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Experience the vibrant spirit of Sindh at the "Colors of Sindh" cultural celebration in Karachi. This event showcases the rich traditions, colorful handicrafts, folk music, traditional dance performances, Sindhi cuisine, and the centuries-old heritage that makes Sindh unique.

From Ajrak and Sindhi Topi displays to cultural performances and historical exhibitions, the festival brings together artists, craftsmen, and visitors to celebrate the beauty of Sindhi culture. Watch highlights from this spectacular event and explore the history, art, and traditions of Sindh in the heart of Karachi.

📍 Location: Karachi, Pakistan
🎭 Cultural Performances
🎨 Traditional Arts & Crafts
🧣 Ajrak & Sindhi Topi Exhibition
🎶 Folk Music & Dance
🍲 Traditional Sindhi Cuisine

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00:00आज की इस वजाहती निशिस्त में हम सीधा तारीख के एक बेहच शांदार और रंगीन सफर में च्छलांग लगाते हैं
00:06एक ऐसी तहजीब के राजों से परदा उठाने वाले हैं जिसने वक्त के साथ खुद को ना सिर्फ बचाए रखा
00:12है बलके एक बिलकुल नए सांचे में ढाल लिया है
00:15जी हाँ हम बात कर रहे हैं सिंद के 7000 साला कदीम सकाफती विर्से की
00:20अब जरा इस बात पर गोर कीजिए 7000 साल पुराने प्रीस्ट किंग यानी एक कदीम पजारी बाच्छा का जदीद नियोनाट
00:28और यकीन मानिये उंट के गोवर से भला क्या तालुक हो सकता है
00:31सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा है ना बिलकुल लेकिन आज हम इसी हैरानकुन तालुक की गिराई में जाएंगे
00:36और देखेंगे किस तरह माजी की धुन्दाली पढ़ती रवायात आज के जदीद, हिस्सी और रंगीन शाकारों के साथ जुड़ी हुई
00:43है
00:43चलिए, शिरुआत करते हैं अपने पहले हिस्से से
00:46अधीम जड़ें
00:47देखते हैं कि इस खिते की शनाहत के बुन्यादें दरसल कितनी गहरी हैं
00:51अगर तारीख के औराग पल्टें तो वादिये सिंध की तहजीब का असल वजन समझ में आता है
00:57सोचिए, साथ हजार साल पहले इस तहजीब ने जनम लिया
01:00फिर तीन हजार कबले मसी आते आते महंजोदाडों जैसे बेहतरीन और मुनज़म शेर अपने अरूज पर थे
01:06और थोड़ा और आ गया है
01:08तो आठवी सदी के आसपास सिंधी वो पहली मश्री की जुबान बनी जिसमें कुरान पाक का तरजमा किया गया
01:13ये कोई मामूली बात नहीं है
01:15ये इस खित्ते की जबरदस्त इल्मी और सकाफती बालदस्ती का सुबूत है
01:18और अब जरा इस फासले को देखिए
01:21बीस किलो मीटर
01:23ये कोई आम रास्ता नहीं है
01:25ये किला रनी कोट की फसील की लंबाई है
01:28लोग इसे अकसर सिंध की दिवारे चीन भी कहते हैं
01:32दुनिया के सबसे बड़े किले की ये दिवारें
01:35इस अजीम उशान माद्दी विरसे की अलामत है
01:37जो सदियों के थपेड़े खाकर
01:39आज भी सीना ताने खड़ी है
01:41यहां से हम आगे बढ़ते हैं अपने दूसरे हिस्से की तरफ
01:44तारीख का लिबास
01:45एक ऐसा फन जो हजारों साल गुजरने के बावजूद
