00:00एक बार कोई पूछने लग गया था किसी इंट्रिव्यू में बोले आप पुनार जन्म को खारिज करते हैं
00:05मैंने का देखो पुनार जन्म हो इसके लिए जरूरी है कि मौत हो
00:10पुनार जन्म बोला ना दूसरा जन्म तो तब होगा जब पहले क्या हो मृत्य हो
00:14और मृत्य हो इसके लिए क्या जरूरी है कि पहले कोई जीवित हो जीवित होगा तब ही तो मरेगा
00:21मैं कोई जीवित ही नहीं है जब कोई मरता ही नहीं है तो दूसरा जन्म कैसे होगा
00:27माने क्या कह रहे हैं आप
00:28मैं कह रहा हूँ कि बरतमान में ही
00:30कोई जन्मा हुआ नहीं है
00:32ये सब जो अपने आपको जन्मा बोलके
00:34घूम रहे हैं ये मिट्टी के पुतले हैं
00:36इनमें कोई जीव नहीं है भीतर
00:38जीव जैसा कुछ होता ही नहीं
00:39ये मिट्टी के पुतले हैं जो दर दर घूम रहे हैं
00:41और मिट्टी मरती नहीं है
00:43मिट्टी सिर्फ गिर्ती है
00:46मिट्टी का पुतला गिर गया
00:47ठाय गया तो ये बोलते हो क्या कि मिट्टी हो गई
00:49मिट्टी थी चल रही थी मिट्टी थी
00:51गिर गई सब्सक्राइब जब जण्म ही नहीं था तो पुनर जण्म कहां से हो जाएगा दूसरीर मनें गुणही भरत रहे
01:09है
01:09पार्थ, जीव की हस्ती मिथ्या है, अहंकार जैसा कुछ होता नहीं, शरीर है, वो अपनी गतिविधियां कर रहा है, प्रक्रत
01:20है, गतिविधि करने वाला कोई नहीं है, इसलिए मात्मा बुद्ध की एक बात बहुत प्यारी है, उन्होंने ये तो बोला
01:29ही बोला, कि अहंकार �
01:32जूट है, उन्होंने ये भी बोला साथ में कि निर्वान भी जूट है, लेकि निर्वान तो तब हो ना, जब
01:38कोई हो, जिसका निर्वान हो सके, बोले आजाद कर दिया, पिजडे से पंची को आजाद कर दिया, पिजडे में तो
01:46पंची था ही नहीं, तो निर्वान किसका ह�
02:01क्योंकि निर्वान के लिए कोई चाहिए जो पहले बंधन में था, कोई था ही नहीं, लोगो बड़ा बुरा लग जाता
02:09है, कोई ही नहीं, माने हम है ही नहीं, नहीं आप नहीं हूँ, आप अमार हो गए, ये जान के
02:18कि हम है ही नहीं, हम अमर हो गए, हम मरेंगे कैसे, इस पूर
02:31है ही नहीं
02:37धन्यवाद पुछ जी
02:42एक दिन आपको पता चलेगा
02:43मैं भी हूँ नहीं
02:45धन्यवाद किसको बोलोगे
02:47ना धन्यवाद देने के लिए कोई है
02:49ना लेने के लिए कोई
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