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सुप्रीम कोर्ट में ‘Industry’ की परिभाषा को लेकर बड़ी संवैधानिक बहस चल रही है। अगर कोर्ट इस परिभाषा को बदलता है, तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों, सरकारी कर्मचारियों और निजी संस्थानों पर पड़ सकता है।

इस खास चर्चा में हमने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील Vishal Singh Chandel और Suraj Kumar Jha से बात की। उन्होंने बताया कि ‘Industry’ की पुरानी परिभाषा क्या है, इसे बदलने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है और इसका आम कर्मचारियों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

साथ ही, सुनवाई के दौरान जजों की अहम टिप्पणियों और कोर्ट के रुख को भी समझाया गया है।

क्या ‘Industry’ की नई परिभाषा नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत लेकर आएगी या झटका देगी?

इस वीडियो में आसान भाषा में पूरा विश्लेषण देखें।

A crucial constitutional debate is underway in the Supreme Court regarding the definition of “Industry.” Any change in this definition could significantly impact millions of employees, government departments, and private institutions across India.

In this detailed discussion, we spoke with Supreme Court advocates Vishal Singh Chandel and Suraj Kumar Jha. They explain the historical background of the “Industry” definition, why it is being reconsidered today, and what it could mean for employees.

We also break down key judicial observations and the overall approach of the Court during the hearing.

Will the new definition bring relief or setbacks for salaried employees?

Watch this video for a clear and simple explanation.

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~PR.250~HT.408~ED.520~GR.510~

