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00:00रिश्वत खोर बहू
00:01ये क्या बात हुई?
00:03तुझे पता भी है तो क्या बोल रही है बहू?
00:07हेक्तम सही बोल रही हूँ
00:08अगर आपको मुझसे अपने इन आठन भरे घोटनों की मालिश करानी है
00:13तो मुझे वो देना पड़ेगा जो मैं मांग रही हूँ
00:17एक हाथ दो और दिसरे हाथ लो
00:20सिंपल
00:21बहू हूँ
00:23इसका मतलब ये नहीं कि नाकरानियों की तरफ काम करूँ
00:26ये है अमरिता और उसकी सास रेखा
00:30अमरिता एक नई नवेली बहू है जिसकी शादी
00:33कुछ दिनों पहले ही रेखा के बेटे माधों के साथ हुई है
00:36वैसे तो अमरिता दिल के बहुत अच्छी है
00:39लेकिन वो कहते हैं न कि खून का रंग तो दिखता ही है
00:43बस बही डॉन की बेटी होने का रंग यहां अमरिता में भी दिख रहा है
00:50जो है रिश्वत लेना
00:52जी हां काम चाहे कितना भी छोटा या कितना भी बड़ा क्यों ना हो
00:58हमारी अमरिता बहु बिना रिश्वत लिए कुछ नहीं करती
01:02चलिए देखते हैं आगे इनकी साथ और क्या-क्या होता है
01:06रेखा और अमरिता को लड़ती देख ससूर प्रेमचन वहां आता है
01:10और कहता है
01:11और क्या हुआ काहे इतना तिल मिला रही हो रेखा
01:15अरे कुछ बोलोगी भी या कानों में हड़ताल हो रखिये तुम दोनों के
01:21देखी ना पापा जी माजी ने मुझे कहा कि मैं उनके घुटनों की मालिश कर दूँ
01:26लेकिन उसके बदले में मा जी मुझे वो हीरो वाला पुष्तेनी हार देने से इंकार कर रही है
01:31क्या? घुटनों की मालिस के लिए हीरो का पुष्तेनी हार कौन मांगता है बहु?
01:39पापा जी, आपको तो पताई है न, आपकी बहु कितनी सयानी है
01:44और कोई भी काम फ्री में नहीं करती
01:46और अब शिखावत खांदान का आटा तो इतना भी गिला नहीं है
01:51कि अपनी बहु को हार ना दे पाए
01:54क्यों माई डियर माजी
01:56देखा अपने प्रेम चंजी
01:59ये अब मुझ से पुष्टैनी हार मांग रही है
02:02कल को पूरा घर मांग लेगी
02:04आरा जा जा मैं खुद कर लूँगी अपनी मालिश
02:07ठीक है मुझे क्या
02:10एंजॉय योर मालिश ट्राइम माजी
02:13रात में जब पती महादेव दफतर से लाट कर घर आते हैं
02:18तबी कमरे में
02:19अमो, अमो सुनो ना
02:22मेरा वो लाल रंग का जो शर्ट है न
02:24वो धो दो ना प्लीज
02:26आक्चुली कल मेरी एक इंपोर्टेंट
02:28इंटरनेशनल क्लाइन के साथ मीटिंग है
02:29बहुत बड़ी डील का ओफर है
02:32इसलिए मैं अपनी उस लकी शर्ट को पैन कर जाना चाता हूँ
02:35अभी दो दो
02:36रात भर में तो सूखी जाएगी
02:37फिर कल अच्छे से कड़क वाली इस्तरी कर देना
02:40अपने शुब शुब हातों से
02:43जी नहीं
