00:00विकास एक बहुत महनती और शरीफ लड़का है।
00:04उसकी पतनी प्रिया और मागीता हर समय लड़ती रहती है।
00:08लेकिन वो बिचारा ना तो मा को समझा पाता है और ना ही पतनी को।
00:13उन दोनों की लड़ाई में नुकसान हमेशा विकास का ही होता है।
00:17एक दिए विकास ठका हारा ओफिस से घर लटा है।
00:47बस ये बता दो आप दोनों को पीनी है या नहीं।
00:51बेचारा विकास ठका हारा ओफिस से आया और चाय बनाने किचन में खुज गया।
00:57चाय बनाते बनाते वो सूचने लगा।
01:00क्या किस्मत है मेरे। कोई चाय तक पूछने वाला नहीं।
01:04ओफिस से ठके हारे आओ और खुज चाय बनाओ।
01:07ये बगवान ये दोनों कब सुधरेंगी।
01:11विकास चाय बना कर लिया आता है तीनों चाय पीते हैं।
01:14चाय पीकर प्रिया ने कहा।
01:16चाय तो बहुत अच्छी बनाई है आपने।
01:19मज़ा गया। आज बहुत दिनों बाद इतनी अच्छी चाय पी है।
01:24आँ देख ले ऐसे बनती है चाय।
01:27तेरी तरह नहीं पानी उबाल कर दे दिया बस।
01:31अरे कुछ सीख ले मेरे बेटे से।
01:33मैजी आप ही सीख लो ना कुछ।
01:37आप भी तो ऐसी चाय बनाती हो जैसे कोड़ा बना दिया हो।
01:41अरे अरे फिर से शुरू हो गई आप दोनों।
01:45मैंने चाय आप दोनों की लड़ाए खत्म करने के लिए बनाई थी।
01:48लेकिन आप दोनों किसी ना किसी तरह लड़ाई करने के बहाने ढोड़ी लेती हो।
01:53वैसर कल मैं अफिस नहीं जा रहा हूं।
01:57इसलिए आप दोनों से हाथ जोड़ कर कहता हूं कि कल घर में मुझे किसी तरह की कोई लड़ाई नहीं चाहिए।
02:02विकास ने अपनी पत्नी और मा को समझा तो दिया, लेकिन ऐसा सम्भवी नहीं था, कि उन दोनों में किसी बात को लेकर बहस ही ना हो, जैसे ही सुबह विकास की आँख खुली, तो घर में जंग हो रही थी, और आज उस जंग का विशेय था, कप्ड़ी कौन धुए का?
02:22मा, प्रिया, आप दोनों को कल समझाया था ना, कि लड़ाई नहीं लड़नी है, मैं अपने घर में एक दिन चैन से रहना चाता हूँ, ये बात क्यों नहीं समझ में आती आप दोनों को?
02:36अच्छे जी, मैं कहां लड़ रही हूँ, आपकी मा ही हर समय सर पर सवार रहती है, अगर ऐसे ही चलता रहना, तो मैं घर छोड़ दूँगी
02:45अरे तो चली जाना, तुझे रोका किसने है, तेरे जाने से मुझे और मेरे बेटे को थोड़ा चेन तो मिलेगा, और नहीं जा सकती ना तो बता दे, मैं ही ये घर छोड़ देती हूँ
02:56बस करो मा, अगर ऐसे ही चलता रहना, तो आप लोगों का पता नहीं, लेकिन मैं ये घर जरूर छोड़ दूँगा
03:04अब ये बताओ, लड़ाई किस बात पर हो रही है
03:07अरे मैं सुबह से किचिन में काम कर रही हूँ, और अभी तो फिर की खानी की भी तैयारी करनी है
03:12लेकिन माजी, मेरे पीछे पड़ी है, कपड़े दोले, कपड़े दोले
03:16अरे इतना ही बुरा लग रहा है, तो आप खुद धोलो ना
03:19जब मा और पतनी का जगड़ा हद से ज्यादा बढ़ गया, तो दुखी होकर विकास निकाहा
03:41चुप रहो आप दोनों, चुप रहो, मैं हूँ ना, आज मैं कपड़े दोओंगा, मा आप घर के सफाई करो
03:49और प्रिया जाओ तुम किचन में, खाना बनाओ
03:51बेचारा विकास, कपड़े दोने चला गया, कपड़े दोते हुए सूचने लगा
03:59विकास के दिन ऐसे ही बीद रहे थे, वो जब भी ऑफिस से घर आता या घर से ऑफिस जाता
04:23तो उसकी मा और पतनी लड़ना शुरू कर दीती
04:26उनकी लड़ाई को शान करने के लिए उसे कभी बरतन धोने पड़ते, तो कभी खाना बनाना पड़ता
04:32एक दिन, विकास आफिस में बहुत परिशान बैठा था, कि तभी उसका दोस्त, शियू उसके पास आया और बूला
04:40क्या हुआ विकास, आज तुम बहुत परिशान लग रहे हो, सब चीक तो है ना
04:46अरे क्या बताओ तुझे, क्या करेगा जानकर
04:50बता दे क्या बात है, क्या पता मैं तेरी कोई मददी कर दूँ
04:55शियू के बार-बार कहने पर विकास ने उसे सारी बात बता दी
