00:00रोहित कुमार का सवाल है।
00:30प्रक्रति तुमको बांध कर रखना चाहती है, अच्छा वो तुमने पूछ लिया, तो उससे बहतर तरीका कहने का ये है कि तुम प्रक्रति से बंधे-बंधे रहना चाहते हो, ये को दाहरन इसका उपयोग में पहले भी कर चुका हूँ, पर सुंदर रूपक है, इसलिए उस
01:00तो प्रक्रति मा है, तुम बच्चे हो उसके, तो प्रक्रति ने तुम्हे जन्म दिया है, प्रक्रति ने तुम्हे ये देह दी है, इस हद तक तुम प्रक्रति से जुड़े हुए हो,
01:23और आरंभ में प्रक्रति से तुम्हारा जुडाओ लाजमी है
01:35हो नहीं था
01:36कहते हर छोटे बच्चे का अपनी माँ से जुडाओ होता है शुरुगात में
01:39लेकिन प्रक्रति एक अच्छी माँ है
01:45उसने तुमको वो सारे आजार दिये है
01:52उपकरण दिये हैं जिनके माध्यम से तुम एक स्वस्थ युवक बन सकते हो
02:03बड़े हो सकते हो
02:05अब यह तुम्हारे उपर है कि तुम प्रक्रति माँ द्वारा दी गई क्षमताओं का इस्तेमाल करते हो या नहीं करते हो
02:17अकसर लोग नहीं करते हैं क्यों नहीं करते हैं वज़ा है
02:24प्रक्रति के द्वारा दी गई क्षमताओं का इस्तेमाल अगर तुम करोगे
02:32तो तुम्हें प्रक्रति से दूर जाना पड़ेगा और प्रक्रति की गोद से दूर जाना
02:41हमें डरा देता है क्योंकि हम उसी गोद में पैदा हुए हैं वहां हमें सुरक्षा की अनुभूते होती है
02:48जैसे एक घर है उसमें मा है घर क्या है मानलोग संसार है वो घर है जो यह भूत एक संसार दिखाई देता है वो घर है
03:06और उसमें माँ है, माँ कौन है? प्रक्रति है
03:10और तुम कौन हो? तुम बच्चे हो
03:12अब जब तक तुम बच्चे हो तब तक तो प्रक्रति तुम्हारा पालन पोशन कर रही है
03:18लेकिन प्रक्रति भहुत अच्छे से पालन पोशन करती है
03:21उसने तुमको बुद्धी दिये
03:23तुम मनुश्य हो
03:25और उसने तुमको एक चेतना दिये
03:28जो समझ सकती है
03:31जो मुक्त हो सकती है
03:36उसने तुमको इसब दिया है
03:37अब उसके बाद
03:40ये निर्णे तुमको करना होता है
03:42कि जो तुमको सब उपहार
03:46मिले हैं प्रकृतिसे
03:47जो औजार मिले हैं प्रक्रतिसे
03:49उनका इस्तिमाल करके
03:51तुम घर से बाहर निकल करके
03:53आकाश
03:55पूरा उड़ोगे
03:57या घर की
03:59चार दिवारों की सुरक्षा में
04:01ही कैद रह जाओगे
04:02तुम जो भी फैसला करो
04:05प्रक्रत ये तुमारे
04:07फैसले का सम्मान करती है
04:09भई होते हैं न कई ऐसे पूत
04:11वो तीस साल के हो जाएं चालिस साल के हो जाएं
04:15तो भी मा की गोद में ही घुसे रहते हैं
04:18तो माई उनको लात मार के
04:19निकाल थोड़ी देती है यह निकाल देती है
04:21तुम्हारी उमर बहुत बढ़ गई लेकिन तुम अभी भी
04:25अपने पुष्ट्यानी घर में ही घुसे हुए हो
04:28मा का आचल छोड़ी नहीं रहे
04:30तुम मा इतनी निर्मम तो नहीं हो जाने वाली कि
04:35मा काईगी चल निकल जाए यहां से निकल जाए यहां से
04:37तुम अगर मा का पल्लू पकड़के बैठे हो
04:40तुम मा काईगी ठीक है बैठा रहे भाई
04:42हालनकि मा को भी निराशा रहेगी तुमसे
04:44लेकिन फिर भी हो तुमको रोटी पानी देती रहेगी
04:48जैसे कि इस देश के बहुत सारे नौजवानों को
04:5130 का 40 का होकर भी घर पे रोटी पानी मिलता रहता है
