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Hazrat Umar ibn Khattab (رضی اللہ عنہ) Islam ke dusre Khalifa thay aur Islami tareekh ki sab se azeem shakhsiyat mein se ek hain. Is documentary mein aap Hazrat Umar (RA) ki poori zindagi, Islam qabool karne ka waqia, Nabi Kareem ﷺ ke sath unka safar, Khilafat, adal-o-insaf, azeem fatahat, Bayt-ul-Maqdis ki fatah, Islami riyasat ka nizam aur unki shahadat tak tamam aham waqiat dekhenge.

Ye historical documentary authentic Islamic history par mabni hai aur Hazrat Umar Farooq (RA) ki zindagi ke har aham pehlu ko detail mein bayan karti hai.

Is Video Mein:

Hazrat Umar (RA) ka bachpan
Islam qabool karne ka waqia
Hijrat aur Ghazwat
Islam ke dusre Khalifa ka intekhab
Adal aur insaf ke waqiat
Sham, Iraq, Misr aur Fars ki fatahat
Bayt-ul-Maqdis ki fatah
Islami hukoomat ka nizam
Hazrat Umar (RA) ki shahadat

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Transcript
00:00इस तर्जिय में खुशामदीद, आज हम सिर्फ तारीख के पन्ने नहीं पलट रहे, बलके कैसे दोर का एकेडेमिक और गेर
00:06जानिबदाराना मुताला करने जा रहे हैं, जिसने पबलिक एड्मिनिस्ट्रेशन और जदीद रियासती निजाम की पूरी शकल ही बदल कर रख
00:13दी
00:13चलिए सीधा मौजू की गहराई में चलते हैं और देखते हैं कि इसलाम के दूसरे खलीफा उमर बिनिलखताब ने किस
00:19तरह अपनी काईदाना सलाहियतों और बेमिसाल इनसाफ से एक ऐसी फलाही रियासत की बनियाद रखी जो आज भी हैरान कुन
00:25है, ये कोई आम दास्तान �
00:27बलके पुलेटिकल साइंस और स्टेट क्राफ्ट को समझने वालों के लिए एक जबरदस्त केस टड़ी है, हमारे इस सफर का
00:33रोड मैप कुछ यूं होगा, हम शुरू करेंगे मैक्रो और माइक्रो तजाद से, फिर देखेंगे इनकी क्यादत की भटी को,
00:40इसके बाद फलाह
01:02और दूसरी तरफ, हैरत की बाद देखिये, इस अजीम रियासत के सरवरा की कुल जाती दौलत सिर्फ मिट्टी के एक
01:13चटाई थी, ये शाही तर्जे जिंदगी और मादी असाइशों का मुकमल इंकार था, रियास्ती खजानों और जाती जिंदगी के तर्मियान
01:20ऐसी वाज
01:24ये वाकिया इस पॉइंट को बेहतरीन तरीके से वाज़े करता है, जब रोम का एक सफीर मदीना पहुँचा तो उसके
01:29हैरत की को इंतिहा न रही, उसने देखा कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत का हुकमरान बगएर किसी पहरेदार के
01:35तने तनहा एक दरखत के नीचे जमी
01:37पर बेखौफ सो रहा है, इस मनजर ने सफीर के मूँ से वो तारीखी जमला निकलवा दिया कि तुमने इंसाफ
01:43किया इसलिए तुम बेखौफ सोते हो, ये एबसुलूट जस्टिस और सियासी इस्तेकाम के दरमियान सीले तालुक का सबसे बड़ा सुबूत
01:49है, जहरी सी बात
01:50है, इनसाफ होगा, तो आवाम से कोई खत्रा नहीं होगा, अब आते हैं अपने दूसरे हिस्से की तरफ, कैयादत की
01:56भटी, वो कौन से आवामल थे, जिन्होंने ऐसी शक्सियत को तराशा, तारीख बताती है कि उनकी इब्तिदाई जिन्दगी किसी आम
02:03बच्चे जैसी नही
02:19खत्त पैदा कर दी, खत्ताती और नेजाबाजी की मश्कों ने उस कड़े दोर में उन्हें वो शदीद इंतिजामी नजमों जब्त
02:25और क्राइसिस मैनेजमेंट सिखाई, जो बाद में एक आलमी रियासत चलाने के काम आई, ये उनकी असल लाइफ ट्रेनिंग थी,
02:32इनके ज
02:44थटे साल में एक जबरदस टरनिंग पॉइंट आता है, जब सूर अताहा की आयात सुनकर इनका दिल पिलकुल बदल जाता
