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Sunny Deol का 'तारीख पर तारीख' वाला डायलॉग आज भी भारत की कड़वी हकीकत क्यों बना हुआ है? कानून मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट ने देश की अदालतों की बदहाली का जो आंकड़ा पेश किया है, वो वाकई डराने वाला है.

This video analyzes the reasons behind the delay in the Indian judicial system. Based on a recent Law Ministry report presented in Rajya Sabha, we reveal the massive shortage of judges in High Courts and lower courts across India. The video also explores the five key reasons why cases keep getting postponed (Tarikh Par Tarikh) and how it affects the common man.

#SupremeCourt #IndianJudiciary #LawMinistry #OneindiaHindi #SupremeCourt #JudgeShortage

~HT.178~PR.250~ED.108~

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Transcript
00:00तारीख पर तारीख पर तारीख लेकिन इंसाफ नहीं मिला
00:06फिल्म दामीनी में जब सनी देवल ने भरी अधालत में ये डायलोग बोला तो ये सिर्फ सिनेमाई ड्रामा नहीं था
00:13बल्कि ये उस वक्त आम आदमी की रूह से निकली वो चीखें थी जो कि अपनी पूरी जिंदगी कचहरियों के चक्तर काटते हुए गुजार बेता है।
00:21अज दश्कोबाद ये समवाद फिल्मी कम और कड़वी हकीकत ज्यादा नजर आता है।
00:26कानून मंत्राले ने रजसभा में जो आँखड़े पेश किये वो साफ बताते हैं कि इनसाफ के इस धीमी रफ्तार के पीछे सबसे बड़ा कारण है सिस्टम की वो रिक्तियां जो की न्याय के मंदिर को खाली रखे है।
00:38ज्यांकडा न केबल चौकाने वाला है बल्कि उस उम्मीत को तोड़ता नजर आता है जो के एक आम आदमी अपनी अदालत से अदालत की चौकट पर लेकर पहुँचता है।
01:08काम का नुकसान एक दिन की कमाई एक हजार रुपए एक तारीक का कुल खर्च चार हजार रुपए।
01:38मानसिक तनाफ परिवार पर दबाव नदीजा केस अंत में गलत साबित हुआ लेकिन 80,000 रुपए से ज्यादा खर्च हो गए।
01:47वक्त दो से तीन साल बरबार और मानसिक शानती कभी नहीं लोटी।
01:53देशभर की 25 हाई कोट की अगर हम बात कर लें तो आज 364 जजों की कमी साफ तोर पर देखी गई और अगर निचली अदालत की बात करें तो वहाँ पर 5,245 जजों के पद खाली है।
02:06अब सोचे इतनी बड़ी संख्या अगर जजों की खाली है तो आपको न्याए कैसे समय पर मिलें।
02:12अब इसका सीधा सा मतलब ये कि जहां न्याए के तराजू को थामने वाले आत होने चाहिए थे।
02:18वहाँ पर क्या है? वहाँ हैं सर्फ खाली कुर्सियां और धूल फाक्ती फाइलें।
02:22उतर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की अस्थिती और भी ज्याधा चिंता जनक है, डरावनी है, भयावा है जहां निचली अदालतों में ही 981 जज़ों की भारी कमी है।
02:32बिहार, गुजराद, मध्यप्रदीश और महराश जैसे राज्यों में भी सैकड़ उपद इस वक्त खाली पड़े हैं।
02:38इलाबाद हाई कूट में जहां 160 जज़ों की जरुवत है, वहाँ पर आधे से भी कम यानि की सिर्फ 81 जज़ काम कर रहे हैं।
02:45जब फैसले सुनाने वाले ही नहीं होंगे तो मुगदमों का पहाड तो खड़ा होगा ही और ये देरी लाजमी भी है।
03:15पिलताएं, वो समस्याएं, वो आम मुश्किलें जो कि कभी-कभी वकीलों की अधूरी तैयारी, कभी गवाहों का खूटना पहुचना और इस तेरी को और भी लंबा कर देता है।
03:25इस सारे वो आप कह सकते हैं, बड़े बिंदू हैं जो आपकी केस को आपके मुकदमे की नई तारीक को पैदा करते हैं, दावा देते हैं।
03:35पुलिस की चार्ज शीट में देरी आना ये भी एक बज़ा है, मेडिकल रिपॉर्ट के वक्त में और भी समय बढ़ जाना, लगातार समय की बढ़ोत भी होना, बार-बार होने वाली हड़ताले न्याय के पहियों को भी जाम किया करती है।
03:47सुप्रीम कूर्ट के जजों ने भी इस बात पर चिंता जताई है, दालतों में करीब 30% मामले तो सिर्फ वयवाहिक और पारिवारिक विवादों से जुड़े हैं, यानि कि कोई मामला एलिमनी का है, कोई मामला कलाक का है, और कई मामले तो ऐसे हैं, जो मेरिटल रेप की औ
04:17क्योंकि जब उसे पता चलता है कि वहाँ न्याय मिलने से पहले तारीखों का एक लंबा और ठका देने वाला सफर आपको तैय करना होगा, तो वो सोचता है कि मैं अजस्ट कर लूँगा, मुझे न्याय चाहिए ही नहीं, कानुन मंत्रा लेके आंकडे देश के न्याय विव
04:47का ये दर्द कभी खत नहीं होगा, और इंसाफ सिर्फ किताबों और डायलोक्स तक सीमित रह जाएगा और आपका इंतजार नहीं मिटने वाला, न्याय में देरी असल में न्याय ना मिलने के बराबर है, और आज कई लंबित फाइलें इसे इंसाफ की बाट जहती नजर आ �
05:17तारीक बे तारीक आपको सुनना पड़ता है, अपनी राय कॉमेंट बॉक्स में जरूर दीजिएगा, निरो नाम है मुकुंदा आप बने रहें, वन इंडिया के साथ शुप्रियां
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