00:00मासुम्बहु घमंडी सास
00:02घमंडी और सक्त रिदैवाली पुश्म
00:05बानवे वर्षी अपनी सास विमला पर बहुत जुल्म करती थी
00:10ससुर की गुजर जाने के बाद से पुश्मा ने अपनी सास विमला का जानवरों से पर बहुत जुल्म
00:15उसे भी बत्तर हाल करतिया था वो उसकी गिंती घर की नौकरों में करती उसे पर बहुत जुल्म
00:20अलग थाली में खाना दीती रहने के लिए अलग छूटा सा कमरा ये सब जुल्म
00:25पुश्पा के पती आलो को बेहत दुख होता लेकिन में चाहा कर भी ना कुछ कहा है
00:30पाते ना कुछ कर पाते एक तरफ उसकी बानवे वर्षिय व्रिद्ध माति रहा है
00:35तो दूसरी तरफ उसकी धर्मपत्नी,
00:36वो करता भी तो क्या करता?
00:38वो और समन जसमें पढ़ गया,
00:40तबी एक दिन पुश्वा अपने पती आलोग से कहती है,
00:45जी, मैं सोच रही थी,
00:46क्यों न अपने बेटे राहूल की भी शादी करा दे?
00:50अधर का सारा काम मुझे अकेले करना पड़ता है,
00:52और वो बुढ़िया की देखरेक भी मुझे ही करनी पड़ती है,
00:55मुझे से नहीं होता यह सब,
00:57ठीक है, हम राहूल के लिए लड़काशा है,
01:00की देखना शुरू करता है,
01:01वासे भी आप उसके उम्र हो चुकी है,
01:05राहूल की शादी के बारे में सूच कर,
01:07मानी ही मन खुश होने लगती है,
01:09दरसल,
01:10पुश्पा अपने लिए एक ऐसी बहु की तलाश में है,
01:13जो गाई से भी ज्यादा स्वाशा है,
01:15और कोईल से भी ज्यादा मीठी हो,
01:18बहुत ढूनने और जाज़,
01:20परखने के बाद देवीका के साथ आखरकार उसकी तलाश पूरी होती है।
01:25वो देवीका को राहुर के लिए पसंद कर लेती है और एक अच्छा सा मुरत देख कर लेती है।
01:30उनकी शादी करा देती है।
01:32उंचे संसकार और सरल्स बभाव वाली देवीका के लेती है।
01:35वो देवीका ने ससुराल में पहले दिन से ही सब का दिल जीत लिया।
01:39वो रोजाना अच्छा के लेती है।
01:40अपने ससुराल में दिन की शुरुवात पूजा पाट से करती और सब का अच्छे से खयाल रखे।
01:45एक दिन देवीका सब के लिए डानिंग टेबल पर प्लेट लगाती है।
01:50लोग टिबल की पास आकर बैठ जाते हैं।
01:52देवीका अपनी दादी सास का भी हाथ पकड़ कर,
01:55उन्हें डानिंग टेबल पर बिठाती हैं।
01:57और उन्हें खाना परोज ही रही होती है कि पुश्पर लगाती है।
02:00पास उसे रोक लेती है।
02:01ठेहरो देवीका।
02:03क्या हुआ ममी जी।
02:05देवीका तुम इस घर में नहीं हो इसलिए शायद तुम्हें पता नहीं।
02:08तुम्हारी दादी सास के लिए तुम्हारी दादी सास के लिए।
02:10ये अलग ठाली है।
02:11वो इस ठाली में नहीं खाती।
02:13देवीका मुड़कर
02:15विमला के तरफ देखती है।
02:17और फिर अपनी सास पुश्पा से प्रश्ण करती है।
02:20लेकिन मम्मी जी रसोई में तो यही प्लेट थी।
02:24तुम यही ठेरो, मैं इनके लिए प्लेट लेकर आती हूँ।
02:28पुश्पा रसोई
02:29सोई में किसी कुड़े दान की तरह पड़ी
02:31प्लास्टिकी प्लेट लेकर आती है।
02:33और उसी में
02:34विमला के लिए खाना लगाती है जब ये सब देविका देखती है तो वो आश्यरे में पड़ जाती है
02:39और फॉरन उठकर रसोई घर से दूसरी प्लास्टिकी प्लेट भी ले आती है
02:44अरे बिटा ये दूसरी थाली तो किसके लिए लाई है
02:49देविका मा सुम्यत के साथ जवाब देती है
02:51आपके लिए मम्मी जी
02:54हाँ मेरे लिए पर क्यों
02:56मा जी जब आप
02:59अपने अपनी सास यानि मेरी दादी सास को प्लास्टिकी प्लेट में खाना लगाया
