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इस विशेष चर्चा में पत्रकार Shivendra Gaur ने Supreme Court of India में आए उस महत्वपूर्ण फैसले पर विस्तार से बातचीत की, जिसमें अदालत ने Allahabad High Court के 2025 के विवादित निर्णय को पलट दिया।

यह मामला नाबालिग से जुड़े आरोपों और ‘Attempt to Rape’ की कानूनी व्याख्या को लेकर था, जिसे हाई कोर्ट ने अलग दृष्टिकोण से देखा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में गंभीर टिप्पणियाँ करते हुए कानूनी मानकों को स्पष्ट किया।

इस मुद्दे पर विशाल सिंह चंदेल, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट व सूरज कुमार झा, एडवोकेट। सुप्रीम कोर्ट से Supreme Court Media Park में विस्तृत बातचीत की गई।

चर्चा के मुख्य बिंदु:

‘Attempt to Rape’ की कानूनी परिभाषा


मंशा (Intention) बनाम कृत्य (Act) की न्यायिक व्याख्या


POCSO और IPC की धाराओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी


भविष्य के मामलों पर इस फैसले का प्रभाव


यह वीडियो कानून, न्यायपालिका और संवेदनशील मामलों की गहराई से समझ प्रदान करता है।

In this detailed legal discussion, journalist Shivendra Gaur speaks about the significant judgment delivered by the Supreme Court of India, which set aside the 2025 ruling of the Allahabad High Court.

The case revolved around the legal interpretation of “Attempt to Rape” in a matter involving a minor. While the High Court had taken a particular view, the Supreme Court later reversed the decision and made strong observations clarifying legal standards.

At Supreme Court Media Park, Vishal Singh Chandel, Advocate, Supreme Court and Suraj Kumar Jha, Advocate, Supreme Court shared their legal analysis and explained the implications of the verdict.

Key Discussion Points:

Legal interpretation of “Attempt to Rape”


Judicial assessment of intention vs. act


Supreme Court’s observations under POCSO & IPC


Impact of this judgment on future cases


This video provides a structured and legally grounded explanation of a significant judicial development.



#SupremeCourt #AllahabadHighCourt #LegalNews #POCSO #CourtVerdict #ShivendraGaur #VishaSinghChandel #SurajKumarJha #IndianJudiciary #AttemptToRape #HighCourt #LegalDiscussion