02:44मैं ये सब ऐसे ही नहीं करने वाली
02:47अगर काम करवाना है
02:49तो मेरी एक शर्ट है
02:51अरे यार
02:53तो मार तुमारी शर्ट है
02:55बोलो क्या है
02:56आपको मुझे
02:57दस मनीश मलहुत्रा डिजाइनर की साड़िया दिलानी होगी
03:02दो हफ़तों में मेरी स्वीट हार्ट फ्रेंड
03:04बिल्लो रानी की शादी है
03:06मैं वहाँ डिजाइनर साड़ी पहन कर जाऊंगी
03:09और सब कर चला दूंगी
03:10माधव अपनी बीवी की बात सुनकर हैरान, परिशान, अपनी सर पर हाथ रखकर बैठ जाता है
03:16अरे तुम बीवी होई या आफत
03:19तुम्हारे दिमाग में जंग लग गया है क्या
03:21देखो इतने सारे पैसे नहीं है मेरे पास
03:24तुम्हारी याददाश तो जगह पर है ना माधव
03:27भूल गया है, मैं एक डॉन की बेटी हूँ
03:32अगर तुमने मेरे कहें मताबिक काम नहीं किया
03:34तो तुम्हारे लाल शट को दोर ही रखो
03:37मेरे पापा तुम्हें ही लाल कर डालेंगे
03:39अब ये डर और रिश्वत का सिलसला यूँ ही चलता रहता है
03:49और इसी तरह समय बीता रहता है
03:52एक सुबा सब नाश्टे के टेबल पर बैठे थे
03:55जहां अमरिता सब की सामने एक वाइट बोर्ड लाती है
03:59जिस पर दिन बर की सारे कामों के रेट लिखे हुए थे
04:03अब ये क्या है तीचर ने बनने का इरादा है क्या तेरा
04:07अगर हाँ तो अफसोस बिचार बिच्चे उनका भविश्य तो अंधेरे में है
04:13आप लोग बेकार की बाते बंद कीजिए और आँखे खोल कर ठीक से पढ़िए
04:19क्या लिखा है ये आज के सारे कामों के रेट्स है आलू पराठे चाई डाल रोटी चावल सबजी हलवा मिठाई रसोई की सफाई वाशिंग मशिन में कपड़े दोना ओकल में मसाले कुटना और माजी और पापाजी के अलमारी के सफाई करना इन सब कामों की कुल मिलाके ज
04:49ये राम जी उठा लो अब ना देखा जाता ये सर्ट सच में पता नहीं कौन सा दिन था वो जब ये हमारे घर आई महादेव तेरे प्यार ने तो हमारा जीना दुश्वार कर दिया बिटा दुनिया में बहुत रिश्वत खोर लोग देखे लेकिन ऐसी रिश्वत खोर बह�
05:19पापा जी मैं कोई गुणा नहीं कर रिश्वत लेना बहार की दुनिया में गुणा है ऊपकी चर्णों को धो तेखो और 24 गंटे आपकी नांस्टॉप सीवा करती बैठो
05:44चली छोड़िये, नाश्ता और खाना चाहिए तो बोल दो जल्दी से, वरना मैं चली थियेटर, आज मेरे फेवरिट सलमान की पिक्चर रिलीज हुई है
05:54इतना कहा कर अमरित वहां से चली जाती है
05:57इस बेवकूफ का जल्दी कुछ का ना पड़ेगा
06:00कुछ दिनों बाद, घर में पूजा रखी थी, और पूजा में 11 पंडितों का खाना बनाने के लिए कहा जाता है
06:08वो भी नई बहु के हाथों से
06:10देखो अमरिता बहु, आज घर में पूजा है, 11 पंडितों को खाना खिलाना है, 56 भोग बना पाऊगी?
