00:00चलिए, फॉरन इस दिल्चस्प तजिये का आगास करते हैं।
00:03आज की इस वजाहत में हम एक नहायती हैरानकुन एस्ट्रोलोजिकल हेल्थ अलर्ट को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
00:09ये कोई आम सी थेयरी नहीं है, बलके इस बात पर रोशनी डालती है कि सूरज की तवानाई किस तरह
00:14हमारे जिस्म के अंदरूनी निजाम को बिलरास्त मतासिर करती है।
00:18अक्सर हम जिस्मानी थकान को सिर्फ काम की जियाती समझ के नजर अंदाज कर देते हैं, लेकिन इस सोर्स के
00:23मताबिक इसके पीछे एक मुकमल काइनाती निजाम काम कर रहा होता है।
00:27तो सबसे पहला और बुनियादी सवाल, क्या आज अचानक जिस्म में शदीद सुस्ती, बेवजा की थकान, पेट में गर्मी या
00:34दिल की धड़कन में कोई अजीब सी तबदीली महसूस की जा रही है।
00:37आम तोर पर इन अलामात को बस एक खराब दिन या आम जिस्मानी कमजोरी समझ लिया जाता है। लेकिन जरा
00:43सोचिए, अगर इन छोटी छोटी अलामात के पीछे किसी काइनाती तवनाई का हाथ हो तो, ये तजजिया इसी असरार को
00:50खोलता है और बताता है कि हमारे सर्क्लिल
01:27आम जिस्मानी का ये गहरा तालुक।
01:35मरकज एक बहुत ही मखसूस दिन है, 31 मैं इतवार का दिन। सोर्स ने इस तारीख को खास निशाना बनाया
01:43है। बताया गया है कि ये वो दिन है जब काइनाती हलात एक ऐसी सथा पर आ जाती हैं जहां
01:49खून की गर्दिश और हजमे के निजाम को एक जरूरी और मुकंबल री
01:56जिन्मेंट जिस्म से इस री सेट का सख तकाजा करती है। अब आते हैं इस तजिये के दूसरे एहम हिस्से
02:03पर, सहित के खतरात, आखिर मसला कहा होता है।
02:26और खून की रवानी में सुस्ती शुरू हो जाती है। ये भारी तवानाई दरसल जिस्मानी ताकत को निचोड कर रख
02:31देती है।
02:32और सबसे गोर तलब नुकता ये है कि खून की ये सुस्त गर्दिश सिर्फ आम थकान तक महदूद नहीं रहती।
02:38जब ब्लड फ्लो धीमा पड़ता है तो आसाबी थकान यानि नर्व एक्जॉशन और फेपड़ों की बिमालियों के खतरात काफी हद
02:46तक बढ़ जाते हैं।
02:47और यहां पर एक बहुत ही स्ट्रिक्ली मखसूस इंतिबा यानि वॉलिंग दी गई है।
03:17एक बहुत ही क्लियर और आसान तीन दर्जों पर मबनी मॉनिंग रूटीन बताए गई है जिसे उन्होंने शिफा का रास
03:23कहा है।
03:24चलिए देखते हैं।
03:25पहला कदम दिन का आगाज गरम अद्रक के पानी में थोड़ा सा शहद मिला कर पीने से किया जाए।
03:31जैसे ही ये आमेजा जिसमे दाखिल होता है, ये हजमे को फॉरण एक्टिफ कर देता है।
03:36दूसरा कदम है गोल्डन मेडिटेशन की मश्ट करना।
03:39और तीसरा कदम सुबह की धूप में संगीजिंग करना ताकि सूरच की इस पावफुल तवनाई को ठीक अंदाज में जिसम
03:46का हिस्सा बनाया जा सके।
03:47चौते हिस्से में आए इस सं थेरपी और मेडिटेशन को थोड़ा गहराई से समझते हैं।
03:53यहां एक मखसूस हिंसा है जो इस पूरी रूटीन में नहायत एहमियत का हामिल है और वो है पंदरा।
04:00सोर्स ने बहुत वाज़े तोर पर तजवीज किया है कि ध्यान लगाने और सूरच की रोशनी में बैठने के लिए
04:06एक्जाक्ट पंदरा मिनट दरकार हैं।
04:08ठीक पंदरा मिनट ये वक्त इतना मुनासिब और आसान है कि इस रेमेडी को कोई भी बासानी अपनी डेली रूटीन
04:15का हिस्सा बना सकता है।
04:39और इस ध्यान के साथ ही दूसरा सबसे एहम अमल सन गेजिंग का आता है।
05:15अगर इन उसूलों और इनके नतायच का खुलासा किया जाए तो बात बहुती सिंपल और वाज़े है।
05:25गोल्डन मेरिटेशन सीधा दिल की तवानाई में इजाफा करता है और सुबा के वक्त सुरज की रोशनी खुन को रवाँ
05:32और स्मूद बनाती है।
05:33सच तो ये है कि जब दिल मजबूत होता है और खुन की गरदिश में कोई रुकावत नहीं होती तो
05:38नतीजेतन जिसम का हर एक हिस्सा ताकत और तवनाई से पूरी तरह भरपूर हो जाता है।
05:43एक सॉलिड जिसमानी बनियाद यहीं से बनती है।
06:13इन कनेक्शन्स को पूरी तरह समझी नहीं पाए है।
06:16इस सवाल का जवाब तलाश करने का सफर येकीनन बहुत दिल्चस्प रहेगा।
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