00:00जिन्दा चलाने का काम यूरोप में भी हुआ है और भारत में भी हुआ है सती प्रथा में और ते
00:04पढ़ेंगी लिखेंगी नहीं जब पढ़ेंगी लिखेंगी नहीं तो बहुत काम की भी नहीं होती थी विशेच कर जब पती मर
00:09जाए जब तक पती जिन्दा है तब तक तो प
00:24जवाब समाज के एक बहुत बड़े तबके को शिक्षा सम्मान जीवन की मूल गरिमा से वंचित कर देते हो वो
00:32भी तो परंपरा के नाम पर ही चल रहा था ना थोड़ा पढ़ने की कोशिश करीगा कि दुनिया के सबसे
00:37खतरनाक लेकिन बहुप्रचलित अंधविश्वास कौन
00:51को नमन करते हैं और उन्होंने हमें जो प्रेम की तोफे दिये हैं उनके उपहार को हम सर जुका कर
00:57स्विकार करते हैं और सदा अभारी रहेंगे उनके लेकिन इसका आरतिये नहीं है कि अतीत में जो कुछ भी कचड़ा
01:02कूडा भी था हम उसको भी स्विकार कर लेंगे
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