00:00बेटी बिना परिवार
00:01मा, मैं आपके लिए चाय लिकर आई हूँ, अब आप उठ जाएए
00:06बेटी के इतना बोलते ही यशोदा जट से उठ जाती है
00:10अरे बेटा, मुझे क्यों बिगाड रही है?
00:14कल तेरी शादी हो जाएगी, तो मैं कैसे रहूँगी तेरे बिना?
00:17मा, मुझे कहीं नहीं जाना, मैं यहीं रहूँगी, हमेशा आपके सार
00:23बेटा, एक ना एक दिन तो हाँ लड़की को जाना पड़ता है अपने ससुराल
00:29उफो मा, आप इना सुबसुब कौन सी बाते लेकर बैठ गई?
00:34यह चाई लीजिए और फ्रेश होकर बहार आजाईए, नाश्ता तैयार है
00:39इतना बोलकर कंचन मां से चली जाती है
00:43कंचन की बढ़ती उम्र देख, यशोदा को उसकी शादी के खयाल आने लगते हैं
00:48जिसके बाद वो कंचन के लिए लड़का ढूनना शुरू करती है
01:04इस पर कंचन की पिता उससे कहते है
01:07कंचन बिटा, अब तेरी शादी होने वाली है
01:11यह सब चॉकलेट खाने के शाख छोड़ दे बिटा
01:15कंचन कुछ कहती उसके पहले उसका भाई राहुल बोल पड़ता है
01:19पापा, इतनी भी क्या जल्दी है? अभी तो कंचन छोटी है
01:24अरे, इतनी भी छोटी नहीं है तेरी बेहन
01:27कंचन मू बनाते हुए वहाँ से चली जाती है
01:30और अपने रोज मर्रा के कामों में जुट जाती है अगले दिन
01:34कंचन बेटा, आज तु घर का कोई काम नहीं करेगी
01:38जाकर तयार हो जा
01:40थोड़ी ही देर में तुझे लड़के वाले देखने आ रहे हैं
01:44मा प्लीज, मुझे कहीं नहीं जाना आप लोगों को छोड़कर
01:48जाना तो पड़ेगा ना बेटा
01:51दुनिया की यही रीत है
02:04कंचन तयार होने चली जाती है
02:05जिसके कुछ घंटे बाद लड़के वाले भी कंचन को देखने उसकी घर पहाँच जाती है
02:10दोनों ही परिवारों को रिष्टा मनसूर हो जाता है
02:14और एक सब्ता बाद कंचन की श्लोक के साथ शादी हो जाती है
02:19कंचन की जानी के बाद सभी को घर बहुत खाली-खाली सा लगने लग जाता है
02:24मा, मुझे छोटी की बहुत याद आ रही है
02:27वो होती तो अभी पूरे घर में इधर से उधर नाश रही होती
02:31हाँ बेटा, तु सही कह रहा है
02:34उसके बिना ये घर खाने को दाड़ रहा है
02:37लेकिन हम कर भी क्या सकते है
02:40एक ना एक दिन तो ये होना ही था
02:43ऐसे ही एक महना बीच जाता है
02:46अब यशोदा को घर का सारा काम अकेले ही करना पड़ता
02:49जिसके कारण वो अक्सर बिमार रहने लगी
02:52ये शोदा तुमसे कितनी बार कहा है
02:55ज्यादा काम मत किया करो
02:58लो, हो गए ना फिर से तुम्हारी तब्यत खराब
03:01अब मैं घर का काम नहीं करूंगी
03:04तो और कौन करेगा
03:06कंचन भी नहीं है
03:08मेरी बेटी ने आज तक कभी मुझे कोई काम नहीं करने दिया
03:13जिसके कारण अब मेरा शरिर काम का ज्यादा भार सहनी नहीं कर पाता
03:19क्यों ना हम राहुल की शादी करवा दे
03:23बहु आएगी तो तुम्हारी भी थोड़ी बहुत मदद हो जाएगी
03:27हाँ, ये अच्छा आइडिया है
03:30घर वाले शादी की बात शुरू करते हैं
03:33और देखते ही देखते कुछ महिनों में
