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Transcript
00:00कोडियाला में शिवर हुआ था आज से आठेक साल पहले की बात होगी उसमें जादातर जो आये थे वो कॉलेज
00:06के ही सिप थे छातर छातराएं वहाँ आगे बहुत सुंदर प्रवाह था गंगा का वह ऐसा बहुत कम देखने को
00:12मिलता है तो जो वहाँ पर कैम्प वाले उन्हों
00:28गोलता था कि ये पकड़ के रखना तो उसमें से एक है अगदम आख बंद करके पानी में पड़ा हुआ
00:33है वो अलग बहता हुआ निकला जा रहा आगे की और बिलकुल मस्त है चिलाया है लोग अरे क्या कर
00:38रहा है पकड़ पकड़ रस्सा पकड़ बह जाएगा वो वहीं से �
00:42मस्ती में उत्तर देता रहे पकड़ रखा है रस्सा कोई दिक्कत नहीं है और हमें दिख रहा है कि ये
00:47पानी उसको लिए जा रहा है तो अभी पीछे से एक जाता है उसको किसी तरीके से हाथ बढ़ा के
00:51पकड़ता है तो क्या पकड़ रखा है देखते हैं कि भाई साब ने �
00:55अपने पजामे का नाड़ा पगड़ा रखा था।
00:57तुम पजामे के भरोसे हो और पजामे किसके भरोसे है।
01:00तुम्हारे भरोसे ऐसे लोग बह जाते हैं।
01:02अपने ही भरोसे मत बहने लग जाना।
01:04कट के भरोसे रहना तो बहनी जाओगे।
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