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00:02अंकित और अनू भाई बेहन थी।
00:37अंकित की शादी सीमा से हुई।
01:00मेरे हाथ का खाना अंकित को पसंद नहीं आता।
01:02क्या आप खाना बना दोगी प्लीज।
01:05अरे हाँ हाँ ये भी कोई कहने की बात है जरूर।
01:09सीमा इस बात से मन ही मन बड़ा खुश होती है।
01:12और अगले दिन के जाडू पोचे के काम से छुटकारा पाने के लिए एक और तरकीब लड़ाती है।
01:18हाल में जोर-जोर से कराने लगती है।
01:21उसके करानी के आवाज सुनकर अनू हाल में भागती हुई आती है।
01:25क्या हुआ सीमा? दीदी, लगता है मेरी कमर अकड़ गई है।
01:30वो क्या है ना मुझे जाडू पोचा करने के आदत नहीं है ना।
01:34मेरी मम्मी पापा ने मुझसे कभी ये काम नहीं करवाया।
01:37अरे कोई बात नहीं, जाडू पोचा ही तो है, मैं कर लिया करूंगी।
01:41ऐसे ही धीरे-धीरे सीमा ने घर के सारे कामों का बोज अनुपडाल दिया।
01:47घर का सारा काम अनुप करती थी, फिर भी सीमा को अनुप से छुटकारा चाहिए था।
01:53इसलिए एक दिन वो अंकित के ओफिस से लोटने से ठीक पहले, धेर सारे कपड़े लेकर धोने का नाटक करने
01:59बैठ जाती है।
02:01अरे सीमा, इतने कपड़े।
02:03अब क्या करूं, अकिली पर जाती हूं, करना तो मुझे ही है न।
02:08अरे दीदी से मदद ले लेती।
02:11अच्छा, ताकि सारा जमना कहे कि भावी बड़ी ननत से काम करवा रही है।
02:16और वैसे भी दीदी ने तो साफ कह रखा है मुझे, कि तुम आज जो पी हो, सिर्फ उनकी वज़े
02:22से हो, इसलिए अगर उनके बना इस घर में रहना है तो काम करना ही पड़ेगा।
02:26ये सब सुनकर अंकित को बहुत गुस्सा आ गया। उसने अनु को बुला कर कहा, दीदी, ये घर पापा ने
02:33बनाया था और इसमें मेरा भी हिस्सा है और मुझे वो चाहिए।
02:56एक दिन सारे कामों से था कर सीमा अंकित से कहती है, अची सुनते हो, अब मुझे से तुमारी ये
03:02बहन की सेवा ना होगी, अगर कल तक तुम इसका बंदवस नहीं करते तो मैं घर छोड़ कर चली जाओंगी।
03:26अजी सुनते हो ये आपके लिए एक पार्सल आया है, ये लेजे।
03:30अरे इसमें तो घड़ी है और एक चिठी भी है।
03:33दिखाए तु, अरे वा, बड़ी ही संदर घड़ी है, लेकिन ये आपको भेजी किसने है।
03:39पता नहीं, शायद चिठी में कुछ लिखा हो।
03:43आशा करती हूँ, ये घड़ी तुमें पसंद आएगी।
03:47रक्षा बंदन की बहुत शुब काम ना है।
03:49तुम्हारी दीदी अनुम।
03:51चिठी पढ़कर अंकित की आँखे भराती है।
04:19इतना कहकर अंकित अनु को लेने निकल जाता है।
04:23वहां पहुचकर, दीदी मुझे माफ कर दो, मैं तुम्हें लेने आया हूँ।
04:29भाई, आज तो राखी है, आज तो मैं मना कर भी नहीं सकती।
04:35दोनों घर पहुचते हैं।
04:37अरे सीमा, तुम अभी तक यहीं हो, निकल जाओ इस घर से।
04:41खारे वहां अंकित, फिर वहीं गलती कर रहे हो तुम।
04:44सीमा, तुम कहीं नहीं जाओगी।
04:47दीदी मुझे माफ कर दो, मुझे से गलती हो गई।
04:52सीमा, आज ये समय माफी मांगने का नहीं है, राखी की तयार ही करने का है, चलो तयार हो जाओ,
04:58तुम्हारे भाईया के घर भी तो जाना है ना?
05:01ये सुन, सीमा अनू के गले लग जाती है
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