00:00आपने कहा कि प्रक्धी भी मिट्टी है, करता भी मिट्टी है, तो इस मिट्टी के खेल के बीच में ये एक creativity का स्पार्क के लिजे, अंदर से के लिजे, कहां से आता है, and how is it that all great artists that we know are so distinct in their style?
00:15मिट्टी तो सब कुछ है, पर ये मिट्टी है, ये मानने को तयार थोड़ी है कि ये मिट्टी है, तो वो बात जिसने समझी, जिसने जानी, उसने कह दी, कि इधर भी मिट्टी, उधर भी मिट्टी, पर हम सब जो खड़े हुए हैं, हम तो अपने आपको कुछ और ही मानते हैं
00:45और मानने के कारण हमने मिट्टी से जो कुछ भी बना है, खड़ा हुआ है, उसमें आगी लगा दिये, अब अगर जो चल रहा है, उसे आपको सच मुझ फर्क पड़ता है, तो वहां से फिर वो शब्द आ जाता है, जो आपने भी कोट किया, इनेविटेबल, आपको दर्द हो
01:15कुछ छुपाए करेंगे न, जहां सफरिंग होगी, वहां से आतवाप फटना चाहेंगे, या उसके मूल कारण पर पहुचना चाहेंगे,
01:28So there is an inevitability about our revolution towards suffering and all that which is needless, वही जब दिखाई देने लग जाता है, क्या है जिन्दगी में जो नहीं होना चाहिए,
01:45और जिन्दगी माने सिर्फ मेरी जिन्दगी नहीं है, लाइफ as a whole, टोटल लाइफ, तो फिर वहां से वो inevitable और spontaneous flow निकलता है, जो फिर अच्छी writing के रोप में हमारे सामने आता है.
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