06:19उनोंने कहा है कि नई बहु के हाथों का खाना ही होना चाहिए
06:23नए तो मैं रेखा को ही बोल देता हूँ
06:27ओ कमान पापा झी
06:29खाना तो मैंने फ्रीफंड में अपने घर में भी कभी ना बनाया
06:32तो अब आपको क्या लगा
06:34कि पूजा का नाम लेकर आप मुझे अपनी जहांसे में फसा लोगी
06:39अरा कल मुही बस अबस पहले सुन भी ले क्या कह रहे हैं हम
06:45तुम्हें जितने पैसे चाहिए जितने तौफे चाहिए सब ले लेना
06:51बस पूजा पार्ट में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए
06:54यह हुई ना समिश्दारी वाली बात ठीक है अब आप लोग निश्चिंत रहिए
07:02मैं ऐसा खाना बनाऊंगी कि उन ग्यारा पंडितों की ग्यारा पुष्टे भी मेरे खानी की स्वात को याद रखेंगी
07:09अमरिता पंडितों के लिए खाना पकाती है और पूजा संपन होने के बाद उन्हें केले के पत्तों पर खाना परोस्ती भी है जिस पर खाने का पहला निवाला खाती ही
07:21वो वो वो क्या भोजन है हम इतनी जगाओ पर जाते है लेकिन इतना अच्छा स्वात तो काफी मुश्किल से चखने मिलता है
07:31रेखा जी प्रेम चंद भाय साब आप लोग सच में भागेवान हो कि आपको इतनी सर्वगुण संपन बहु मिली है जिसके हाथों में साक्षात मा अन्नपुर्णा बिराजती है
07:44सर्वगुण संपन सबको संपन न कर देगी यह खुंखार औरत कुंडली मार कर बैढ़ गई है मेरे बीचारे बीटे के जीवन में
07:55एक मिनेट अरे ये बात मेरे इस बुढ़े दिमाग में पहले कैसे नहीं आई
08:03इस अमरिता की बच्ची को मैं अपने घर से बाहर कैसे निकालों? इसका उपाय तो पंडित जी के पास ज़रूर रहेगा
08:11रेखा अगले दिन पंडित जी के पास जाकर उन्हें अमरिता की बारे में सब कुछ बता दीती है
08:17जिसे सुन पंडित जी भी परिशान हो जाते हैं
08:47लोगों को कंगाल करके ही दम लेगी
08:49नहीं नहीं ऐसा हरगिस नहीं होगा
08:52मैं कुछ करूँगी
08:54हाथ पे हाथ धरी नहीं बैठूँगी मैं
08:57वही घर पर अमरिता को ये पता चल जाता है
09:00कि उसकी सास रेखा
09:01पंडित जी के पास उसकी और महादेव की कुंडलिया लेकर गई थी
09:05और इस पर जब रेखा घर लोटती है तब
09:08वाँ माजी वाँ
09:11बहुती ज्यादा सयानी निकलिया अब तू
09:14लेकिन मैं आपको एक बात बताना चाहती हूँ
09:18कि मेरी और महादेव की कुंडलिया जोड़ कर
09:21पूजा पाट और हवन करके भी
09:23कुछ नहीं मिलेगा
09:25क्योंकि मैं ऐसी बला हूँ
09:27जो आप सबकी जिन्दगियों से अब कभी नहीं तलने वाली
09:30फिर चाहे आप कितने भी टोटके हवनिया उपाय कर ले
09:34तो खुद को समझती क्या है रह
09:38बक्तमीज तुझसे बात करना तो दूर
09:41मुझे तो तेरी शकल देखना भी नहीं पसंद
09:43अब सास बहु की बीच एक अनकहासा युद्ध छेट जाता है
09:47दिन बीतने लगते हैं लेकिन एक दिन अचानक
09:51रेखा की तव्यत हद से ज्यादा खराब हो जाती है
09:53और उससे सास लेने में भी काफि दिक्कत और परिशानी मैसूस होती है
09:58जब उससी डॉक्टर की पास ली जाया जाता है तब डॉक्टर चेक अप करके कहते हैं
10:03दखें मैंने सारे टेस्ट करके देख लिये हैं
10:07और रिपोर्ट्स को क्रॉस चेक करके ये पता चला है कि
10:10रेखा जी को गंभीर दिल की बिमारी है
10:13उनके फेफडों में भी काफी सूजन आगी है
10:16उनका जल्द से जल्द ऑप्रेशन करना होगा
10:20वना इम सॉरी तुसे उन्हें बचाना मुश्किल हो जाएगा
10:24ये खबर सुनकर प्रेम चेंद और मादो दूनों हक्का बका रह जाते हैं