02:50है, जरा सोचिए, जो शक्स कुछ देर पहले तक पैगंबर इसलाम को कतल करने के रादे से निकला था, वो
02:56एक ऐसी गहरी रोहानी तबदीली से गु
03:12यानी हक और बातिल के दर्मयान फर्क करने वाला, यह लकब उन्हें कावा में पहली एलानिया नमाज की कियादत के
03:19बाद मिला, यहां पॉलिटिकल साइंस का सबसे एहम नुक्ता यह है कि उनकी शमूलियत ने इबतिदाई मुस्लिम कम्यूनिटी की सियासी
03:27हरकियात को कैसे �
03:29अलफारुक होना सिर्फ एक नाम नहीं, यह इस बात का इलान था कि सुसाइटी अब खूफिया इबादत से निकल कर
03:34इलानिया और बेखौफ इबादत की तरफ जा रही है, यह एक माइनॉरिटी ग्रूप में इतमाद साजी का बिलकुल परफेक्ट पॉलिटिकल
03:41मॉडल था
03:42चलिए अब चलते हैं अपने तीसरे और बहुत एहम हिस्से की तरफ, फलाही रियासत या वेलफेर स्टेट की तश्कील
03:49आज हम जिन तसवरात को मॉडरन वेलफेर एकनॉमिक्स कहते हैं, उनका ब्लूप्रेंट यहां सात्वी सदी में तयार हो रहा था
03:56बैतल माल का कयाम जो दौलत को चंद हातों में जमा होने से रोकने के लिए एक मरकजी पबलिक ट्रेजरी
04:03था
04:03अग्रिकल्चर को बढ़ाने के लिए नहरे खुदवाई गई जो के इंफरस्ट्रक्चर डिवलपमेंट की बेहतरीन मिसाल है
04:09और सबसे कमाल की बात यतीमों माजूरों और अकलियतों के लिए मखसूस वजाइफ मकरर किये गए
04:15जिसे हम आज की जबान में युनिवरसल बेसिक इंकम कहते हैं ताके रियास्त का कोई भी शहरी दुनियादी जरूरतों से
04:22महरूम न रहे
04:23और बात यहां खत्म नहीं होती ये इदारा जाती इखतरात उस वक्त के कबाईली मौचरे के लिहाज से अनबिलीविबल थी
04:30बकाईदा मिलिटरी डिपार्टमेंट्स बनाना, हिज्री इसलामी कैलेंडर का अगाज, पुलीस और जेल के फॉर्मल निजाम की तश्कील
04:36और शेहरियों की फला के लिए नाइट पट्रोल्स, यानि रात के वक्त आला तरीन एक्जेकिटिव का खुद गश्ट करना
04:42ये सब क्या है? ये रियासती इस्तदादेकार यानि इंस्टिटूशन कपैसिटी बिल्डिंग की वो लाजवाब मिसाले हैं
04:49जो आज भी पबलिक एड्मिनिस्ट्रेशन की बुनियादी किताबों में पढ़ाई जाती हैं
04:52आएए अब अपने चौथे हिस्से की तरफ आते हैं एहतसाब यानि अकाउंटबिलिटी के अमली मताले के
04:59मदीना की एक ठिठरती हुई सर्द रात का मनजर तसवर करें
05:02रियासत के सरब्राव खुद गश्ट पर हैं
05:04वो देखते हैं कि एक गरीब मा अपने भूके बच्चों को बहलाने के लिए चूले पर सिर्फ पानी उबाल रही
05:10है
05:10आम तोर पर एक एग्जेकटिव क्या करता किसी मातहत को हुक्म देता
05:14लेकिन नहीं उन्होंने खुद बैतलमाल का रुख किया
05:16आटे की भारी बोरी अपनी पीट पर उठाई और उस खानदान के लिए खाना पकाया
05:20जब उनके गुलाम ने बोरी उठाने की पेशकर्श की
05:23तो उन्होंने इसे रौकते हुए पूछा के
05:25क्या कियामत के दिन तुम मेरा बोज उठाओगे
05:27सोच कर देखिए
05:29एक्जेक्टिव अकाउंटिबिलिटी और सर्विंट लीडर्शिप की इस से बड़ी मिसाल और क्या हो सकती है
05:32और फिर इन्सानी हुकूक और बराबरी का ये वाकिया आता है
05:36जब मिसर के गवर्नर के बेटे ने एक आम शहरी पर अपनी ताकत के नशे में कोड़ा उठाया
05:40तो खलीफा ने गवर्नर और उसके बेटे दोनों को मदीना तलब कर लिया
05:43भरे मजमे में उस आम शहरी से इस आला मुकाम गवर्नर के बेटे को सजा दिलवाई
05:48और वो तारीखी जुम्ला कहा कि तुमने लोगों को कब से घुलाम बना लिया जबके उनकी माओं ने उन्हें आजाद
05:54पैदा किया था
05:55अगर हम आज के कॉर्पेटेट और हुकूमती एफिक्स को देखें तो ये वाकिया एक एपसलूट मास्टर क्लास है
