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वीडियो जानकारी:

प्रसंग:


संगीत: मिलिंद दाते
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Transcript
00:00बुद्ध के पास वो इस्त्री आई थी ना जिसका बच्चा मर गया था वो इस्त्री आई रो रही है महात्मा बुद्ध के पास आई बोली बच्चा वापस चाहिए वो अंधविश्वास का जमाना था वैदिक विवस्था पूरी भरष्ट हो चुकी थी अंधविश्वास मे
00:30रस आ जाता है, कि मरने में क्या होता है, जीवात्मा कब भागती है, मुर्दे को जिन्दा कर सकते हैं क्या, तो बुद्ध के पास इसी उमीद से आई होगी, इस्त्री को ऐसा लग रहा है जैसे मौत कोई नई घटना घट गई है, उसका पहला बच्चा रहा होगा, उसने पहल
01:00जहां कभी कोई मृत्य न हुई हो, जा करके कुछ समगरी है वो ले आओ, बस ऐसे घर से लाना, जहां कभी कोई न मराओ, महिला को मीद जट गई बोली बस अभी तुरंत लेके आते हैं, बच्चा वापस मिल लाएगा, बाबा चमतकारी हैं, तो लगी घूमने घर-घर पू
01:30जहां जा सकती थी हर जगे, कि इस घर में कभी कोई मृत, सब ने यही का हुई है, वापस आई बुद्ध के पास, बात समझ गई थी, चमतकार हो गया थी, बच्चा जीवित नहीं हुआ, श्त्री मुक्त हो गई, यही चमतकार होता है
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