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Transcript
00:00पाप औगेरा हटाना धर्म का काम नहीं है। आपकी आखों से डर हटाना धर्म का काम है।
00:06तो वास्तविक धर्मिक्ता दिल से शुरू होती है, यहां से।
00:09और फिर आपके संबंधों को, निर्णेों को, आपके खान-पान को, गोल-चाल को, बात बेवहर को, हैर चीज को
00:16अपनी चाहे में ले लेती।
00:17हमारी धार मिक्ता ऐसी? नहीं होती।
00:19हमारी धरमिक्ता कैसी होती है?
00:21किसी ने आके बता दिया, फलाना काम करना छिच्छी है.
00:25पैसे की कामना गलत बात, देह की कामना गलत बात,
00:27पत्तिष्ठा ये सब पचास तीजे.
00:29क्योंकि इन ही चीजों में हमें चोट बड़ी होती है.
00:31और ये भी मज़धार बात है, कि वो ये नहीं कहते कि स्वरत की कामना बुरी बात हो.
00:36कोई भी काम ऐसा नहीं हो सकता, जो अनिवारे तह सदा गलत हो.
00:40कोई भी काम ऐसा नहीं हो सकता, जो अनिवारे तह सदा.
00:43और तुम कितनी बातों की सूची बनाओगे?
00:46जिन्दगी तो प्रति पल एक निया प्रशन देती है
00:50दो राहे, चो राहे, दस राहे खड़ी करती है
00:54कितनी बातों के आपको बताए जाएं डूस और डॉस और डॉस
00:56बिल्कुल अंधेरी सड़क होती है, आप गाड़ी में जा रहे होते हो
00:59आपकी यात्रा मज़े में पूरी कैसे हो जाती है
01:01तो कि आपके पास प्रकाश था
01:04कितनी मूटी गिताब बना दी जाए कि ऐसी स्तित्य हो तो ये करना, ऐसी हो तो ये करना
01:07कितना बना दिया जाए
01:08एक मात्र चीज जो आपको जिन्दगी की रहा पे चला सकती है वो है ग्यान का प्रकाश
01:14ये धर्म का डर है जो अरजुन के उपर बैठा हुआ है, ताउजी
01:19पूरी गीता अरजुन को उस तरह के लोकधार्मिक डरों से मुक्त करने के लिए है
01:27धर्म का काम है आपको भैसे मुक्त कर देना, भीतर जो सच है न जीवन खुले आम उसका ऐलान करने
01:35के लिए
01:35इसको कहते है आत्मा की अभी लगते, जो मैं हूँ सच मुच
01:39जिन्दगी मिली है उसका ऐलान करने के लिए
01:41जिन्दगी अपनी आवास को घोटने के लिए नहीं मिली है।
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