03:35राहुल की शादी अंजली नाम की लड़की से हो जाती है
03:38और घर में आती ही अपने व्यवार और स्वभाव से
03:42अंजली सभी का दिल जीत लेती है
03:44शादी के कुछ दिनों बाद
03:47बहु जरा चाय तो पिला दो
03:50सबसे चाय नहीं पी है
03:52अंजली अपने ससुर के लिए चाय बना कर लाती है
03:56लीजी पापा जी
03:58आज डिनर में क्या बनाना है
04:00अरे बेटा
04:01जो तेरी इच्छा है वो बना ले
04:04थोड़ी देर बाद
04:06अंजली सभी को खाने के लिए आवाज लगाती है
04:09अंजली के आवाज देते ही
04:15सभी लोग खाने के लिए आजाते है
04:17अरे वा बहु
04:19खाना तो बहुत स्वादश्ट बना है
04:22तुमारे हाथों में तो जादू है जादू
04:25सच मैं बहु
04:27खाना तो बहुती लाजवाब बना है
04:30थैंक यू
04:31मा पापा
04:33मैं सोच रहा था
04:34क्यों न हम सब कहीं घूमने चले
04:36हम सब क्या करेंगे जाकर बेटा
04:39तेरी अभी नई-नई
04:41शादी हुई है तु बहु को लेकर जा
04:44नहीं मम्मी जी
04:45आप लोग नहीं जाएंगे तो हम भी नहीं जाएंगे
04:48अंजली के इतना
04:49प्यार से बूलने पर घर वाले उस इनकार नहीं कर पाते
04:53और उनके साथ चलने के लिए मान जाते हैं
04:56एक काम करते हैं
04:58साथ में कंचन को भी ले चलते हैं
05:01बहुत दिन हो गए
05:02उससे मिले भी नहीं
05:04हाँ हाँ क्यों ना हम कंचन दिदी को सर्प्राइज दें
05:08वो तो खुशी से पागल हो जाएगी
05:10ठीक है फिर
05:11मैं आज ही उसे यहां आने को बोलती हूँ
05:14उसके बाद हम सब उसे सर्प्राइज देंगे
05:17फिर सब साथ में घुमने जाएंगे
05:20फिर क्या था
05:21ये शुदा तुरंद कंचन को फोन मिला कर बैठ जाती है
05:25जिसमें दोनों मा बेटी की
05:27लंबी बाते चलने लगती है
05:29और उसी में
05:30तुझे पता है कंचन
05:31तेरी भावी बहुत अच्छी है
05:34जरूर पिछले जन्म में मैंने कोई अच्छे करम किये होंगे
05:37जो मुझे अंजली जैसी बहु मिली है
05:40अपनी मा के मुँसे
05:42किसी और की इतनी तारिफे सुनने के बात
05:45कंचन को अपनी भावी से
05:47जलन होने लगती है
05:48मा आपको नहीं लगता
05:51आपको ज्यादा ही बहु की तारिफ कर रही है
05:54कहीं भावी आपके हाद से फिसल ना जाए
05:57आरे नहीं-नहीं बेटा
05:59वो ऐसी नहीं है
06:00तो एक काम कर कुछ दिनों के लिए यहीं आजा
06:03इसी बहाने अपनी भावी को अच्छे से पहचान लेना
06:07भावी से तब मुझे मिलना ही पड़ेगा
06:11उन्होंने उस घर में मेरी जगा जो ले ली है
06:14अगले दिन कंचन अपना सामान लेकर माई के पहुच जाती है
06:18जहां अंचली उसके लिए चाई नाश्टा लेकर आती है
06:21दीदी तुमारे सिसुराल में सब कैसे है
06:25मेरे सिसुराल में सब ठीक है
06:27आप यहां का बताईए कि सारा काम आप बराबर कर लेती है न
06:31माँसे तो नहीं करवाती का
06:34हरे कैसी बात कर रही है आप दीदी
06:36मैं बहला ममी जी से कोई काम क्यों करवाओंगी