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Transcript
00:00आज honorable court ने comment करते हुए कहा है कि social security act का section 60 जिसमें ये कहता है
00:06कि कोई माता किसी ऐसे बच्चे को adopt करती है जो तीन महीने से कम कहा है तब तो उसे
00:11maternity leave मिलेगा मातरी आवकास मिलेगा अगर तीन महीने के उपर है बच्चा अगर वो adopt करती है तब उन्हें
00:18मातरी आवकास नहीं मिले
00:29क्योंकि आज का समाज ऐसा है जिसमें बच्चे को पिता की भी जरूरत है और माता की भी जरूरत है
00:35कुछ MNCs 15 दिन का होकास देती हैं लेकिन मानिक कोट का कहना था कि इसके लिए पुरा legal rule
00:42और framework हमारे पास लेकर आईए हमने law commission में बहुत बार इसमें recommendation भी दिया है लेकिन अ
00:58आज एक और निर्णे आया है वो निर्णा ही कई सबालों के जबाब देता है पहले समझा जाता था क्या
01:05गोद लियो होगा बच्चा क्या जन्म लिये हुए बच्चे से कुछ कमतर होता है क्या उसको कमदकार मिलना चाहिए ऐसा
01:13ही कुछ नियम बना हुआ था लेकिन सुप्र
01:27अवकास इसलिए नहीं मिलना चाहिए इन सवालों का जबाब आज इस कोट के निर्णे में हबारे साथ हमारा भई पैनल
01:34है विसाल सिंग चंदेल जी सूरच कमार जाजी हमारे एक्सपर्ट सर यह जो निर्णे जो मैंने बोला मैंने कुछ गलत
01:42बोता रही यही सवाल रहे ना
01:57आगे आने वाले समय में उन्हें पित्री सुक्का और मात्री सुक्का पूरा भागीदारी मिलेगा आज ओनरेबल कोट ने कमेंट करते
02:04हुए कहा है कि सोशल सेक्योटी एक्ट का सेक्शन सिक्ष्टी जिसमें यह कहता है कि माताओं को जो तीन महीने
02:10के बाद की बच्चों के �
02:12करती हैं उन्हें मैटर्निटी लीव नहीं मिलेगा उसे असमय धानिक घोसित कर दिया है अनकॉंस्ट्रिजनल घोसित कर दिया है अगर
02:27कोई माता किसी ऐसे बच्चे करती है जो तीन महीने से कम का है तब तो उसे मैटर्निटी लीव मिलेगा
02:35मात्री आवकास मिलेगा अगर त
02:39अप्ट करती हैं तब उन्हें मातरी आउकास नहीं मिलेगा इसको आज ओनरेबल सुप्रीम कोट की बेंज ने अनकॉंस्टिटूशनल कर दिया
02:46है और सम्मेधानी घोसित कर दिया है और सेंट्रल गॉर्मेंट को बुला कर कहा है कि आप इसके लिए जल्द
02:51से जल्द कोई नया क
02:52कानून लाइए अन्यता ऐसा कानून हम समाज में कहीं से भी एक्सेप्ट नहीं कर सकते दूसरा जो जज़मेंट ओनरेबल सुप्रीम
02:58कोट ने दिया है कि अभी तक समाज में पैटर्निटी लिफ के लिए क्यों नहीं कोई कानून लाया गया क्योंकि
03:05आज का समाज ऐसा है जि
03:19बहुत बार इसमें रिकमेंडेशन भी दिया है लेकिन अभी तक कोई कानून नहीं बनके आया तो एसजी साहब से यह
03:24कहा जा रहा था कि जल्द से जल्द इस पर कोई कानून बनाएं तो कहीं ने कहीं बहुत ही अच्छा
03:29डिसीजन ऑन्रेबल जेश्टी जेवी पार्दी वाला
03:31ऑन्रेबल जेश्टी आर महादिवन के द्वारा दिया गया है और सभी लोग कोट में काफी खुषते चाहे वो पुरुसों चाहे
03:37महिलाओं सभी अधिवक्ता काफी खुषते आपकी तरफ यहां सार हमने कई बार देखा बड़े-बड़े लोग के से आपने कुछ
03:43दो देते
03:43हैं ब्राट कोली को हमने तरत अफकास लेते देखा वो उनकी तरफ से आपने का कुछ देती हैं लेकिन जब
03:51कानून का वहां होता है तो अधिकार नहीं होता है और एक चीज़ और बताई कि तीन महिने का बच्चा
03:58तीन महिने के बच्चे को भी उस समय भी उसे जरुषत है मा
04:03कि तक क्या था जो परवरिस है उसे मा को तो मिल रही है और अगर पिता मनला भर पोसंड
04:11करने वाला है या वो जौब करता है तो वह उसका वह जो बात सल है जो चोटा सा उसको
04:15इतनी जरुवत वह नहीं मिल पा रहा है और पूरा मा के उपर लोट पड़ रहा है इसे देखा �
04:21जाये तो एक तरीके से पिता को अबकास मिलना मा को भी हाला कि कानूनी सवाल पूछूँगा लेकिन अगर बात
04:26करें एक सहूलियत की तो मा के लिए भी बहुत बड़ी सहूलियत है बिल्कुल देखिए आज हमसा नंदनी वरसे नंदूरी