~HT.178~PR.548~ED.104~GR.508~CA.534~

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Transcript
00:02ग्रैबिंग ब्रेश और स्टिंगिंग पहजामा इसमें ऑनरेबल हाई गोट का कहना था कि एक थेम्ट तू रेप नहीं है यह
00:14करने से पहले कि सुप्रीम कोट ने पतकार लगाते हुए काए कि जज़ेस को सेंसिटिवी क्लास चलाने के लिए भी
00:21अब ट्रेनिंग में प्रोग
00:29बच्खी के साथ ऐसा हो लेकिन अगर हुआ और उन्हें पता लगा कि हम पर इस तरह की केपणी होगी
00:35इस तरह की भहस होगी तो साइध आरोपी उनकी सर्म हया या कानून लड़ते समय उनको तमाम अपमान की संभवनों
00:44के वएसे बच जायेगा देश में अक्सर बात होती है मह
00:59लोग हैं वकील हैं जज हैं अगर वह व्याक्या सही नहीं करते हैं तो निर्णे पर फर्क पड़ता है और
01:06ऐसा ही एक मामला आया हाई कोट इलावाद हाई कोट से जब तो लोगों ने दभी जुबान भी और कुछ
01:15ने खुले तोर पर भी उसको बड़ा निंदनिये डिसीज
01:29हमारे साथ इस पर बात करने के लिए सुप्रिम कोट के वकील विसाल सिंग चंदेल जी और सूरज कुमार जहाजी
01:36दोनों मौजूद हैं हम समझना चाहेंगे कि क्या है लेकिन उसमें जो बाते कहीं गई हैं वो इतनी शर्मनाक हैं
01:41मैं कुछ तो बोलूँगा कुछ बोलने की
01:59जुर्म को जुर्म कितना कम हो जाता है और कितना लाव अभ्युक्त को मिलता है यह कुछ चीजें तो आप
02:06भी नहीं बोल पाओंगे उसके बाद भी कही है दवाना वो दवाना तो वह चीज तो बड़ा शर्मनाक है बोलना
02:12वो जैज ने बोल दी देखिए लहाबाद हाई को
02:15कोट ने डिसीजन दिया था जिसमें उन्होंने माना था कि ग्रैबिंग ब्रेश इस्टिंग पैजामा इस नौट अन अमाउंट टू अटेंब
02:22टू रेप और उसको मानते हुए अलहाबाद हाई कोट ने उस मामले को क्वेस्ट कर दिया था जिसको कि ऑनरेबल
02:28सुप्रीम को
02:41कि बच्ची के साथ यह घटनाएं होती है और उसको एक कोट यह कह रहा है कि अटेंब टू रेप
02:45नहीं है तो उन्होंने स्वतह संग्यान लेते हुए केस अपने यहां बुला लिया था और इसमें ऑन्रेबल जेश्टिस भी चीव
02:53जेश्टिस सुरीकान जी जेश्टिस जो �
02:55इसमाला बॉक्ची दियो जेश्टिस अन्वी एंजारिया दीस मैटर को सुन रहे थे और इलहाबाद हाई कोट के और को सेटेसाइट
03:01कर दिया इस ग्राउंड पे कि जजोच को सेंसिटिव होना चाहिए और यह पूरा केस पॉक्सों के अंदर आता है
03:07इसे अटेंब टू ट�
03:22जिसमें बताया जाता है कि रेप किसी भी 18 साल के नीचे की बच्चो को कैसे हो सकता है या
03:28उसकी कैसे करिया करने की कैसे कोसिते होती हैं तो ग्रैबिंग ब्रेषट और इसमें ऑनरेबल हाई कोट ने माना था
03:37कि यह रेप की कोशित नहीं है जो की गलत है अज़रा चीज़ी �
03:42यह attempt to rape नहीं है यह एक तैयारी है रेप करने से पहले की तो तैयारी और attempt में
03:48क्या अंतर है यह high court ने decide नहीं किया था दूसरा चीज ऑन्रेबल high court के इस judgment को
03:53प्रिसीडेंट ना माना जाए इस पर भी रोगा उन्रेबल सुप्रीम कोट ने लगाई थी और उन्रेबल सुप्रीम कोट ने फटकार
03:59लगाते हुए कहा है कि जज़ेश को सेंसिटिवी क्लास चलाने के लिए भी अब ट्रेनिंग में प्रोग्राम किया जाएगा कि
04:05जो जज ऐ
04:06ऐसे मुकदमे को रेप के मुकदमे को सुने उन्हें थोड़ा सा सेंसिटिव होना चाहिए कि बच्ची के साथ क्या गलत
04:11हो सकता है या क्या गलत होने वाला है इसी में एक उन्रेबल सुप्रीम कोट का ही जज्जमेंन ने माना
04:18है नौसाद वर्सें स्टेट आफ उपी में कि �
04:21इस बॉड़ी इस नोट प्लेग्राउंड कि जब मन किया किसी का कोई आता है और रेप किया और रेप करके