04:59यार मेरे बीवी और माँ दोनों आपस में लड़ती रहती है
05:03उनके बीज लड़ाई ना हो, इसके लिए मैं उनके साथ घर का काम करवाता हूँ
05:08समझ में नहीं आता दोनों को कैसे समझाओ
05:10अगर दोनों मैंसे किसी से भी कुछ बोलता हूँ
05:13तो घर छोड़ने की धमकी देकर मुझे चुप करा देती है
05:16समस्या तो बहुत गंबीर है
05:20लेकिन इसका समाधान है मेरे पास
05:23अब तेरे घर में जब भी लड़ाई हो, तु मुझे बता देना
05:27बाकि मैं समाल लूँगा
05:28शिव ने विकास को सारी बातें समझा दी
05:32शाम को विकास घर पर पहुंचा तो वहाँ पहली सी ही लड़ाई का माहुल था
05:36क्या हूँ आमा, आज किस बात पर लड़ाई हो रही है
05:41तेरी काम चोर पतनी ने आज सुबह से बरतन नहीं दो है
05:45मैं बोल रही हूँ बरतन दोने के लिए तो मुझे से लड़ रही है
05:49और बेटा अब तू बिना मुझे से लड़ने मत लग जाना
05:52नहीं तो मैं घर छोड़ दूँगी हाँ
05:55प्रिया क्या है ये सब तुम क्यों मा से जगड रही हो
05:59अरे मुझे से क्यों पूछ रहे हो
06:01मैं तो दिन बर काम में लगी रहती हूँ
06:04अपनी मा से पूछो जब तक मुझे से लड़ नहीं लेती न
06:07इनके दिन की शुरुआत नहीं होती
06:09और अब अगर आपने ज्यादा सवाल जाब किया न
06:13तो मैं घर छोड़ दूँगी हाँ
06:15जब दोनों की लड़ाई हज से बढ़ गई
06:18तो विकास नहीं शिव को फोन किया
06:20शिव अपने साथ दो अर्तों को लिया आया
06:23आप दोनों हमेशा लड़ती क्यों रहती हो
06:26और आप दोनों को कुछ समझाओ तो समझ में नहीं आता
06:29और उपर से घर छोड़नी की धमकिया लगसे देती हो
06:31अब एक काम करो
06:33आप दोनों अपना अपना सामान उठाओ और निकलो यांसे
06:37मैं अपने लिए नई पत्नी और नई मा ले आया हूँ
06:40नई मा और नई पत्नी की बात सुनकर
06:44गीता और प्रिया हैरान हो गए
06:46गीता तुरंद बोली
06:48हाई हाई बेटा
06:49नई पत्नी तो लोगों को अक्सर लाते देखा है
06:53लेकिन ये नई मा कहा से ले आया
06:55बेटा मैं ही तेरी मा हूँ
06:58ओरिजनल
06:59आपने मुझे इतना बड़ा धोखा दिया
07:02आप दूसरी पत्नी ले आए
07:03आप तो प्यार के बहुत बड़े-बड़े दावे करती थे
07:07आज आपने मेरे साथ इतना बड़ा धोखा किया
07:10आप दोनों हर समय लड़ती रहती है
07:12और दोनों के साथ घर का काम
07:14मुझे करना पड़ता है
07:15उपर से आप दोनों हर समय घर छोड़ने की धमकी देती रहती हो
07:19और क्या करता मैं
07:21आप दोनोंने मेरे सामने कोई और रास्ता ही नहीं छोड़ा
07:24लेकिन ये दोनों बिल्कुल ऐसी नहीं है
07:27ये दोनों बहुत अच्छी हैं
07:29अपस मैं कभी नहीं लड़ती और तुम्हारा बहुत खयाल रखेंगी
07:32अब या तो तुम अपनी पुरानी मा और पत्नी से बोल दो कि ये घर छोड़ कर चली जाए
07:37या फिर तुम ये घर छोड़ दो
07:39तुम अपनी नई पत्नी और नई मा के साथ मेरे घर में रह सकते हो दोस्त
07:45जिब बहुत बोलने के बाद भी गीता और प्रिया घर छोड़ने के लिए तयार नहीं हुई
07:49तो विकास घर छोड़ कर जाने लगा
07:51विकास मेरे बच्चे
07:53बुड़ा पे मैं अपनी मा को छोड़ कर मत जा
07:56मैं तेरे बिना नहीं रह सकती
07:58आज के बाद मैं कभी भी बहुत से नहीं लड़ूंगी
08:02मुझे माफ कर दे मेरे बेटे
08:04मुझे भी माफ कर दो
08:06अब मैं कभी भी मां से या आप से घर का काम नहीं करवाऊंगी
08:10और नाई मैं लड़ूंगी
08:12हम सारी बात चीक है
08:14लेकिन ये जो आप दोनों बात बात पर घर छोड़ने की धमकी देती हो
08:19उसका क्या?
08:21प्रिया और गीता एक साथ बोल पड़ती है
08:23नहीं नहीं हम कभी घर छोड़ने की बात नहीं कहेंगे
08:27मा और पत्नी के इतना रोने पर विकास ने उन्हें माफ कर दिया
08:36और शिव उन दोनों ओरतों को वहाँ से लेकर चला गया
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