04:54वो कुछ नहीं करते बसो मा का पल्लू पोड़ घर बैठे हुए
04:57लेकिन ये तो सोचो कि मा की इच्छा क्या है
05:03मा की इच्छा क्या है
05:05वो प्रकट हो जाती है
05:08मा ने तुमको जो भेट दिये हैं जो उपहार दिये हैं उससे
05:11अगर मैं तुमको उपहार में एक कलम दूँ तो मेरी इच्छा क्या है बताओ
05:18कि तुम लिखो
05:19मैं तुमको उपहार में एक तलवार दूँ तो मेरी इच्छा क्या है बताओ
05:23कि तुम लड़ो
05:24तो प्रकृति ने तुम्हें जो उपहार दिये हैं
05:27तुम्हारी मा ने तुम्हें जो उपहार दिये हैं
05:29उसी से तुम समझ लो कि मा की इच्छा क्या है तुमसे
05:32प्रकृति ने तुम्हें उपहार किस चीज का दिया है
05:34खास उपहार दिया, जो सिर्फ मनुश्य को दिया है, जानवरों को नहीं दिया है, क्या उपहार दिया है, बुद्ध का और बोध का, चेतना की उचाई का, समझदारी का,
05:44तो मा नहीं उपहार दे दिये हैं
05:49पर हम मेंसे ज़्यादातर लोग इतने नलायक बेटे होते हैं
05:51कि मा ने जो उपहार दिये हैं
05:52उनका हम कोई इस्तिमाल करते नहीं
05:54हम कहते हैं मम्मी मम्मी
05:56मैं तो यहीं पर पला लओंगा
05:59मुझे कहीं नहीं जाना
06:02तो हमें से जाधातर लोग प्रक्रति से ही जीवन पर चिपके रह जाते हैं
06:05प्रक्रति से चिपकने का क्या अर्थ हुआ
06:07कि यही जो घर है न संसार इसकी इस चीज से चिपक गए
06:13इस चीज से चिपक गए इस चीज से चिपक गए
06:15छोटा बच्चा होता है, उसके सामने जो ही कुछ लाओ वो
06:19हाथ बढ़ा देता है, ँसे पकड़ लेता है
06:20हमें जाधतर लोग ऐसे होते हैं हम
06:22पूरा जीवन बिटा देते हैं बस चीज curl को पकड़ने में
06:25जिस्तीस से डरना नहीं चाहिए, उससे डर
06:27यहां उन्हेक, एसे छोटाबच्छा, एसे छोटाबच्चा, किसी ढाड़ेवाले खुद देखा, इसमेरो ना शुरु कर दिया, वैसे हम होते हैं, जिस जीसे गदुर ना नहीं तुम्हाइ घरशित हो जाते हैं, जहां गुसना नहीं, पहां गुस जाते हैं, действiãy gli 아래ल छोटे
06:57समझ पर आ रहे हैं ये बात
07:00हम ये करते रह जाते हैं
07:04ये हमारी जन्रगी की कुल कहानी है
07:07टक्रती थी हमें देख करके
07:09ऐसे मासा पीटती है
07:10कि ये कैसा पैदा हो गया
07:12ये कैसा पैदा हो गया
07:16जितनी मैंने इसको
07:19नियामते बक्षी थी
07:21जितनी मैंने इसको भेटे दी थी
07:24इसने सब बरबाद कर डाली
07:26कुछ इस्तिमाल नहीं किया
07:28इसको
07:31कलम दी थी एक नई कहानी
07:34लिखने के लिए
07:35और इक कलम नाक में डाला करता है अपनी
07:37या उसे कान खुजाता है
07:40इसको तलवार दी थी
07:46असली
07:48दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए
07:51और ये तलवार ले करके
07:52सड़क के पिल्लों को दोड़ा रहा था कल
07:54हमने प्रकृति द्वारा
08:00दिये गए उपहारों का
08:03ऐसे ही तो इस्तिमाल किया है
08:04प्रकृतिन तो बुद्धी की भेट दी थी ना
08:07तुमने बुद्धी से क्या किया तुमने
08:09सारे जंगल काट डाले नदिया खराब कर दी
08:12पहाड़ गंदे कर दिये
08:13वही बोल रहा है उन्हों तलवार ले करके
08:16पिल्ले दोड़ा रहे हो
08:18अब पिल्ले कुकु कुकु करके भाग रहे हैं
08:21और तुम्हारे पास एक जबरदस तलवार
08:22उस तलवार क्या नाम है?