10:28लेकिन डाक्टर साब कितने पैसे लगेंगे ऑप्रेशन के लिए
10:32और उसके बाद रेखा पूरी तरह ठीक तो हो जाएगी न
10:36जी हाँ, इस ऑप्रेशन के बाद वो बिल्कुल ठीक हो जाएगे
10:40लेकिन वो तभी हो सकता है जब ऑप्रेशन टाइम से हो पाएगा
10:44और अही बाद ऑप्रेशन के खर्चे की, तो उसमें तकरीबन 6-7 लाख रुपे तक लग सकते हैं
10:50जहां एक तरह सब रेखा की तब्यद और ऑप्रेशन को लेकर परिशान होते हैं
10:57वही घर पर रेखा को बिस्तर पर देख कर भी अमरिता की अंदर जरा भी दया नहीं आती
11:02ओ माजी, ये अपना फालतू का मेलो ट्रमा बंद कीजिये ना आप
11:07मुझे पता है, आपको मुझे रिश्वत नहीं देनी है और घर के सारी काम मुझसे मुफ्त में करवाने है
11:12इसलिए आप ये सिप कर रही हो ना
11:15सीरियसलिय अमरिता, ऐसे हालात में तुम ऐसी बाते कैसे कर सकती हो
11:20हम यहाँ परिशान है कि ऑपरेशन कैसे कराएंगे, बैंक में इतने पैसे भी नहीं है
11:26और तुम मा को ताने सुना रही हो
11:28अरे अमरिता बहु, मैं भला ढोंग क्यों करूंगी
11:34हम छे से साथ लाग का बंदो बस्त कैसे करेंगे
11:40करेंगे पापा, कैसे भी करेंगे
11:43अमरिता, अगर कभी भी जंदगी में तुमने मुझसे सच्चा प्यार किया है
11:48एक पल के लिए भी सही
11:50तो तुम्हें आज इस परिवार, इस घर की नियू मेरी माओ को बचा रहोगा
11:55हमने अपना सब कुछ तुमें दे दिया है
11:57अब तुम्हारी बारी है
11:59अपने किये का हिसाब चुकाने की
12:01मुझे पता है, तुम्हारे अंदर पी दिल है
12:05अमरिता बिना कुछ कहे
12:08वहाँ से चली जाती है
12:09और अपने कमरे में जाकर
12:10वो अलमारी में से अपनी मा की तस्वीर को निकाल कर
12:13अपने सीने से लगाती है
12:15और भावुक हो जाती है
12:17मा, आपके जाने के बाद
12:19पापा ने ही मेरा खयाल रखा
12:21लेकिन उनकी वज़े से ही
12:23मुझ में काफी बुरी आदते भी आ गई
12:26शाहद मुझे इतना बुरा
12:28आपकी गैर मौजुदगी नहीं ही बनाया
12:31मैंने कभी आपकी लोरी नहीं सुनी
12:34आपकी गोद में नहीं सोई
12:36आपके हाथों से अपने बालों की चमपी नहीं करवाई
12:39क्योंकि वक्त से पहले ही आप मुझे यहाँ छोड़कर चली गई
12:43लेकिन आप
12:45मैंने जितना भी इस घर से लिया है
12:47उतना सूत समिछ चुकानी की बारी आ गई है
12:51अब मैं अपने रहते अपने प्यार को भी उसी दर्ध से नहीं गुजरने दे सकती
12:55जो मैंने आपके नहीं होने सिसा है
12:59अमरिता दुरंती अपने सारे पैसे और गहने माधों को लटा देती है
13:04और रेखा का ऑपरेशन किया जाता है
13:06रेखा ठीक हो जाती है और जब घर आती है तब अमरीता दर्वाजे पर आरती की थाले लिए खड़ी होती है
13:14वेलकम हो माजी, हाई मिस्ट यूर, पता है कितने दिनों से किसी के भी साथ लड़ाई नहीं की थी मैंने
13:21और ना ही किसी से रिश्वत मिली मुझे
13:24क्या, हमें तो लगा था कि तेरी अकल ठीकाने आ गई है लेकिन तू तो अभी भी जैसे कि तैसी ही है
13:32माजी, पुरी बात तो सुनिये, हाँ ये सच ही कि मैं रिश्वत लिए मिना नहीं रह सकती
13:39लेकिन अपना मेरी रिश्वत बदल गई है
13:42अब मुझे हर काम के बदले चप्पी, अपनापन, प्यार और अपनी इस मा का दुलार चाहिए
13:51ये सब तो हम तुझे भर भर के दे सकते हैं बेटा
13:58पूरा घर एक साथ, अमरिता को जोर की चप्पी देता है
14:03और सब हस्ते, मुस्कराते, घर के अंदर चले जाते हैं
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