00:00इस तर्जिय में खुशामदीद, आज हम सिर्फ तारीख के पन्ने नहीं पलट रहे, बलके कैसे दोर का एकेडेमिक और गेर
00:06जानिबदाराना मुताला करने जा रहे हैं, जिसने पबलिक एड्मिनिस्ट्रेशन और जदीद रियासती निजाम की पूरी शकल ही बदल कर रख
00:13दी
00:13चलिए सीधा मौजू की गहराई में चलते हैं और देखते हैं कि इसलाम के दूसरे खलीफा उमर बिनिलखताब ने किस
00:19तरह अपनी काईदाना सलाहियतों और बेमिसाल इनसाफ से एक ऐसी फलाही रियासत की बनियाद रखी जो आज भी हैरान कुन
00:25है, ये कोई आम दास्तान �
00:27बलके पुलेटिकल साइंस और स्टेट क्राफ्ट को समझने वालों के लिए एक जबरदस्त केस टड़ी है, हमारे इस सफर का
00:33रोड मैप कुछ यूं होगा, हम शुरू करेंगे मैक्रो और माइक्रो तजाद से, फिर देखेंगे इनकी क्यादत की भटी को,
00:40इसके बाद फलाह
01:02और दूसरी तरफ, हैरत की बाद देखिये, इस अजीम रियासत के सरवरा की कुल जाती दौलत सिर्फ मिट्टी के एक
01:13चटाई थी, ये शाही तर्जे जिंदगी और मादी असाइशों का मुकमल इंकार था, रियास्ती खजानों और जाती जिंदगी के तर्मियान
01:20ऐसी वाज
01:24ये वाकिया इस पॉइंट को बेहतरीन तरीके से वाज़े करता है, जब रोम का एक सफीर मदीना पहुँचा तो उसके
01:29हैरत की को इंतिहा न रही, उसने देखा कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत का हुकमरान बगएर किसी पहरेदार के
01:35तने तनहा एक दरखत के नीचे जमी
01:37पर बेखौफ सो रहा है, इस मनजर ने सफीर के मूँ से वो तारीखी जमला निकलवा दिया कि तुमने इंसाफ
01:43किया इसलिए तुम बेखौफ सोते हो, ये एबसुलूट जस्टिस और सियासी इस्तेकाम के दरमियान सीले तालुक का सबसे बड़ा सुबूत
01:49है, जहरी सी बात
01:50है, इनसाफ होगा, तो आवाम से कोई खत्रा नहीं होगा, अब आते हैं अपने दूसरे हिस्से की तरफ, कैयादत की
01:56भटी, वो कौन से आवामल थे, जिन्होंने ऐसी शक्सियत को तराशा, तारीख बताती है कि उनकी इब्तिदाई जिन्दगी किसी आम
02:03बच्चे जैसी नही
02:19खत्त पैदा कर दी, खत्ताती और नेजाबाजी की मश्कों ने उस कड़े दोर में उन्हें वो शदीद इंतिजामी नजमों जब्त
02:25और क्राइसिस मैनेजमेंट सिखाई, जो बाद में एक आलमी रियासत चलाने के काम आई, ये उनकी असल लाइफ ट्रेनिंग थी,
02:32इनके ज
02:44थटे साल में एक जबरदस टरनिंग पॉइंट आता है, जब सूर अताहा की आयात सुनकर इनका दिल पिलकुल बदल जाता
02:50है, जरा सोचिए, जो शक्स कुछ देर पहले तक पैगंबर इसलाम को कतल करने के रादे से निकला था, वो
02:56एक ऐसी गहरी रोहानी तबदीली से गु
03:12यानी हक और बातिल के दर्मयान फर्क करने वाला, यह लकब उन्हें कावा में पहली एलानिया नमाज की कियादत के
03:19बाद मिला, यहां पॉलिटिकल साइंस का सबसे एहम नुक्ता यह है कि उनकी शमूलियत ने इबतिदाई मुस्लिम कम्यूनिटी की सियासी
03:27हरकियात को कैसे �
03:29अलफारुक होना सिर्फ एक नाम नहीं, यह इस बात का इलान था कि सुसाइटी अब खूफिया इबादत से निकल कर
03:34इलानिया और बेखौफ इबादत की तरफ जा रही है, यह एक माइनॉरिटी ग्रूप में इतमाद साजी का बिलकुल परफेक्ट पॉलिटिकल
03:41मॉडल था
