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  • 2 days ago

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Transcript
00:03शहर में रहने वाली निहारिका की शाधी गाउं की राम से हो जाती है निहारिका को ज्यादा किसी चीज का
00:11शौक नहीं होता जिस वज़े से वो ससुराल में खुशी से रह रही होती है लेकिन गोल गप्पों का प्यार
00:18सब को बहुत परिशान करता है
00:21देखो जी हमारी शाधी को ना एक हफता हो गया और मुझे गोल गप्पे खाये हुए पुरे साथ दिन बीट
00:28गए इतने लंबे समय तक अपने गोल गप्पों के बिनम मैं आज तक नहीं रही
00:34ओहो आई बड़ी गोल गप्पे खाने वाली हुकम तो ऐसे चला रही है जैसे तेरे पापा ने हमें यहाँ कोई
00:44दुकान खोल कर दी हो
00:47बेटी तो दी है ना अब उसे थोड़े गोल गप्पे तो आप भी खिला सकते हैं ना
00:52अरे देखो तो जरा नास पीठे गोल गप्पों के पीछे कैसे कैची की जैसी जुबान चल रही है इसकी
01:02देखी मम्मी जी आप भले मुझे कुछ भी बोलिये लिकिन अपने गोल गप्पों के लिए मैं कुछ नहीं सुन सकती
01:08हाँ
01:09अरे मैं तुम्हें गोल कप्पे खिला दूँगा थोड़ा सबरे तो करो
01:14पिछले साथ दिनों से सबरे तो कर रही हो ना
01:18अरे गोल कप्पे ही तो है इतना बेचन क्यों हो रही हो आ जाएंगे
01:34निहारीका की बात सुनकर उसकी सास और पती सर पकड़ कर बैट जाते हैं
01:40जिसके बाद राम गोलगपो का इंतिसाम करने घर से बाहर चला जाता है
01:45कुछ देर बाद वो गोलगपे लेकर घर वापस आता है
01:49जिनने देखकर निहारीका सारी काम छोड़कर खुशी से भागते हुए राम के पास आती है
01:56तुम आ गए हैं? इतनी देर क्यों लगाए हैं? पता है न मैंने तुम्हें कितना मिस किया
02:02अरे थोड़ी दिर पहले ही तो घर से गया था
02:06क्या? तुम? अरे मैं तो अपने गोलगपों से बात कर रही हूँ, तुमसे नए
02:12निहारीका का गोलगपों के लिए ऐसा प्यार देखकर राम हैरान रह जाता है
02:16अब वो गोलगपों को प्लेट में अच्छे से सजा कर उन्हें खाने बैठती है
02:21लेकिन पहला गोलगपा खाते ही वो गुस्से में प्लेट खिसका देती है
02:27ये कैसे घटिया गोलगपे उठा कर ले आए? ना पानी में स्वाद ना गोलगपों में
02:33हल हल महारानी के नकरे तो देखो, इन्हें गोलगपे में भी अलग-अलग स्वाद चाहिए
02:43ठीक है, आप लोग इस पर बहज मत शुरू करते ना
02:46मैं ना कल दूसरी जगह से खरिद लाओंगा, ठीक है?
02:50अगले दिन, राम निहारिका के लिए गाउं में दूसरी दुकान से गोलगपे खरिद कर लाता है
02:56पर उसे फूबी पसंद नहीं आते
02:58जिसके बाद बहुत दिनों तक यही सिलसिला चलता रहता है
03:03जिसमें राम अपने पत्नी के लिए दूसरे गाउं तक जाकर वहां से भी गोलगपे खरिद कर लाता है
03:09पर निहारिका को कहीं के कोई भी गोलगपे पसंद नहीं आते
03:29सास की बाद पर निहारिका बैक पैक करके घर से जाने लगती है
03:35जिस पर राम उसे रोकती हुए कहता है
03:38He has to keep your own house in the opposite direction.
03:46I do not go to the house.
03:51गोल गपिखाने जा रही हूँ
03:54यह कहकर निहारिका शहर में अपने पापा के घर चली जाती है
03:58जहां पर वो सुबह के नाश्टे से लेकर रात की खाने तक में
04:02मन और पेट भर कर गोल गपे खाती रहती है
04:06जिससे उसकी तब्यत खराब हो जाती है
04:09और उसे अस्पताल में एड्मिट करना पड़ता है
04:12फोड पॉजनिंग है जांग फोड बिलकुल बंद करना होगा
04:17लो बहुत गोल गपे गोल गपे करती रहती थी
04:21कर दिया ना गोल गपे ने बिमार और खाओ अब
04:25मा इसके बारे में हम घर जाकर बात करेंगे
04:29कुछ दिनों में निहारी का ठीक हो कर अपने ससुराल वापस आ जाती है
04:34जिस पर एक बार फिर सास वहुकी नोक्चो शुरू हो जाती है
04:39अब थोड़े दिन अपने प्यार से दूर रहना
04:42नहीं तो इस बार सीधा भगवान के घर पहुँच जाओगी
04:48इस बार सास की बात का कोई जवाब दिये बिना
04:51निहारी का अपने कमरे में चली जाती है
04:54बीमार होने की वज़़ज़ से
04:56निहारी का गोल गप्पे तो खानी ही पाती
04:58लेकिन अभी भी उसके मन में हर वक्त
05:01उनी के खयाल चलते रहते है
05:21एक दिन निहारिका अपने चेक अप के लिए डॉक्टर के पास गई
05:25जिसकी घर से निकलते ही राम रसुई में जाकर कुछ करने लगता है
05:30शाम को निहारिका के घर वापस आते ही उसकी सास कहती है
05:34शकल से तो लग रहा है कि डाक्टर ने थोड़े और समय तक गोल अपने बंद कर दिये
05:43अच्छा है कम से कम अब हमें पूरा दिन गोल अपना पुरा हैं तो नहीं सुनना पड़ेगा
05:51सास की बाते सुनकर निहारिका चिरते हुए अपने कमरे में जा रही ही होती है
05:55तभी राम गोल कपुसे भरी एक बड़ी प्लेट लेकर उसके सामने आ जाता है
06:00जिने देखकर निहारिका का चैरा खिलोडता है
06:03ये मैंने तुम्हारे लिए बना है
06:06तुम्हें अपने पसंद की चीज खाने से कोई नहीं रोक रहा
06:09जितना खाना है उतना खाओ
06:11लेकिन उससे खाने की एक लिमिट होनी चाहिए
06:15हाँ बभू
06:16किसी भी चीज की अती हमेशा नुकसान दायकी होती है
06:22ठीक है पर अभी मुमें पानी आ रहा है गोल कपे खाऊं प्लीज
06:28अरे अकेले क्यों सब साथ मिलकर खाएंगे ना
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