01:49आज भी पूरी आबोताब से जिन्दा है
01:51यानि अजरक
01:53महंजोदारों की खुदाई से
01:54जो मशूर किंग प्रीष्ट का मुझस्मा मिला था
01:56उसके लिबास पर मौझूद नक्षो निगार
01:59वाकई कमाल के हैं
02:00यह महद कोई फैशन नहीं था
02:02बलकि इसे आज की अजरक की सबसे
02:04इफ्तिदाई शकल माना जाता है
02:06यानि जब कोई आज अजरक ओड़ता है
02:08तो असल में सीधा अपने
02:10हजारों साल पुराने आबाव अजदाद से जुड़ जाता है
02:12है ना हेरत अंगेज
02:13लेकिन ये बंती कैसे है
02:15रिवायती तेली अजरक बनाने का अमल
02:18वाकई एक पूरा हिस्सी तजर्बा है
02:19पहले कपड़े को सरसो के तेल में
02:22साथ से आठ दिन तक भिगोया जाता है
02:23ताकि उसमें मजबूती आए
02:25फिर इसे नर्म करने के लिए
02:26जीहां उंट के गोबर का इस्तमान होता है
02:29फिर लकडी के ठपों की
02:31वो मखसूस खटखट की आवाज
02:32लोहे के पुराने जंग से बनने वाला काला रंग
02:35और मजिष्ट के पौधे से आने वाला सुर्ख रंग
02:37और आखिर में वो खुबसूरत नीला रंग
02:40जो दरिया सिंध के किनारे उगने वाले
02:42कुदरती नील यानि इंडिगो से मिलता है
02:44ये पूरा अमल एक सच्चे कारिगर की
02:46बेपना लगन का नतीजा होता है
02:48इस पर बनने वाले ये रिवायती नक्षोनिगार
02:51कोई आज की इजाद नहीं है
02:53चक्की, जलीब, बादामी
02:56और खासतों पर ये कुकर डिजाइन
02:58ये सीधा मोहंजो दाड़ों से
03:00मतासिर होकर बनाया गया है
03:02शफीक एहमद सोमरो जैसे कमाल के कारिगर
03:04आज भी इन पुराने नकूश को
03:07अपने उंगलियों के हुनर से
03:08अगली नसलों तक मुंतकिल कर रहे हैं
03:11ताहम मौशी आदादों शुमार की रूफ से
03:13आज एक बहुत सख्त हकीकत भी सामने आती है
03:16पांच हजार रुपे में
03:17कुदरती रंगों से सिर्फ तीस गज अजरक तयार होती है
03:20जबके इतनी ही रकम में
03:22सस्ते कीमियाई रंगों से
03:24दो सो गज कपड़ा शब जाता है
03:25फर्क बहुत वाज़ है
03:27ये सस्ते इंपोर्टेड रंग
03:29आज की इस माहौल दोस्त और रिवायती दस्तकारी के लिए
03:32एक बहुत बड़ा मौशी खत्रा बन चुके हैं
03:35अब हम अपने तीसे हिस्से करूख करते हैं
03:37वो जगे जहां बसते हैं
03:38खास तोर पर कराची का तारीखी तरज तामीर
03:41ये पुरानी पत्थर की इमारतें
03:43आज भी शहर की सकाफती धड़कन है
03:461884 का बरतानवी राज के दौर का फ्रेयर हॉल ले लीजिए
03:50जो आज अजीम मुसवर सादिकीन के फनपारों
03:53और इतवार के किताब मिले का मरकज है
03:55आगा एहमद हुसैन का डिजाइन करदा
03:581925 का हिंदु जिम खाना
04:00अब नापा यानि
04:02नैशनल अकैडेमी ओफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के तौर पर
04:04नए फनकारों की तर्बियत कर रहा है
04:06और डेनिस हॉल शहरियों के लिए
04:08पहली पबलिक लाइबरी के तौर पर आबाद है
04:11इन तारीखी इमारतों को
04:12एक नए मकसद के साथ
04:14बड़ी खुबसूरती से जिन्दा रखा गया है
04:16लेकिन बात वही है
04:18ये सब इतना आसान नहीं होता
04:19माहरे तामिरात यासमीन लारी जैसी शक्सियात
04:22इन तारीखी इमारतों
04:24खास तोर पर कराची के मार्किट कौार्टर को
