00:00साइंस भी एक पॉइंट पे बहुत बड़े-बड़े साइंटिस आके बोलते हैं कि भीया कोई होना चाहिए आइंस्टैन उन में से एक्जांपल था न्यूटन था लेकिन अब जैसे सूपर्सिशन की बात है साइंस की लोग साइंस का साहर लेकर मजभ़ों को गाली देना अल
00:30लेकिन आप इसके बड़ क्या सोचते हैं कि एथीजम कि इस दिश्चा में जा रहे हैं?
00:34आस्तिक होना एक बात है, इश्वरवादी होना दूसरी बात है, आस्तिक होना माने वो जो सत्य परायन है, जो टुथ लविंग है, वो आस्तिक है, इश्वरवादी माने वो दूसरी चीज होती है, हम सब अच्छे से जानते हैं कि ग्रीक गॉड्स होते थे, आप बाइबल को ह
01:04और उसके बाद जो इसाई गॉड है, जो जीजस, न्यू टेस्टमेन वाला, उनमें इतना अंतर है इतना अंतर है उसी अंतर के कारण, मुलता है, जीजस के साथ जो हुआ, वो हुआ, क्योंकि जीजस कोई छोटा मोटा अंतर नहीं लेके आ रहे थे, वो तो केंदरी बदले द
01:34Unforgiving, माफी मांगते रहो, माफी मांगते रहो, हाँ, और जीजस का जो गॉड है, जीजस उससे ऐसे बात करते हैं कि पापा, माफ कर देना न, ये मुझे मारे दे रहे हैं पर तब भी इन्हें छोड़ दो, ये बैचारे अंजान है, इग्नोरेंट है, इन्हें छोड़ दो, �
02:04अगर गॉड की दो इतनी अलग-अलग अउधारणाएं हो सकती हैं, इसका मतलब दुनिया के हर क्षेत्र में, हर काल में, मनुष्य ने अपने मुताबिक गॉड रचे हैं, पर टुथ को मनुष्य नहीं रच सकता, और ध्यार्मिक होने का अर्थ होता है, सत्य के प्रते नि�
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