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Transcript
00:00लड़कों जैसी बेटी
00:01अमीत और सुश्मा की इक बेटी थी
00:03दिखने में बहुत सुन्दर
00:05और उसका नाम था रूपा
00:07उसकी सुन्दरता को देख कर ही
00:09सुश्मा ने उसका नाम रूपा रखा था
00:11लेकिन जैसे ही रूपा तीन साल की हुई
00:14और स्कूल जाने के लायक हुई
00:16अमेत के दिमाग में न जाने क्या सूजी
00:19कि उसने अपनी बेटी को लड़कों की तरह रखना शुरू कर दिया
00:23अमेत, क्यों इसे लड़कों की स्कूल में एडमिशन दिलवा कर आए हो
00:28तो क्या हो क्या, मेरी बेटी लड़की नहीं लड़कों की तरह बड़ी होगी
00:32लड़कों की तरह रहेगी तो मस्बूत बनेगी
00:35लड़कियों की तरह रहेगी तो जिंदगी बर कमजोर रह जाएगी
00:38अच्छे ठीक है लड़कों के स्कूल में एडमिशिन दिला दिया वहां तक तो सही है
00:43लेकिन आपने इसे स्कूल की ड्रेस भी लड़कों वाली दिलवाई है
00:47क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरी बेटी लड़कियों की तरह रहे
00:51सीधी सी बात है तुम्हें एक बार मैं समझ में नहीं आती क्या
00:54अगले दिन शाम के वैट
00:57अमित आज आप आफिस से जल्दी आ गया है न तो चली कुछ शॉपिंग करके आते हैं
01:02हाँ हाँ बताओ क्या चाहिए
01:03वो मुझे ना रूपा के लिए कुछ कपड़े खरीने थे और उसकी बर्ड़े भी आ रही है
01:08तो सोच रही थी एक अच्छा सा ड्रेस दिलवा देती हूँ
01:12चलो ठीक है हम साथ में चलता है
01:14अमित और सुश्मा एक शूरूम के अंदर पहांचते हैं
01:18आईए आईए भाई साब आईए बैन जी ये है लड़कों का सेक्षिन यहाँ पर आपको लड़कों के कपड़े मिलेंगे
01:24अरे भाई साब आपको गलत फैमी हुई है हमारी बेटा नहीं बेटी है
01:30लेकिन इसका हैरकट और कपड़े देखकर तो मुझे लगा आपका शायद बेटा होगा
01:36बिल्कुल लड़का है आई मिन लड़के जैसा दिख रहा है ना दिख रही है
01:41जी नहीं ये मेरी बेटी है और इसका नाम है रूपा
01:46इसका नाम दो रूपसी होना चीये था चलिए जैसी आपकी मर्जी वहां सामने की तरफ लड़कियों के कपड़े है
01:53अरे नई-नई मेरी पत्नी सही क्या रही है ये मेरा बेटा नहीं बेटी है लेकिन
01:59इसके कपड़े हमें लड़कियों वाले सेक्शन से नहीं, बल्कि लड़कों वाले सेक्शन से खरीदने है
02:04वो क्या है ना, मेरी बेटी नहीं
02:07यह तो मेरा बेटा है बेटा
02:08सही कहा आपने, इसका नाम दो मुझे रूपसी रखना चाहिए था
02:12आप फिर से शुरू हो गए
02:15आप समझते क्यों नहीं यह हमारी बेटी है
02:17और जिस तरह से आप इसे रख रहे हैं आगे चलकर बहुत परेशानी हो सकती है
02:22तुम क्यों नहीं समझते हैं
02:24लड़कों की तरह पलेगी बढ़ेगी तो आगे जाकर जो परेशानिया लड़कियों के सामने आती हैं वो इसके सामने नहीं आएगी
02:30इसे तरह से वक्त बीटता जाता है