08:24बुद्ध, प्रग्या
08:25और तुम उसका इस्तिमाल पिल्लों को मारने के लिए कर रहे हो
08:27वो तलवार तुमको दी गई थी
08:29शडरिपु का संगहार करने के लिए
08:30तुम मान को मारो
08:33तुम मद को मारो, माया को मारो
08:34मातसर्य को मारो, मोह को मारो
08:36उसके लिए तुम पिल्ले मार रहे हो
08:38और प्रक्रत देख रही है और ऐसे बैठी हुई है
08:43कि यह देखो, यह क्या पैदा हो गया?
08:47समझ़ए हारी है बात?
08:51तो यह चुनाव तुम्हे करना है
08:53दोश प्रक्रति पर मट डाल देना
08:55ये चुनाव तुम्हें करना है
08:57कि तुम्हें जो कुछ मिला है प्रक्रति से
08:59तुम उसका उपयोग किसलिए करोगे
09:01तुम्हें उसका उपयोग करना है
09:03प्रक्रति से ही आगे जाने के लिए
09:04जैसे मा के लिए बड़ी खुशी की बात होती है
09:07कि जिस गाउं में वो रहती थी
09:10पढ़्डिक करके उसका बेटा उस गाउं से आगे कहीं दूर किसी उची जगह पर चला गया
09:16वैसे ही प्रकृति चाहती है कि तुम भी अपनी बुद्ध का इस्तेमाल करके
09:22अपनी शम्ता अपनी चेतना का इस्तेमाल करके प्रकृति से ही आगे निकल जाओ
09:26प्रकृति से आगे निकलने क्या मतलब हुआ कि तुम चिपको नहीं अब प्रकृति की चीजों से
09:31तुम्हारी जेतना मुक्त मांगती है
09:34किस से इनी सब चीजों से जो प्रक्रते हम पाई जाती है
09:37तो एक और तो प्रक्रते ने तुम्हें जनम दिया है
09:39दूसरी और उसी प्रक्रते से तुम्हें आगे निकल जाना है
09:42यही उस जनम की सार्थकता है
09:44ठीक बात समझ में आ गई
09:45प्रक्रती ने ही तुम्हें जन्म दिया है
09:47लेकिन ये जो जन्म दात्री
09:50प्रक्रती है ये स्वयम भी यही चाहती है
09:52कि
09:52तुम जन्म ले करके
09:55अपनी मां से आगे निकल जाओ
09:58चिपको नहीं मां से
10:00मां की खुशी इसमें नहीं है
10:02कि 40 साल का पूत भी
10:04चिपका हुआया करके
10:07और पल्लू में मुदिये हुए है
10:08मां की खुशी किसमें है
10:09कि पूत निकल करके
10:12दुनिया पे राज कर रहा है
10:14दुनिया पे राज करो
10:16दुनिया पे राज करने का क्या मतलब होता है
10:18बुद्ध पुरुष सब कुछ छोड़ कर फिर साधना के लिए निकले थे जैसे सिदार्थु गौतम या महावीर अगर महलों की हर सुख सुविधा ने उन्हें सार में उन्हें सार दिखना बंद हो गया था तो बाद में उन्हें साधना किस चीज की करनी पड़ी
10:43ऐसा नहीं किसार दिखना बंद हो गया था इतना समझ में आने लगा था बस कि जो वो जानना चाहते हैं जो छुपा हुआ है
10:55वो महल के भीतर रहते रहते तो प्रकट या उद्गाटित नहीं होने वाला
11:00महल के बाहर क्या होगा ये वो नहीं जानते थे
11:04पर इतना उनको पश्ट हो गया था कि महल के भीतर घुटन है
11:08जैसे कि तुम एक धुमें वाले कमरे में फस जाओ
11:12जो ही दर्वाजा सामने दिखता है उसको खोल करके भागते हो नो बाहर
11:17अब बाहर क्या मिलेगा तुम बहुत साफ साफ जानते नहीं पर भीतर रहा नहीं जाता
11:22इस तरीके से उन्होंने ग्रहते आग किया था
11:26यह दिखने लगा था कि भीतर है जो कुछ छटपटा रहा है मुक्ति के लिए ग्यान के लिए