06:40ऐसा होना भी नहीं चाहिए
06:42वही आपके लिए बहतर होगा
06:44कंचन यह क्या तरीका है अपनी भावी से बात करने का
06:48हाँ माँ अब तो आपको मैं ही गलत लगूंगी न
06:53ऐसा नहीं है कंचन तुम गलत समझ रही हो
06:56आपसे तो मुझे बात ही नहीं करनी
06:59इतना कहकर कंचन अपने रूम में चली जाती है
07:02अंजली बेटा कंचन की बात का बुरा मत मानना
07:07उसका अभी शायद मूड खराब है
07:10कोई बात नहीं ममी जी
07:12मुझे उनकी बातों का बुरा नहीं लगा
07:14अगले दिन अंजली रस्वे में खाना बना रही होती है
07:18तभी वहां कंचन आ जाती है
07:20ठापी आप रहने दीजिए
07:23आज खाना मैं बना देती हूँ
07:25अरे नहीं नहीं दीदी आप महमान हो
07:27कुछ दिन आराम करने का मौका मिला है
07:30मैं आपसे काम नहीं करवा सकती
07:32मैं मैमान नहीं बेटी हूँ इस घर की
07:34आप जाकर बैठिये मैं खाना बना देती हूँ
07:37कंचन की जिद के आगे जुकते हुए अंचली वहां से चली जाती है
07:42थोड़ी दिर में कंचन का खाना बन कर तयार भी हो जाता है
07:45आजाएए सभी मैंने खाना बना दिया है
07:49कंचन के आवाज सुनकर सभी लोग आ जाते हैं और खाना शुरू करते हैं
07:54आज बड़े दिनों बाद तुम्हारे हाथ का खाना खाकर मज़ा आ गया बेटा
07:59मैं तेरे खाने को बहुत मिस करता था
08:02सच में आज तो मज़ा ही आ गया
08:05कंचन तेरे हाथों में तो जादू है बेटा
08:09मैं तेरे हाथ का बना ये खाना हरोज मिस करती थी
08:13सभी के मूँ से अपने लिए तारिफ सुनकर
08:16कंचन की आखों से आसु बहने लगते हैं
08:19वो अपने आसु पोच्टी हुए कहती है
08:21क्या सच में आप लोग उने मेरे हाथ के खाने को मिस किया
08:26मुझे तो लगा था आप लोग मुझे भूली गया है
08:29हरे ऐसे कैसे भूल सकते हैं हम तुझे
08:32तु बेटी है इस घर की
08:34कोई खिलाना थोड़ी ना है जो भूल जाए
08:36और तुझे यहां बुलाने का आइडिया तेरी भापी का था
08:40हम लोग कहीं घुमने का प्लान कर रहे थे
08:42तो सुचा तुझे भी साथ ले जाए
08:45मुझे माफ कर दीजे भापी
08:47मैंने आपके बारे में कितना गलत सुचा
08:50मुझे लगा आपके कारण
08:52अब कोई मुझे से प्यार नहीं करता
08:54अपनी जलन के कारण
08:56मैंने आपके साथ कितना गलत व्यवार किया
08:59हो सके तुम मुझे
09:00माफ कर दे ना भापी
09:01अरे नईने दीदी
09:03आपको माफी माँगने के कोई ज़रूत नहीं है
09:06आप तो बिलकुल मेरी छोटी बेहन जैसी हो
09:09आप इस तरह माफी माँगोगी
09:11तो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा
09:13अंजली के इतना कहते ही
09:15कंचन उसे गले लगा लीती है
09:17अब उसे एसास हो चुका होता है
09:19कि सभी रिष्टे अपनी जगा खास होते है
09:23कुछ नए रिष्टों के जुड़ जाने से
09:26पुराने रिष्टों का प्यार कभी खत नहीं होता
09:29ना ही जीवन में कभी कोई किसी की जगा ले सकता है
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