04:27चला जाए और ऐसे लिए कठोर पनिस्मेंट बनाये गया है तो कहीं न कहीं बहुत ही अच्छा जज्जमेंट है और
04:32अनुरिबल सुप्रीम कुर ने बहुत सही किया कि
04:36अच्छा जाज साब आपके पास आते हैं मैंने यह देखा है कई वारा हम फिल्मों में एक अदालत का सीन
04:41होता है बहस होती है उस बहस में एक बहुत ही पुरानी फिल्म थी जीनत अमान उसमें फिल्म तो उसमें
04:48किस तरह और उसकी इंगलिस बर्जन विटा लिपिश्टिक �
04:51नाम था उस फिल्म का उनिस्सों सब्सक्राइब में अदालत में बताना पड़ता है उससे वकील सवाल करते थे उल्टे सीधे
05:09काफी ऐसे सवाल करते उनकी कोशिस रहती थी कि एक जो उनके पक्ष के वकिल होते हैं कि आरोपी कड़ी
05:14सजा मिले बिपक्ष का होता था कि कहीं �
05:20अब मैं हैं समझता हूं कि उस बात कोट में या किस भी कोट में कहीं गई होगी पहले तो
05:26उसने यह सब कैसे बताया होगा कि उसके साथ क्या क्या हुआ है जो हम आप बोलने में कैमरे को
05:31शर्मा रहा है यह नाड़ा और यह जो आपने सब्सक्रा इस्तमाल किया तो वह बच्�
05:45ही जो सकती है जो बयान दिये हो मैला उसके सामने तो वहां वो सरमसार हुई दुबारा अब जैज ने
05:52कह दिया यह तो अपरादी नहीं है तो आप जैसे वकील सुप्रिम कोड में इसे तुमाम पहचले दे रहे तो
05:57एक दम फॉस्ट क्लिक किया है यह यह क्या हो गया माला हमारे
06:15जैजमेंट अभी आया है उससे पहले भी प्रसांद कुमार जी उजज्ट उन्हाने गला जैजमेंट गिया था फिर जो है बंबेय
06:19कोड का दोहर बीस का जैजमेंट है जिसमें यह काता है कपड़े को उपर टैच नहीं होगा यह सिर्फ 304
06:27नहीं होगा उस पर सुप्रीम को�
06:41तो ऐसा देखा जा रहा है कि सुपमा अलग अलग अलग है मुझे लगता है कि जूडिशल ट्रेनिंग की जवरत
06:48है वंट वन टॉन इक कॉंफ्रेंस हो ताकि लॉग पॉइंट पे किलियर स्टेंड हो कि क्यारण की है सब्सक्राइब भारत
06:53कंदर 25 आप देखेंगे एक है को �
06:58अब आपके सवाल जो मूल सवाल था कि महिलाओं को बार बार सवाल गुजरना पड़ता है बिल्कुल आपने सही कहा
07:04और इसके लिए जो अब भी एनसेस हो गया स्यार्पीसी में धारा जो है एक सो चोबन में भी है
07:08कि फिर जब लिखे जाएगी तो मुवें महिला अधिकारी
07:25दबंग किसम का होता है इसके लिए अब्युक्त को बिटनेस बॉक्स के अंदर छुपा के रखा जाता अधर बाज एक
07:30और प्रोभीजन आगा है विडियो विटनेस बॉक्स जहां पर पीरित बहुत चोटे है चोटे उमर की बच्ची है या कोई
07:37और महिला है जो मेंटली पर
07:55और इसको बोलते हैं इन केमरा प्रोचीडिंग्स इन केमरा प्रोचीडिंग में कोई और केस नहीं चले हैं कंद मेले स्टाफ
08:00हटा दिये जाते हैं जितना संभव हो सके फिमेल रहती है और एक और दूसरी बात सेक्शन 165 में जजज
08:09को पावर है कि वह इस बात को ध्यान ड�
08:24और लेते हैं कि कई रही को लग ईस लड़की के साथ में पढ़री चैनल
08:45पंजाब दोनों जज्जमेंट में सुप्रेम को करेंगे ट्राइल होगी तो वकील को बड़ी संजीधी से पेशाना चाहिए
08:56मैं एक सवाल यहां पर इसलिए करूंगा क्योंकि यह सब इतनी नहीं मेरे लिए कि सुप्रेम कोट ने इसको बदल
09:03दिया मैं तो भगवन न करें किसी की बेटी किसी की बच्की के साथ हो लिकिन अगर हुआ और उन्हें
09:11पता लगा कि हम पर इस तरह की टेपनी होगी इस तरह की
09:14बहस होगी तो साथ आरोपी उनकी सर्म हया या कानून लड़ते समय उनको तमाम अपमान की संभावनों के वएसे बच
09:22जाएगा तो सबसे पहले जैसे आपने बहुत सारी चीजे बताई नंबर एक बात मेरी समझ में जो आती है क्योंकि
09:28आप तो कानून को समझने वाले लोग
09:41साथी तो यह हाई कोट में तो केवल वो बयान गए होंगे जो आल लेडी नीचे पर तैय हो चुको
