00:00सुप्रीम कोट में एक सुनवाई के दोरान जो महौल बना, उसने अचानक पूरे देश में चर्चा छेड़ दी.
00:06आम तोर पर कोट की कारवाई गंभीर और संतुलित मानी जाती है, लेकिन इस बार CGI सूर्यकांत की टिपणी ने
00:14बहस को नया मोर दे दिया.
00:15एक याचिका पर सुनवाई के दोरान, जब एक वकील सीनियर एडवोकेट का दरजा पाने की कोशिश कर रहा था, तब
00:22कोट ने उसकी दलीलों और व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई.
00:26इसी सुनवाई के दोरान, CGI सूर्यकांत ने समाज और सिस्टम पर टिपणी करते हुए, कुछ युवाओं के लिए बेहत तीखी
00:34भाषा का इस्तमाल किया.
00:35उन्होंने कहा कि कुछ युवा ऐसे होते हैं, जिन्हें रोजगार नहीं मिल पाता, और वे अलग-अलग रास्तों पर चले
00:42जाते हैं.
00:42उनके अनुसार कुछ मीडिया में, कुछ सोशल मीडिया में और कुछ RTI आक्टिविस्ट बन कर सिस्टम पर सवाल उठाने लगते
00:50हैं.
00:51इसी संदर्भ में उन्होंने एक तुलना करते हुए कौक्रोच जैसा शब्द इस्तिमाल किया, जिससे विवाद खड़ा हो गया.
00:58ये टिपणी सुनते ही कोट रूम का माहौल गंभीर हो गया.
01:02कई लोगों को ये भाशा कठोर लगी, जबकि कोट का तर्क था कि ये टिपणी उस मानसिक्ता पर थी, जो
01:08व्यवस्था को लगातार चुनौती देती है और बिना जिम्मिदारी के हमले करती है.
01:13लेकिन बाहर आते ही, ये बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, और अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने
01:19आने लगी.
01:20सुनवाई के दौरान मामला केवल टिपणी तक सीमित नहीं था.
01:24बेंच उस वकील के आचरण से भी नाराज दिखी, जो सीनियर एडवोकेट बनने की कोशिश कर रहा था.
01:30कोर्ट ने साफ कहा कि सीनियर एडवोकेट का दरजा कोई स्टेटस सिंबल नहीं है, जिसे हासिल करने के लिए हर
01:37तरीका अपनाया जाए.
01:38ये एक जिम्मेदारी है, जो व्यक्ती के काम और व्यवहार पर आधारित होती है.
01:43CGI सूरेकांत ने ये भी सवाल उठाया, कि क्या ये सही है कि कोई व्यक्ती लगातार उस पद की और
01:49भागे और अपने आचरण को नजर अंदाज कर दे.
01:52उन्होंने ये संकेत दिया, कि कोट में पेशेवर इमानदारी और आचरण सबसे एहम होते हैं.
01:58इस पूरे मामले में जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही, वो थी युवाओं और मीडिया को लेकर की गई
02:04टिपणी.
02:05कुछ लोगों ने इसे बेरोजगारी और सामाजिक दबाव से जोड कर देखा, तो कुछ ने इसे व्यवस्था की आलोचना करने
02:12वालों पर टिपणी माना.
02:13सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई कि क्या इस तरह की भाषा अदालत जैसी जगह पर इस्तिमाल होनी चाहिए
02:20या नहीं.
02:20दूसरी तरफ कुछ लोगों का मानना है कि कोट का उद्देश किसी वर्ग को नीचा दिखाना नहीं था, बल्कि उन
02:27प्रवृत्तियों पर टिपणी करना था, जो बिना जिम्मेदारी के सिस्टम पर लगातार हमला करती हैं.
02:33इस पूरे घटना करम ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि न्याय पालिका में दिये गए
02:38शब्दों की व्याख्या समाज में कैसे की जाती है. एक तरफ अदालत का अनुशासन है और उसकी नाराजगी है, तो
02:46दूसरी तरफ समाज की समवेदन शीलता और प्रति
03:03आप खूँ कर एक दोस्व्झेस और नाराजगी है और इस और लिए नाराजगी है. एक बार नाराजगी है, तो दूसरी
03:08नाराजगी है.
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