11:35और वो मुक्ति और वो ग्यान राज महल में और ग्रहस्थी में संभव होता दिखनी रहा
11:42अचारे जी कुछ लोग अध्यात्म की और नैचरली लिखा है
11:50inclined होते हैं तो क्या प्रकर्टी यानि मा ने कुछ लोगों को ऐसा special gift दिया है
11:58नहीं ऐसा कुछ नहीं है ऐसा कुछ भी नहीं है कि कुछ लोग कोई खास भेंट लेकर के पैदा हुए है
12:10तुम कह रहे हो कि कुछ लोग spiritually inclined होते हैं
12:17कुछ लोग किसी दूसरी तरफ तो inclined होते हैं न
12:19जो जिधर को भी inclined है तलाश उस inclination में मुक्तिकोही रहा है
12:24inclination का मतलब होता है desire
12:26ठीक है
12:29कुछ लोग तुमने कहा अध्यात्म की और जुके होते हैं
12:34दूसरे लोग मानलो किसी और दिशा में जुके हैं कोई पैसे की और जुका है कोई शराब की और जुका है
12:38को जिधर को भी जुका है मांग वही चीज रहा है
12:42जो ये व्यक्ति मांग रहा है जो तथा कथित तौर पर अध्यात्म की और जुका है
12:45अध्यात्मिक हर व्यक्ति जन्म से ही होता है
12:48बस अध्यात्मिक साधना तुम करोगे या नहीं करोगे
12:52कीमत चुकाओगे या नहीं मेहनत करोगे या नहीं
12:54ये चुनाओ तुमको करना होता है
12:57तड़प और प्यास तो सब में होती है
13:00बचपन से होती है, पैदा होते से ही होती है
13:02ये निर्ड़े करना तुम्हारे हाथ में है
13:06कि तुम्हें उप्यास बुझानी है या नहीं बुझानी है
13:09अपने आप से प्रेम हो तो उस प्यास को बुझा लो
13:13नहीं तो अपने आपको और तड़ पाओ
13:16तुम्हें लगी हो प्यास पानी की
13:19और उस दशा में तुम्हारा इंक्लिनेशन
13:23मने जुकाओ शराब की और हो जाए
13:25तो देख लो क्या होता है
13:28पहले ही प्यासे थे शराब और पी लोगे
13:30गला, पेट
13:32पूरा तुम्हारा जिस्म
13:36आग की तरह जलेगा
13:37हमेंसे लोग ऐसे ही हैं जादा तर
13:41ऐसी दिशाओं में जुके हुए हैं
13:45जो दिशाएं हमें वो नहीं दे सकती
13:48जो हमें उस दिशा से चाहिए
13:49तो चाहिए तो सबको एक ही चीज
13:52पर तलाशते उसको
13:54गलत गलत जगों पे हैं
13:56और अगर तुम्हारा सवाल लिए
14:02कि क्या कुछ लोग ऐसे होते हैं जो प्राक्रतिक रूप से सही जगह ही तलाशने पहुंच जाते हैं, तो ना, सही जगह कभी तुमको यूहीं संयोग वश नहीं मिल जानी है, वो तो दाम दे करके पानी पड़ती है, जो ही पैदा हुआ है, उसका जुकाव किसी ने किसी अं�
14:32था कथित रूप से अध्यात्मिक भी, तुम्हें धीरे धीरे अपनी सब दिशाओं को, उन दिशाओं की और तुम्हारे जुकावों को हटाना पड़ेगा, नकारना पड़ेगा, यही अध्यात्म है, अध्यात्म किसी एक तरफ के विशेश जुकाव का नाम नहीं है, अध
15:02की और जुका हुआ हो उसे धंदौलत वासना तिरोहित करनी पड़ेगी और जो आदमी कहता हो कि अध्यात्म की और जुका हुआ है उसे अपना अध्यात्म तिरोहित करना पड़ेगा
15:15कि समझ मैं आ रही बात
15:32कि समझ कर taller, कि समय और जुका है
15:40किज आ, कि और जुका हुआ होाुर मैं डिरी और जुका हुआ है
15:42कि और हज़ेगा का आ जुका है
15:47कि आ वे भोग benत ूनुका है
15:53कि आ जुका है
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