09:49की वहां पर प्रीडिता साइदना गई हो उसी पर डिसकस हुआ होगा और यह लोगों को बताना जरूरी कि ऐसा
09:56कुछ हो जाता है तो जो सवाल करने वाला लिखने वाला तो
10:11जो कगक्त थें उनके वकील ने इस जज्वेंन को चैलेंज किया था Un없land, इलाबाद High Court में इसमें किपर डिए
10:19और इलब आницल लेके गये थे और डिला बादा आज कोट में और लेकिन उसी को चालेंज करते हूए जब
10:36हाई कोट में गए तो हाई कोट ने
10:38माना कि यह प्रिपरेशन टूरेप है अटेंट टूरेप नहीं है कि जो महला जो बच्ची है या महला है उसको
10:46कोट में इस तरह के सरमसार होने
10:48से बचाने के लिए सारे साधन है अब किसी देखिए इस पर इस पर भी मैं केस अभी रिसेंट केस
10:57बताऊंगा कुलदीव सिंग सिंगर का जो केस था उसमें एड़ोकेट महमूद प्राचा बार-बार मीडिया में ट्राइल दे रहे थे
11:04विक्टिम का नाम डिस्प्रोच कर रहे
11:17है ता अगर आप हमें मजबूर करेंगे तो हम आपकी बार अईडी कैंसल कर देंगे आप कभी प्रैक्टिस नहीं कर
11:22पाएंगे तो यह बताने का यह मतलब था कि आप किसी भी रिइप विक्टिम का ना तो आप नाम में
11:26भैयार में लिख सकते है ना चार्ट सीट में लिख सक
11:46कि बंद लिफापे में सिर्व जज़ेस के पास वोटे जाएगी और किसी के पास नहीं जाएगी तो कहीं न कहीं
11:52कानून सुद्रीड हो रहा है लेकिन हमारे पास महिला वकीलों की कमी है तो अभी इसको सुद्रीड होने में थोड़ा
11:59समय लेगा लेकिन जल्द ही यह सुद्री�
12:14जाता है और वो यह ध्यान रखते होंगा कि मेरी जो क्लाइंट है वह उनके पास महिला वकील रखते होंगा
12:22क्या है देखिए इसमें क्या है कि लीगल एड सर्वीस ऑथरेटी एक है जो कि 1995 से लगू है को
12:30महिला है अगर उसके पास आर्थी ग्रूप से सबल वो नहीं है पैस
12:33से नहीं है तो कंसर्ण डिस्टी कोर्ट के डिले से होते हैं सर्वीस ऑथरेटी सुप्रीम कोट में भी आरके जन
12:40ब्लॉक के पास वहां पर फ्रंट ऑफिस है वहां जाके आप अपना आधार काट देंगे चार फोटो पासपोर्ट साज फोटो
12:45होगी यानि आपको सरकारी वक
12:49कंटे वह आपके कोट में रिपरजेंट करें वहां तक मैं देखता हूं कि जब यह सरकार वर्सिस होता है तो
12:54वकील होता ही यह बिकिंग पास प्राइवेट वकील की बात कर रहा है अगर आप देखे बिलकुल आपने सही का
13:03पीपी सहाब तो होता ही है विक्टिम के तरफ से स
13:10दूसरी बात मैं आपके दर्सक बता दू धारास 357 सी विक्टिम कंपेंसें से स्कीम है वह भी आपको मिलेगा और
13:17जो आप हम प्राचाक हमारे कलिक बता रहे हैं उस पर जज़मेंट है निपुन सक्सेना वर्सिन इन अफ इंडिया 2018
13:24अगर किसी भी मेडिया में कहीं अगर आ
13:38अंदर गाता अपको सजा हो जाएगी दो साल की इसलिए कभी भी जू नाम है अर्दुली है के स्टेंडिंग रूल
13:42है कि यहां भी आप उसको ना कोई मेडिया में पपलिकेशन हो सकता ने को अपना नाम के वकील भी
14:00नाम को नहीं बुला सकते उसको प्रोसिक्यूटिक से वा
14:23तो इसमें हमें किसी के साथ नहीं पर कोई भी महला को डर्निक जरूवत नहीं है
14:33वह चाहें तो अपनी बात किसी महला से कह सकती है महला ज़से कह सकती है यह जो बहुत ही
14:51सब्मान नहीं है और यह इसलिए और महतुन होता है
14:55अपिधिता नहीं है जैसे भखिल साहन बताइब सो मोटो लिया और उसके बाद में यह डिक्षिजन आया तो फिलाल इस
15:02पीटियो में इतना ही आप ऐसे निर्णों को क्या मानते हैं आप कमेट में बता सकते हैं अब सुप्रिम कोड
15:07का आदे से ौड करने निर्णा को बदल दि
15:24झाल झाल
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