01:44तारीख का लिबास
01:45एक ऐसा फन जो हजारों साल गुजरने के बावजूद
01:49आज भी पूरी आबोताब से जिन्दा है
01:51यानि अजरक
01:53महंजोदारों की खुदाई से
01:54जो मशूर किंग प्रीष्ट का मुझस्मा मिला था
01:56उसके लिबास पर मौझूद नक्षो निगार
01:59वाकई कमाल के हैं
02:00यह महद कोई फैशन नहीं था
02:02बलकि इसे आज की अजरक की सबसे
02:04इफ्तिदाई शकल माना जाता है
02:06यानि जब कोई आज अजरक ओड़ता है
02:08तो असल में सीधा अपने
02:10हजारों साल पुराने आबाव अजदाद से जुड़ जाता है
02:12है ना हेरत अंगेज
02:13लेकिन ये बंती कैसे है
02:15रिवायती तेली अजरक बनाने का अमल
02:18वाकई एक पूरा हिस्सी तजर्बा है
02:19पहले कपड़े को सरसो के तेल में
02:22साथ से आठ दिन तक भिगोया जाता है
02:23ताकि उसमें मजबूती आए
02:25फिर इसे नर्म करने के लिए
02:26जीहां उंट के गोबर का इस्तमान होता है
02:29फिर लकडी के ठपों की
02:31वो मखसूस खटखट की आवाज
02:32लोहे के पुराने जंग से बनने वाला काला रंग
02:35और मजिष्ट के पौधे से आने वाला सुर्ख रंग
02:37और आखिर में वो खुबसूरत नीला रंग
02:40जो दरिया सिंध के किनारे उगने वाले
02:42कुदरती नील यानि इंडिगो से मिलता है
02:44ये पूरा अमल एक सच्चे कारिगर की
02:46बेपना लगन का नतीजा होता है
02:48इस पर बनने वाले ये रिवायती नक्षोनिगार
02:51कोई आज की इजाद नहीं है
02:53चक्की, जलीब, बादामी
02:56और खासतों पर ये कुकर डिजाइन
02:58ये सीधा मोहंजो दाड़ों से
03:00मतासिर होकर बनाया गया है
03:02शफीक एहमद सोमरो जैसे कमाल के कारिगर
03:04आज भी इन पुराने नकूश को
03:07अपने उंगलियों के हुनर से
03:08अगली नसलों तक मुंतकिल कर रहे हैं
03:11ताहम मौशी आदादों शुमार की रूफ से
03:13आज एक बहुत सख्त हकीकत भी सामने आती है
03:16पांच हजार रुपे में
03:17कुदरती रंगों से सिर्फ तीस गज अजरक तयार होती है
03:20जबके इतनी ही रकम में
03:22सस्ते कीमियाई रंगों से
03:24दो सो गज कपड़ा शब जाता है
03:25फर्क बहुत वाज़ है
03:27ये सस्ते इंपोर्टेड रंग
03:29आज की इस माहौल दोस्त और रिवायती दस्तकारी के लिए
03:32एक बहुत बड़ा मौशी खत्रा बन चुके हैं
03:35अब हम अपने तीसे हिस्से करूख करते हैं
03:37वो जगे जहां बसते हैं
03:38खास तोर पर कराची का तारीखी तरज तामीर
03:41ये पुरानी पत्थर की इमारतें
03:43आज भी शहर की सकाफती धड़कन है
03:461884 का बरतानवी राज के दौर का फ्रेयर हॉल ले लीजिए
03:50जो आज अजीम मुसवर सादिकीन के फनपारों
03:53और इतवार के किताब मिले का मरकज है
03:55आगा एहमद हुसैन का डिजाइन करदा
03:581925 का हिंदु जिम खाना
04:00अब नापा यानि
04:02नैशनल अकैडेमी ओफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के तौर पर
04:04नए फनकारों की तर्बियत कर रहा है
04:06और डेनिस हॉल शहरियों के लिए
04:08पहली पबलिक लाइबरी के तौर पर आबाद है
04:11इन तारीखी इमारतों को
04:12एक नए मकसद के साथ
04:14बड़ी खुबसूरती से जिन्दा रखा गया है
04:16लेकिन बात वही है
04:18ये सब इतना आसान नहीं होता
04:19माहरे तामिरात यासमीन लारी जैसी शक्सियात
04:22इन तारीखी इमारतों