03:04तो मैं समझ गई कि ये जरूर आपकी घर की कोई परमपरा होगी
03:07इसलिए
03:09मैं आपके लिए भी ये प्लास्टिकी प्लेट ले आई
03:11अब आप अपनी सास के लिए
03:14इस प्लेट में खाना लगा दीजी और मैं अपनी सास के लिए इसमें खाना लगा दीती हूं
03:19देविका की बातों से पुष्पा हैरान हो जाती है
03:24तोच में पड़ जाती है कि वो अपनी बहुत देविका की मासुम्यत पर खुश्पा है
03:29या फिर उसकी नाज समझी पर दुखी इसी तरह दिन दुखेंगे
03:34बीटते चले जाते हैं और अब देविका की घर का महुल और सास का स्वभाव
03:39सब समझ में आने लगता है
03:40एक दिन सुबा पुष्पा अपनी साथ
03:44बास याने विमला को उसके कपड़े धूने के लिए कहती है
03:46और ये सब दूर से दुखेंगे
03:49देविका देख लेती है
03:50उसकी कुछी समय बाद देविका आती है
03:52और अपनी सास
03:54पुष्पा से कहती है
03:55मम्मी जी मैंने घर का सारा काम कर लिया है
03:59कपड़े बरतन जारू पूछा सब लगा लिया है
04:03अब मैं आपके आपके लिए पुष्पा
04:04के पैर दबा देती हूँ
04:05हारे लेकिन बेटा
04:07तुने कपड़े नहीं दो है
04:09मेरे कपड़े तो अंदर कमरे में ज्योंकेतियों पड़े है
04:11मैंने आपके कपड़े
04:14अपके नहीं दो है मम्मी जी
04:15आप जब दादी से बोल रही थी ना
04:17कि आज उन्हें आपके लिए पुष्पा
04:19अपने कपड़े खुद दोने होंगी
04:20तो मैंने सब सुन लिया था
04:22फिर मुझे लगा
04:24आज पूर्णी मा भी है
04:25इसलिए शायद ये आपके घर की कोई रस्म होगी
04:29तो मैंने आपके कपड़े भी नहीं दो ये मम्मी जी
04:34देवी का की बाते सुनकर पुष्पा अपना सर पकड़ लेती है
04:38और मन ही मन
04:39कहती है ये तो जरूरत से कुछ ज्यादा ही सीधी है
04:44अब क्या करूं मैं इसका
04:44इस बुढ़िया ने मुझे परिशान करके रख दिया है
04:49एक तरफ वो जरूरत से ज्यादा सीधी मेरी बहू
04:52जो मेरी हर हरकत को
04:54इस घर का रिवास समझ लेती है
04:56और दूसरी तरफ ये बुढ़िया
04:58जो जो फीजादा है
04:59रोज अपना बस्तर गंदा कर देती है आए बढ़िया अब कान करेगा
05:04ये बस्तर साफ बाहर से नौकर बुलाने पड़ेंगे क्या
05:07चाल जल्दी से अपना बस्तर साफ
05:09कर गंद मचा कर रखा है बहुँआ
05:14तवे सक्यों कर देती है
05:16मैंने देदा क्या बगरा
05:19बढ़िया बढ़िया बढ़िया बढ़िया
05:24नहीं कि तर तुमसाइट ने ना पराथ क्यों कर दिए
05:29तबी वहां आलोग देवी के लिए
05:34का और उसका पती आ जाता है
05:36क्या हुआ पुष्पा तो मा
05:39पर आज से क्यों चिल्ला रही हो
05:41अरे देखो ना अपनी मा को
05:43इस बढ़िया ने अपने बढ़िया
05:44बिस्तर का क्या हाल कर रखा है
05:46कितनी बद्बू आ रही है इस बिस्तर से
05:48किसी काम
05:49कि नहीं ये बढ़िया
05:50आप एक काम क्यों नहीं करते
05:52इस बढ़िया को व्रिद्धा
05:54हम क्यों नहीं छोड़ाते
05:55आलोक ये सुनकर
05:57परेशान हो जाता है
05:58वो मा
05:59अपनी माज से अपने गलतियों की
06:01माफी तो मांगता है
06:02लेकिन जुबान से कुछ नहीं बोलता है
06:04बहुए सम्मात कर बेटा
06:08तुचे
06:09किसे बलेगी
06:10मैं ठीक वैसे ही करूँगी
06:12मैं अभी इस बढ़िया
06:14मिस्तर को साफ कर देते हैं
06:16पर प्लीज
06:18मजे इस कर देते हैं
06:19इसे मत निकाल
06:21यह घर मेरे पती के आकरे निशान
06:24प्लीज
06:25मैं अपनी एंसे सास्ता कि सिगर मेरे नहीं
06:29प्लीज
06:29रहती है