06:00कानून के सामने आम आदमी और एलीट दोनों बिलकुल बराबर हैं
06:04ये मनजर तो डिपलोमिसी और मेरिट की सारी तारीफें ही बदल देता है
06:08जब इस अजीम उश्शान सल्तनत का हुक्मरान यरूशलम में दाखिल होता है
06:12तो वो उउट पर सवार नहीं था बिलकि पैदल चल रहा था
06:15क्यों? क्योंकि उस वक्त उउट पर बैटने की बारी उनके घुलाम की थी
06:18इस लेवल की मिरिटाकरिसी और आजज़ी ने मुकामी आबादी और पादरियों पर ऐसा जादू किया
06:23कि उन्होंने बगेर किसी खून खराबे के शहर की चाबियां उनके हवाले कर दी
06:26मिलिटरी माइट की जगा मौरल आथारिटी से फता हासल करने की ऐसी मिसाल तारीख में शायद ही कहीं और मिले
06:32अब आते हैं अपने आखरी हिस्से की तरफ
06:34जाने शिनी का इदारा जाती निजाम सक्सेशन को कैसे इंस्टिउशनलाइज किया गया
06:39एक गेर जानिबदार हिस्टॉरियन के तौर पर इस वाक़े को देखना बहुत जरूरी है
06:44फजर की नमाज का वक्त था जब अबु लूलू नाम के एक नाराज लोहार ने
06:49टैक्स के एक मतनाज़ मसले और चक्की के हवाले से हुई गुफ्तगू के बाद
06:53दो मुवाले जहरालूद खंजर से खलीफा पर जान लिवा हमला कर दिया
06:57ये अफसोसनाक वाकिया असल में इस बात को भी हाईलाइट करता है
07:01कि उस दौर का इतना बड़ा हुक्मरान अवाम के दर्मियान बगएर किसी हेवी सेक्योरिटी प्रोटोकोल के कितनी आसानी से अवेलबल
07:08था
07:08अब यहां पोलिटिकल साइंस का एक बहुत बड़ा सवाल पैदा होता है
07:12एक फानी हुक्मरान एक ऐसी रियासत के बका को कैसे यकीनी बनाता है जो उसके बाद भी चलती रहे
07:19और सबसे बढ़कर एक ऐसे दौर में जहां पूरी दुनिया में खांदानी बादशाहतों का राज था
07:25वो डैनस्टिक रूल यानी खांदानी विरासत को उभरने से कैसे रोकता है
07:29उन्होंने जो तरीका अपनाया वो इस सवाल का प्रैक्टिकल जवाब था
07:33उन्होंने बादशाहत के तसवर को बिलकुल जड़ से उखाड़ फेंगा
07:36सबसे पहले अपने बेटे को और इमीजेट फैमिली को उमीदवार होने से सकती से बाहर रखा
07:42फिर मेरिट पर मवनी छे अफरात की एक शूरा यानी इलेक्टोरल कमीटी तश्कील दी
07:47और तीसरा सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक इतफाके राय यानी कंसेंसिस के लिए तीन दिन की सخت डेडलाइन मुकरर कर दी
07:54ये प्योरली एक डिमोक्रिटिक तरस का कदम था ताकि पावर वैक्यूम और क्राइसिस से बचा जा सके
07:59और एक्तदार स्मूथली ट्रांसफर हो
08:01इस पूरे हिस्टॉरिकल नेरेटिव का इक्तिताम किसी बड़ी शाही रिसम पर नहीं होता
08:06अपने आखरी लमहात में उन्होंने खुद को अमीरल मौमनीन कहलवाने से रोक दिया
08:10अपने सारे अलकाब हटा कर हजरत आईशा से नहायत आजज़ी से अजाज़त मांगी
08:15कि क्या उन्हें उनके दो साथियों के पहलू में दफन होने की जगा मिल सकती है
08:19Absolute Power के उरूज पर ऐसी आजज़ी
08:22ये उस Macro और Micro तजाद का आखरी और सबसे ताकतवर मंजर था
08:26तो आखिर में ये सवाल हम सब के सोचने के लिए है
08:29खास्तोर पर उन लोगों के लिए जो State Craft और Leadership का मुताला करते हैं
08:35क्या Modern Executive एहतिसाब, शफाफियत और फलाही रियासत का असल blueprint
08:39किसी जदीद Political Theory में छुपा है
08:42या उसकी जड़े साथी सदी के उन अरब सहराओं में मिलती हैं
08:46शायद असल Modern Governance Models वही बन चुके थे जिने आज हम डिसकवर कर रहे हैं
08:51इस तज्रिये में हमारे साथ शामिल होने का शुक्रिया
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