02:34अब रूपा दसवी क्लास में आ जाती है एक दिन स्कुल में
02:38जानती है रूपा अपने साथ वो जो लड़का पढ़ता है ना अभी शेक मुझे बहुत पसंद करता है
02:44अच्छा क्या कहता है तुझसे
02:47मुझसे कह रहा था कि उसको ना मेरी लंबे बार बहुत पसंद है
02:52और उस दिन जो मैं रेड कुर्टा पैन कर आई थी ना
02:55मेरे बर्डे वाले दिन कह रहा था कि मैं उसमें बाद संदल लग रही थी
03:00लेकिन मुझसे तो कोई लड़का इस तरह की बाते करता ही नहीं
03:04कैसी करेगा तु तो खुद लड़कों जैसे नजर आती है
03:07हमेशा पैंट शोट पैन कर गुमती है
03:10और ये तेरे बाल लड़कों की तरह छोटे छोटे
03:12और ये तुझे देखकर तो पता ही नहीं चलता कि तु असल में लड़की है
03:16लेकिन ये तो बहुत गलत बात है ना
03:19मुझे भी लड़कियों की तरह रहना है
03:22मुझे भी सुन्दर दिखना है
03:23तो फिर तुम अपने पैल लंबे कर लो ना
03:26लड़कियों वाले कपड़े पहनना शुरू कर दे
03:29वैसे भी तुना बड़ी सुन्दर है
03:31अगर एक बाल लड़की बन गई ना
03:33तो कमाल की खुबसूरत लगीगी
03:34रूपा धीरे-धीरे
03:36खुद को लड़कियों की तरह
03:37मैसूस करने लगी थी
03:39वो अपने घर लोट कर आती है
03:40और अपनी मा से जाकर बात करती है
03:42मम्मी, मुझे आपसे बहुत शिगायत है
03:45आपने मेरा ये क्या हाल बना दिया है
03:48मुझे इस तरह लड़कों की तरह रखने की क्या जरूरत है
03:51क्या बात है बेटा, क्या हुआ
03:54तुम इतनी परेशान क्यों लग रही हो
03:56मेरी क्लास में पढ़ने वाली लड़कियां इतनी खुबसूरत दिखती है
04:00इतने अच्छे रंग भी रंगी कपड़े पहनती है
04:18लेकिन क्यों पापा, अगर मैं बेटी हूँ
04:22तो मुझे बेटी ही रहने देते ना
04:24लड़कियां गुडिया से खेलती है
04:25लेकिन आप मुझे कुली डंडा खिलवाते हो
04:28लड़कियां लंबे बाल रखती है
04:30आपने मेरे बाल छोटे-छोटे कटवा दिया है
04:32मुझे क्रिकेट किलना बिल्कुल पसंद नहीं है
04:34मुझे जूला जूलना पसंद है
04:36आप क्यों नहीं समझते पापा
04:38पेकार की बाते करने के ज़रूरत नहीं है
04:41मैं सब कुछ समझता हूँ
04:43और वैसे भी ऐसा तो नहीं है
04:45कि मैं तुम्हारे उपर खर्चा नहीं करता, अच्छे कपड़े नहीं दिलवाता, बस लड़कियों की जगा लड़कों के कपड़े दिलवाता हूँ, सारी चीजे लड़कों वाली दिलवाता हूँ, इसमें इतना परेशान होने की क्या ज़रुत है, देखिए न मा, पापा त
05:15जैसे मेरी सहलियों को करता है, बस इसलिए, इसलिए मैं नहीं चाता कि तुम लड़कियों की तरह बड़ी हो, और इसलिए मैंने तुम्हें लड़कों की तरह पाला ताकि आगे जाकर ये सारी समस्याइना है, लेकिन आपने अपनी बेटी के साथ गलत किया है, मैंने कुछ �
05:45रुपा अपनी मा के कमरे में जाती है, और वहाँ पर जाकर अपनी मा का मेकप अपनी चहरे पर लगा कर देखती है, ये देखकर सुश्मा बहुत इमोशनल हो जाती है.