04:33वरसे इन्डिया की केस में जस्टि
04:50सब्सक्राइब करें दो यह दो पर लेंगे तो आपकास के लाफ नहीं मिला नहीं उनकॉंसिटूशनल कर दिया और आज बहुत
05:02बड़ी बात सुप्रिम कोट निक देखिए मैं आपको बताओ लौ मेंकिंग पावर सुप्रिम कोट के नहीं है लौ मेंकिंग का
05:07म भारत में च�
05:19सरकारी डिपार्टमेंट में वह पैठर्निटी लीव के नाम पे कोई आपकी लिव नहीं बनती है और सुप्रिम कोट का आदेश
05:24जो है एक तरीके से सरकार को सुभापकारी होता है कि आप इस पर कानून मनाई है और जो सोसल
05:30वेलफियर स्कीम है चाहे जो बैनफिट सो मुझ
05:32मुझे ऐसा लगता है कि चाहे किसी भी फिल्ड का आदमी हो जो उसका बच्चा होता है चाहे लड़का हो
05:38लड़की चोटे हो मड़के उस बच्चे की विकास के लिए मा का प्यार के साथ बाप का भी प्यार बहुत
05:42जादा जोड़ी है और इस चीज को समझते हुए सुप्री
06:20अब देखना है कि सरकार के तरफ से कानून बनते हैं नहीं बनते हैं अगार नहीं बनते हैं
06:29तो फिर सुप्रीम कोट के पास एक पाबार है 141 में कि अपने तरीके से जैसे विसाखा के केस था
06:33सेक्स्वल अरस्मिंट का सरकार में तब तक रूलिंग ले आए तो अगर सरकार को नहीं बनाते हैं तो रूलिंग के
06:40तहट लोगों को मिल जाएगा जैसे प्यासिब इतुने
06:55सब्सक्राइब तो बहुत पिद्वान जैज हैं और वो हर एंगल से पुरू संविधान के अंगल से हर चीज को समझते
07:01हैं मुझे लगता है संविधान का वो नई तरीके से निड़वचन बढ़ियें से कर रहे हैं और कल्यानकारी राज को
07:06अस्थापित करने में उनका बहु
07:25सब्सक्राइब रख संबंदों से नहीं बनता एडॉप्शन से भी बनता है उन्होंने उसका वो जो बात की यह बड़ा महत्पून
07:33है और अब आप क्या लगता है जो आपने आपने कहा बताए जवाब मिली कि कानून अगर नहीं होगा तो
07:39क्या बुला आपने देखिए मैं �
07:42आपके दर्सकों के एक चीज़ और बताना चाहता हूँ पूरे देश में सिर्फ 18% कमपनियां ऐसी है या गौर्मेंट
07:48सेक्टर ऐसा है जो पैटर्निटी लीव देता है आज जज ने ऑनरेबल जिस्टिस ने जो कहा उसमें एक बात ये
07:54भी कही आप चाहे तो पेड़ लीव �
07:57चाहे नौन पेड लीव दी दिए लेकिन लीव के लिए एक पैटर्निटी लीव के लिए एक आप रूल और रिकोगनीशन
08:03बनाईए जिसे पिता अपने बच्चे का खयाल रख सके और जब पोस्ट नेटल स्टेज होता है यानि जब तुरंत मैटर्निटी
08:10होती है डिलिवरी
08:26चीज जो थी वो बहुत ही इंपोर्टेंट थी कि जब एक महिला तुरंत डिलिवरी देके आती है तो उसका बच्चा
08:31छोटा रहता है एक दो दिन का बच्चा रहता है वो खुद दो तीन दिन के स्टेज में रहती है
08:35अगर ऑपरेशन हो गया तो एक हपते पंदरा दिन भी �
08:52क्लियर कर दिया और से अर्ज किया है अभी अभी तो उन्होंने बस एक बात कही है कि आप इसको
08:57माल लीजिए क्योंकि समय ऐसा आ चुका अगर नहीं मानेंगे तो फिर आमरेबल कोट के पास बहुत विख्यात पावर है
09:02वो अपने पावर का यूज करके कानून को बना सकते ह
09:05लौ कमिशन को अपना रिकमेंडिसन बेख सकते हैं तो यह आपने देखा किस तरीके से सुप्रिम कोट के कुछ फैसले
09:11ऐसे होते हैं जो समाज में लोग के जीवन के जीवन पर पूरा फर्ट डाल जाते हैं उस बच्चे की
09:17सोचिए अगर इस फैसले के बाद सरकार ये कानू
09:32होती है कि वो अकेले बच्चे को समाल पाए उसे तो लीप चाहिए चाहिए उस समय में उसका पती की
09:38बहुत ज़्यादा जरूरत होती और उस समय पर पैटरनेटी लीप की बेहद जरूरत है तो यह बहुत ही बढ़िया कानून
09:44है देखना होगा कि सरकार इसमें किस तरह कदम
09:47होतादी जैसे बगिल साथ कदम नहीं उठाती है तो रूलिंग लाकर भी सुप्रीम कोट आगे बढ़ सकता है आप सुप्रीम
09:55कोट के सफैसले को कितना बहतर मानते कितना जरूरी मानते हैं यह जरूर बताईएगा और आपको पैटरनेटी लीप नहीं मिली
10:02थी तो आपका अ
10:15अन्यू आपका अपकार ऑट्डिए धरो आपकार नहीं होत्या नहीं कितना लो आपकार आपका आपकार आपकार ची करोंग।
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