03:42चलिए अब चलते हैं अपने तीसरे और बहुत एहम हिस्से की तरफ, फलाही रियासत या वेलफेर स्टेट की तश्कील
03:49आज हम जिन तसवरात को मॉडरन वेलफेर एकनॉमिक्स कहते हैं, उनका ब्लूप्रेंट यहां सात्वी सदी में तयार हो रहा था
03:56बैतल माल का कयाम जो दौलत को चंद हातों में जमा होने से रोकने के लिए एक मरकजी पबलिक ट्रेजरी
04:03था
04:03अग्रिकल्चर को बढ़ाने के लिए नहरे खुदवाई गई जो के इंफरस्ट्रक्चर डिवलपमेंट की बेहतरीन मिसाल है
04:09और सबसे कमाल की बात यतीमों माजूरों और अकलियतों के लिए मखसूस वजाइफ मकरर किये गए
04:15जिसे हम आज की जबान में युनिवरसल बेसिक इंकम कहते हैं ताके रियास्त का कोई भी शहरी दुनियादी जरूरतों से
04:22महरूम न रहे
04:23और बात यहां खत्म नहीं होती ये इदारा जाती इखतरात उस वक्त के कबाईली मौचरे के लिहाज से अनबिलीविबल थी
04:30बकाईदा मिलिटरी डिपार्टमेंट्स बनाना, हिज्री इसलामी कैलेंडर का अगाज, पुलीस और जेल के फॉर्मल निजाम की तश्कील
04:36और शेहरियों की फला के लिए नाइट पट्रोल्स, यानि रात के वक्त आला तरीन एक्जेकिटिव का खुद गश्ट करना
04:42ये सब क्या है? ये रियासती इस्तदादेकार यानि इंस्टिटूशन कपैसिटी बिल्डिंग की वो लाजवाब मिसाले हैं
04:49जो आज भी पबलिक एड्मिनिस्ट्रेशन की बुनियादी किताबों में पढ़ाई जाती हैं
04:52आएए अब अपने चौथे हिस्से की तरफ आते हैं एहतसाब यानि अकाउंटबिलिटी के अमली मताले के
04:59मदीना की एक ठिठरती हुई सर्द रात का मनजर तसवर करें
05:02रियासत के सरब्राव खुद गश्ट पर हैं
05:04वो देखते हैं कि एक गरीब मा अपने भूके बच्चों को बहलाने के लिए चूले पर सिर्फ पानी उबाल रही
05:10है
05:10आम तोर पर एक एग्जेकटिव क्या करता किसी मातहत को हुक्म देता
05:14लेकिन नहीं उन्होंने खुद बैतलमाल का रुख किया
05:16आटे की भारी बोरी अपनी पीट पर उठाई और उस खानदान के लिए खाना पकाया
05:20जब उनके गुलाम ने बोरी उठाने की पेशकर्श की
05:23तो उन्होंने इसे रौकते हुए पूछा के
05:25क्या कियामत के दिन तुम मेरा बोज उठाओगे
05:27सोच कर देखिए
05:29एक्जेक्टिव अकाउंटिबिलिटी और सर्विंट लीडर्शिप की इस से बड़ी मिसाल और क्या हो सकती है
05:32और फिर इन्सानी हुकूक और बराबरी का ये वाकिया आता है
05:36जब मिसर के गवर्नर के बेटे ने एक आम शहरी पर अपनी ताकत के नशे में कोड़ा उठाया
05:40तो खलीफा ने गवर्नर और उसके बेटे दोनों को मदीना तलब कर लिया
05:43भरे मजमे में उस आम शहरी से इस आला मुकाम गवर्नर के बेटे को सजा दिलवाई
05:48और वो तारीखी जुम्ला कहा कि तुमने लोगों को कब से घुलाम बना लिया जबके उनकी माओं ने उन्हें आजाद
05:54पैदा किया था
05:55अगर हम आज के कॉर्पेटेट और हुकूमती एफिक्स को देखें तो ये वाकिया एक एपसलूट मास्टर क्लास है
06:00कानून के सामने आम आदमी और एलीट दोनों बिलकुल बराबर हैं
06:04ये मनजर तो डिपलोमिसी और मेरिट की सारी तारीफें ही बदल देता है
06:08जब इस अजीम उश्शान सल्तनत का हुक्मरान यरूशलम में दाखिल होता है
06:12तो वो उउट पर सवार नहीं था बिलकि पैदल चल रहा था
06:15क्यों? क्योंकि उस वक्त उउट पर बैटने की बारी उनके घुलाम की थी