05:54इतनी सुन्दर बेटी दी है मुझे भगवान ने
05:58लेकिन अमित की जित के चलते मैं अपनी बेटी को बेटी बना कर भी नहीं रख सकती
06:03कितने अर्मान थे मेरे कि उसके लंबे-लंबे बालों में देल लगाऊंगी
06:08उसकी चोटियां गुंज कर बनाऊंगी
06:10उसके लिए सुन्दर फ्रॉक और कुर्टे लेकर आऊंगी
06:14लेकिन अमित अपने जित के आगे किसी की चलने ही नहीं देते
06:17पता नहीं कब समझेंगे
06:20और पिर अगले दिन सुबह के बैग्ट
06:22अरे जानती हो सुश्मा आज किसका फोन आया था?
06:25किसका फोन आया था?
06:28बहुत खुश लग रहे हैं आप?
06:29बेरा बचपन का दोस्त है दीपक
06:31कॉलेज में साथ पड़ा करते थे
06:33उसके बाद तो कभी मिलना ही नहीं हुआ
06:35किसी काम से अपने फैमिली के साथ
06:37हमारे शेहर में आया हुआ है
06:38अरे वाँ, ये तो बहुत इच्छी बात है
06:41तो आप उन्हें घर पर क्यों नहीं बुला लेते हैं आज शाम को?
06:45डिनर पर बुला लीजी
06:45उनकी फैमिली और हम सब आपस में मिलेंगे तो बहुत मज़ा आएगा
06:49मैं भी तुम्हें यही कहने आया था
06:52कि मैं उसे इन्वाइट कर चुका हूँ
06:53शाम को अच्छा सा खाना बना लेना
06:56वो अपनी पत्मी और बच्चों के साथ आएगे
06:58अच्छा, तो उनका बेटा है या बेटी?
07:03यह तो मैं भी नहीं जानदा
07:04कहा ना, कॉलेज के बात कभी मिला ही नहीं उससे
07:07और वैसे भी शाम को जब आएगा
07:09तब सब कुछ पता चल ही जाएगा
07:10शाम को दीपक अपने बच्चों के साथ
07:13अमित के घर आता है
07:14दीपक की बहुत खुबसरत दो बेटियां थी
07:17दिया और सोनियां जो लगबग रूपा की उम्र की ही थी
07:22दीपक की पत्नी शाली नी भी बहुत सुन्दर और सुशी लौरत थी
07:26सुश्मा कैसी हो अरे वाह तुम्हारा बेटा तो बड़ा प्यारा है
07:31अरे नहीं नहीं बेटा नहीं बेटी है
07:35बेटी लेकिन इसे देख कर तो लगता ही नहीं कि यह लड़की है
07:41हाँ भावी जी देखिये न हमारी भी दो बेटियां है दिया और सुन्या
07:46बहुत प्यारी है जी आपकी बेटिया
07:48मम्मी देखिये न दिया और सुन्या ने कितने सुन्दर है स्टाइल बनाई है
07:53और इनकी फ्रॉग कितनी अच्छी है
07:55क्या मैं इनकी तरह नहीं रह सकती
07:57तुम अपनी ममी से ऐसे क्यों पूछ रही हो बिटा
08:01तुम लड़की हो तुम अफकोर्स इस तरह रह सकती हो
08:04क्या जरूरते तुम इस तरह लड़कों की तरह बन कर रहने की
08:08नई भाई मैंने इसे शुरू से ऐसे ही पाल पोस्कर बढ़ा किया है एक डम लड़कों की तरह और जानते हो मेरी बेटी कमाल का क्रिकेट खिलती है
08:19लेकिन हमें तो उसकी बातों से लगता है कि उसे लड़कियों की तरह रहना पसंद है
08:24हाँ भाई सहब दीपक ठीक कह रहे हैं आज आप हमारी बेटियों को ही देखिए
08:31मेरी बेटी दिया बहुत अच्छा क्रिकेट खिलती है और सुनिया कबड़ी की चेंपियन है