04:26कमर्शल बनियादों पर मंदह्म होने
04:28और तूट फूट से बचाने की
04:30मसलसल जिद्धो जहद कर रही है
04:32एक तरफ तेजी से फैलतावा शहर
04:34और अर्बन डेविलप्मेंट है
04:35तो दूसरी तरफ पुराने विर्से को
04:37महफूज रखने की कश्मकश
04:38चलिए अगले और चौते हिस्से पर आते हैं
04:42वो आवाज हैं जो हम बाटते हैं
04:44हमारी समातों का विर्सा
04:46अब जरा इन अनोखे साजों के नाम सुनिये
04:50ददिंग, चित्राली सितार, जुगनी, रबाब और बांसरी
04:54हुन्जा की वादियों से लेकर समंदर के साहिलों तक
04:57जब LLMC ताइफे ने कराची में होने वाले
05:00अपने महफिल टूर में इन रिवायती साजों को
05:03जदीद पाकिस्तानी म्यूजिक के साथ मिलाया
05:05तो सच में एक जादू सा हो गया
05:07मारूफ प्रोड्यूसर जुल्फी का ये कौल
05:09इस पूरी कोशिश का बहतरी निचोड है
05:12इनका मानना है कि जब पुरानी धुनों और यादों को
05:15नए साजों और जदीद अंदाज में पेश किया जाता है
05:18तो उनमें बिलकुल नए जजबाती रंग उभरते हैं
05:21और वाकि ये जदीद दौर के शाइकीन को
05:24उनकी सकाफती जड़ों से जोडने का एक कमाल का तरीका है
05:27और यहां से हम आते हैं अपने आखरी और पांचवे हिस्से की तरफ
05:31एक जिन्दा जशन जहां फन, तारीख और मौसीकी आपस में मिलते हैं
05:3690 ये सिफ़ एक हिंसा नहीं है, एक बहुत बड़ी काम्याबी है
05:40हाल ही में होने वाले सिंध क्राफ्ट फेस्टिवल में देही खावातीन ने 90 से जायद स्टॉल्स लगाए
05:46ये इस बात का सबूत है कि ये सकाफती वर्सा महज माजी की कोई किताबी बात नहीं है
05:51बलके आज भी देही मईशत और रोजगार को चलाने का एक बेहद एहम और फाल जरिया है
05:57Colors of Sindh नामी नुमाईश का दसवर कीजिए
06:00एक ऐसी पेंटिंग जिसमें नियॉन रंग इस्तिमाल हुए है
06:03जैसे ही उस पर पढ़ने वाली RGB रोशनी बदलती है
06:06मोहिंजोदाडों की वो पेंटिंग मुकमल तौर पर अपने रंग बदल लेती है
06:10जरा सोचिए 7000 साल पुरानी तारीख और आज की जदीड टेक्नोलिजी
06:14ये वाकिए दंग कर देने वाला मिलाप है
06:17जो वहां मौझूद मुकामी फनकारों ने दुनिया के सामने पेश किया
06:20और इस सब का सबसे बड़ा अवामी और सकाफ़ती इजार
06:24हर साल दिसंबर के पहले इतवार को एक ताड़े यानि यौम सकाफ़त के मौके पर होता है
06:29ये इतिहाद का दिन है जब सूबे भर में लोग रिवायती, सिंधी, टूपी और अजरक पहन कर अपनी शिनाखत का
06:36जश्ट मनाते हैं
06:37वैसे न्यूस साइदाबाज जैसे शहर खास तोर पर इन टूपियों की हाथ से बनाई के लिए तो पूरी दुनिया में
06:42मशूर है
06:43तो आखर में इस पूरे सफर के बाद एक बहुत दिल्चस्प सवाल सामने आता है
06:47जहां कदीम रिवायात, नियोन लाइट्स और जदीद धुनों से गले मिल रही हैं
06:52वहां आने वाली नसल इस साथ हजार साला अजीम तारीख को किस रूप में अपनाएगी
06:57और उसे दुनिया के सामने कैसे पेश करेगी
06:59यह वाकी सोचने की बात है
07:01उमीद है इस वजाहती निशस्त से इस कदीम और शानदार विरसे के हवाले से गोर करने का एक बिलकुल नया
07:08जाविया जरूर मिला होगा
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