04:24खास तोर पर कराची के मार्किट कौार्टर को
04:26कमर्शल बनियादों पर मंदह्म होने
04:28और तूट फूट से बचाने की
04:30मसलसल जिद्धो जहद कर रही है
04:32एक तरफ तेजी से फैलतावा शहर
04:34और अर्बन डेविलप्मेंट है
04:35तो दूसरी तरफ पुराने विर्से को
04:37महफूज रखने की कश्मकश
04:38चलिए अगले और चौते हिस्से पर आते हैं
04:42वो आवाज हैं जो हम बाटते हैं
04:44हमारी समातों का विर्सा
04:46अब जरा इन अनोखे साजों के नाम सुनिये
04:50ददिंग, चित्राली सितार, जुगनी, रबाब और बांसरी
04:54हुन्जा की वादियों से लेकर समंदर के साहिलों तक
04:57जब LLMC ताइफे ने कराची में होने वाले
05:00अपने महफिल टूर में इन रिवायती साजों को
05:03जदीद पाकिस्तानी म्यूजिक के साथ मिलाया
05:05तो सच में एक जादू सा हो गया
05:07मारूफ प्रोड्यूसर जुल्फी का ये कौल
05:09इस पूरी कोशिश का बहतरी निचोड है
05:12इनका मानना है कि जब पुरानी धुनों और यादों को
05:15नए साजों और जदीद अंदाज में पेश किया जाता है
05:18तो उनमें बिलकुल नए जजबाती रंग उभरते हैं
05:21और वाकि ये जदीद दौर के शाइकीन को
05:24उनकी सकाफती जड़ों से जोडने का एक कमाल का तरीका है
05:27और यहां से हम आते हैं अपने आखरी और पांचवे हिस्से की तरफ
05:31एक जिन्दा जशन जहां फन, तारीख और मौसीकी आपस में मिलते हैं
05:3690 ये सिफ़ एक हिंसा नहीं है, एक बहुत बड़ी काम्याबी है
05:40हाल ही में होने वाले सिंध क्राफ्ट फेस्टिवल में देही खावातीन ने 90 से जायद स्टॉल्स लगाए
05:46ये इस बात का सबूत है कि ये सकाफती वर्सा महज माजी की कोई किताबी बात नहीं है
05:51बलके आज भी देही मईशत और रोजगार को चलाने का एक बेहद एहम और फाल जरिया है
05:57Colors of Sindh नामी नुमाईश का दसवर कीजिए
06:00एक ऐसी पेंटिंग जिसमें नियॉन रंग इस्तिमाल हुए है
06:03जैसे ही उस पर पढ़ने वाली RGB रोशनी बदलती है
06:06मोहिंजोदाडों की वो पेंटिंग मुकमल तौर पर अपने रंग बदल लेती है
06:10जरा सोचिए 7000 साल पुरानी तारीख और आज की जदीड टेक्नोलिजी
06:14ये वाकिए दंग कर देने वाला मिलाप है
06:17जो वहां मौझूद मुकामी फनकारों ने दुनिया के सामने पेश किया
06:20और इस सब का सबसे बड़ा अवामी और सकाफ़ती इजार
06:24हर साल दिसंबर के पहले इतवार को एक ताड़े यानि यौम सकाफ़त के मौके पर होता है
06:29ये इतिहाद का दिन है जब सूबे भर में लोग रिवायती, सिंधी, टूपी और अजरक पहन कर अपनी शिनाखत का
06:36जश्ट मनाते हैं
06:37वैसे न्यूस साइदाबाज जैसे शहर खास तोर पर इन टूपियों की हाथ से बनाई के लिए तो पूरी दुनिया में
06:42मशूर है
06:43तो आखर में इस पूरे सफर के बाद एक बहुत दिल्चस्प सवाल सामने आता है
06:47जहां कदीम रिवायात, नियोन लाइट्स और जदीद धुनों से गले मिल रही हैं
06:52वहां आने वाली नसल इस साथ हजार साला अजीम तारीख को किस रूप में अपनाएगी
06:57और उसे दुनिया के सामने कैसे पेश करेगी
06:59यह वाकी सोचने की बात है
07:01उमीद है इस वजाहती निशस्त से इस कदीम और शानदार विरसे के हवाले से गोर करने का एक बिलकुल नया
07:08जाविया जरूर मिला होगा
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