08:36इतनी कम उमर में अपने स्कुल की कबड़ी टीम की कैप्टन है वो
08:40लेकिन इन दोनों को स्ट्रॉंग बनाने के लिए मैंने उनके साथ वो सब नहीं किया जो
08:46आपने अपनी रूपा के साथ किया है
08:49लेकिन मैंने गलत क्या किया? मैंने अपनी बेटी को सारी फैसिलिटिस प्रोवाइड करवाई है उसे सब कुछ दिया है जो वो चाहती है
09:10उसे बेटा समझ कर देते हैं वो बेटी समझ कर भी तो दे सकते थे ना? लेकिन उससे क्या फरक पड़ता है? मैंने उसके लाड़ प्यान में कोई कम ही नहीं रखी
09:20तुमारी बात सही है दोस्त लेकिन उसके अंदर की लड़की को मार कर उसकी इच्छाओं को खत्म करके तुम ने उसके साथ बहुत गलत किया है
09:29तुम उसे स्ट्रॉंग बनाना चाहते थे बोल्ड बनाना चाहते थे तो वो तो वो लड़की बन कर भी रह सकती थी
09:36जरब पूछो अपनी बेटी से कि वो क्या चाहती है ठीक है तुम्हारे सामने ही पूछ लेता हूं मुझे नहीं लगता कि मेरी बेटी को लड़कीों की तरह रहना मेकप करना वगरा पसंद होगा
09:48यही तो आपने कभी समझने की कोशिश नहीं किया मित मैंने भी दो दिन पहले ही देखा था हमारी बेटी मेरे मेकप को चेहरे पर लगा कर अपने आपको आईने में निहार रही थी
10:01आप भी कुछ नहीं बिगड़ा आमित
10:03आप चाहे तो हमें हमारी रूपा वापस मेल सकती है
10:06हमें उसे रूप सीम बनाने की कोई ज़रूत नहीं पड़ेगी
10:10देखो, ये लोग कुछ भी कहे
10:13मुझे तुम्हारी मरसी जाननी है पिटा
10:16तुम्हें भी ऐसे ही रहना पसंद है न
10:18एकड़म बोल्ड, स्ट्रॉंग, लड़कों की तरह कपड़े पहन कर
10:21छोटे-छोटे बाल रखकर
10:22सॉरी पापा, आपने कभी इस बात को समझा ही नहीं
10:27मुझे लड़कियों की तरह रहना है
10:29और रही बात बिगड़ने की, लड़कों के साथ घूमने की
10:33तो वो तो अगर मैं चाहूं तो इस तरह से भी कर सकती हो न
10:36लेकिन मैं नहीं करना चाहती
10:39बस मुझे आपकी बेटी बन कर रहना है
10:41स्कूल के सारे लड़के मुझे रूप सिंग कह कर चड़ाते हैं
10:45मैं लड़की हूँ, ये बात वो जानते हैं
10:48और इसलिए ना वो मुझे पूरी तरह अपने साथ रखते हैं
10:51और ना ही मैं पूरी तरह से अपनी सहलियों के साथ रह सकती हूँ
10:54क्योंकि जब मैं लड़कीों से बात करती हूँ
10:57तो वो मुझे से कहती है
10:58कि उन्हें मेरे अंदर से लड़कों जिसी फीलिंग आती है
11:01इसलिए मेरा कोई दोस्ती नहीं बनता
11:04फ्लीज पापा, मुझे लड़की ही रहने दीजिए
11:07वागई मैं, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई
11:11मुझे अपनी बेटी से उसकी बेटी होने का हक नहीं छिनना चाहिए था
11:16अच्छा हुआ दीपक और शालीनी, आप लोगों ने मुझे ये बात समझा दी
11:21मैं बहुत बड़ी गलती कर बैठा था
11:24लेकिन आज के बाद मेरी बेटी, बेटीयों की तरह कपड़े पहनेगी
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