06:30माजी
06:31दादी सास कब इस दिन मैं साफ कर दूँगी
06:34और अब से आपको कोई शिकायत का मौका भी नहीं दूँगी
06:37आप प्लीज दादी को व्रिद्धा
06:39मत बीजिए
06:40हाँ मा
06:41दादी को रहने दीजिये ना यहीं पर
06:43उनके बिना
06:44यह घर बिलकुल अच्छा नहीं लगीगा
06:46देखो बिटा इनका जाना जरूरी है
06:49अब इनकी उम्र हो चुकी है
06:51इसलिए आब इन्हें अपनी बाकी की जिन्दगी वहीं बितानी पर दो
06:54पड़ेगी
06:55इतने में देवी का वहाँ से चली जाती है
06:57और कुछ यह मिनिट बाद
06:59एक बड़ा सा बैग लेकर वहाँ पाँच जाती है
07:01देवी का के हाथ में बैग देकर सब अच्छम भी बिताए
07:04अरे देवी का तुम यह बैग कहां से लाई तुम कहीं जाती है
07:09मा जी ने अभी तो बोला थोड़ी दिर पहले कि आब उनकी साव
07:14पास बूरी हो चुकी है और उनकी असली जगा व्रिद्धाश्रम में ही है
07:18तो मैं यह दो
07:19दूसरा बैग उनकी लिए भी ले आई वो क्या है ना
07:22उम्रे तो अब ममी ची की भी हो चुकी है
07:24कल तो जाना ही है
07:26इससे अच्छा अभी चली जाएंगी
07:28तो दादी साथ
07:29आसको भी एक सहारा मिल जाएगा
07:31क्या
07:32क्यों बहुत मुझे व्रिद्धाश्रम
07:34बेज़ेगी
07:35है अपनी सास को
07:37ममी जी अगर
07:39आप इस परंपरा का पालन करेंगी
07:41तो मुझे भी तो इस परंपरा का पालन करना पड़ेगा ना
07:44मैं बिलकुल आप की तरह बनना चाहती हूँ
07:47मेरी माँ कहा करती थी
07:49सिसुराल में बिलकुल अपनी सास के नक्षे कदम पर ही चलना जैसे
07:54जैसा वो करें और जैसा वो रहे ठीक वैसा ही रहे ना
07:59तब ही मेरी कच्छी बहु बनने में कामियाब हो पाऊंगी ना सासुमा
08:04देवी का की ये बाते सुनकर पुष्पा की आँखों में आसु आ जाते हैं
08:08देवी का की..
08:09बातों में उसे मासुमित के साथ
08:11साथ आज बहुत सी चीज़े सुनाई देती है
08:14जो चीख चीख कर बताती है
08:16कि वो आज तक कितना गलत करते आई हैं
08:19बेटा तूने तो मेरी आखे खोल दी
08:24ससुर के देहान के बाद मैंने ना जाने
08:26अपनी सास पर कितने अत्याचार किये
08:29उन्हें कितना जलील किया खरी खोटी सुनाई
08:31आज अगर तू नहीं होती तो
08:34मुझे कभी अपनी गलतियों का एसास तक नहीं होता
08:39सही आपको अच्छे बुरे का एसास हुआ
08:41यही बहुत बड़ी बात है
08:42मम्मी जी
08:44तो अब आपके सामान का क्या करना है
08:47आरे जा जाकर इसमें
08:49मेरे कमरे में रखकर आजा
08:50अब कोई कहीं नहीं जाएगा
08:52सब यहीं
08:54साथ में रहेंगे
08:55बहु
08:56मुझे समझ में नहीं आ रहा
08:59मैं तेरा किन शब्दों में धन्यवाद को हूँ
09:01जो चीज तुन्हें दो दिन में पुरूँ
09:04पुष्पा को समझा दी
09:05वो मैं बरसों से कहने की हिम्मत तक ना कर सका
09:09पापा जी
09:10जरूरी नहीं कि हर बात कहे कर भी बताई जाए
09:14कभी कभी अपनी गलतियों का एहसास कराना भी जरूरी होता है
09:17और मैंने भी ममें पुरूरी होता है
09:19पुरूरी जी के साथ ठीक वैसा ही किया
09:20उन्हें उनकी गलतियों का एहसास कराया
09:24और देखी आज सब ठीक हो गया
09:26सच मैं देवी का
09:29तुमने आज हम सबको बहुत बड़ी सीखती है
09:31अब पुश्पा सुधर जादी
09:34और घर की पूरी जिम्मेदारी देवी का को साथ दीती है
09:37और अब उनका
09:39परिवार एक सुखी और सम्रिद परिवार की तरह रहने लगता है
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