06:18इस लेवल की मिरिटाकरिसी और आजज़ी ने मुकामी आबादी और पादरियों पर ऐसा जादू किया
06:23कि उन्होंने बगेर किसी खून खराबे के शहर की चाबियां उनके हवाले कर दी
06:26मिलिटरी माइट की जगा मौरल आथारिटी से फता हासल करने की ऐसी मिसाल तारीख में शायद ही कहीं और मिले
06:32अब आते हैं अपने आखरी हिस्से की तरफ
06:34जाने शिनी का इदारा जाती निजाम सक्सेशन को कैसे इंस्टिउशनलाइज किया गया
06:39एक गेर जानिबदार हिस्टॉरियन के तौर पर इस वाक़े को देखना बहुत जरूरी है
06:44फजर की नमाज का वक्त था जब अबु लूलू नाम के एक नाराज लोहार ने
06:49टैक्स के एक मतनाज़ मसले और चक्की के हवाले से हुई गुफ्तगू के बाद
06:53दो मुवाले जहरालूद खंजर से खलीफा पर जान लिवा हमला कर दिया
06:57ये अफसोसनाक वाकिया असल में इस बात को भी हाईलाइट करता है
07:01कि उस दौर का इतना बड़ा हुक्मरान अवाम के दर्मियान बगएर किसी हेवी सेक्योरिटी प्रोटोकोल के कितनी आसानी से अवेलबल
07:08था
07:08अब यहां पोलिटिकल साइंस का एक बहुत बड़ा सवाल पैदा होता है
07:12एक फानी हुक्मरान एक ऐसी रियासत के बका को कैसे यकीनी बनाता है जो उसके बाद भी चलती रहे
07:19और सबसे बढ़कर एक ऐसे दौर में जहां पूरी दुनिया में खांदानी बादशाहतों का राज था
07:25वो डैनस्टिक रूल यानी खांदानी विरासत को उभरने से कैसे रोकता है
07:29उन्होंने जो तरीका अपनाया वो इस सवाल का प्रैक्टिकल जवाब था
07:33उन्होंने बादशाहत के तसवर को बिलकुल जड़ से उखाड़ फेंगा
07:36सबसे पहले अपने बेटे को और इमीजेट फैमिली को उमीदवार होने से सकती से बाहर रखा
07:42फिर मेरिट पर मवनी छे अफरात की एक शूरा यानी इलेक्टोरल कमीटी तश्कील दी
07:47और तीसरा सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक इतफाके राय यानी कंसेंसिस के लिए तीन दिन की सخت डेडलाइन मुकरर कर दी
07:54ये प्योरली एक डिमोक्रिटिक तरस का कदम था ताकि पावर वैक्यूम और क्राइसिस से बचा जा सके
07:59और एक्तदार स्मूथली ट्रांसफर हो
08:01इस पूरे हिस्टॉरिकल नेरेटिव का इक्तिताम किसी बड़ी शाही रिसम पर नहीं होता
08:06अपने आखरी लमहात में उन्होंने खुद को अमीरल मौमनीन कहलवाने से रोक दिया
08:10अपने सारे अलकाब हटा कर हजरत आईशा से नहायत आजज़ी से अजाज़त मांगी
08:15कि क्या उन्हें उनके दो साथियों के पहलू में दफन होने की जगा मिल सकती है
08:19Absolute Power के उरूज पर ऐसी आजज़ी
08:22ये उस Macro और Micro तजाद का आखरी और सबसे ताकतवर मंजर था
08:26तो आखिर में ये सवाल हम सब के सोचने के लिए है
08:29खास्तोर पर उन लोगों के लिए जो State Craft और Leadership का मुताला करते हैं
08:35क्या Modern Executive एहतिसाब, शफाफियत और फलाही रियासत का असल blueprint
08:39किसी जदीद Political Theory में छुपा है
08:42या उसकी जड़े साथी सदी के उन अरब सहराओं में मिलती हैं
08:46शायद असल Modern Governance Models वही बन चुके थे जिने आज हम डिसकवर कर रहे हैं
08:51इस तज्रिये में हमारे साथ शामिल होने का शुक्रिया
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