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Supreme Court में हुई एक सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की टिप्पणी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एक याचिका पर सुनवाई के समय सीनियर एडवोकेट के दर्जे को लेकर बहस के बीच कोर्ट की नाराजगी सामने आई, जिसके बाद युवाओं, मीडिया और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को लेकर की गई टिप्पणी चर्चा में आ गई। “कॉकरोच” शब्द के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इस वीडियो में जानिए पूरी घटना क्या थी, कोर्ट में क्या कहा गया, और क्यों यह मामला इतना बड़ा विवाद बन गया है। पूरी रिपोर्ट देखें और पूरा सच समझें।

A Supreme Court hearing has triggered a major controversy after remarks by CJI Surya Kant during a case involving the designation of a Senior Advocate. The court’s strong observations on professional conduct, along with comments referencing unemployed youth, media, and social media activists, have sparked widespread debate. The use of the term “cockroach” in context has particularly drawn strong reactions online. In this video, we explain what exactly happened inside the courtroom, the full context of the remarks, and why this incident has become a national talking point. Watch the complete report for detailed analysis and latest updates.

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Transcript
00:00सुप्रीम कोट में एक सुनवाई के दोरान जो महौल बना, उसने अचानक पूरे देश में चर्चा छेड़ दी.
00:06आम तोर पर कोट की कारवाई गंभीर और संतुलित मानी जाती है, लेकिन इस बार CGI सूर्यकांत की टिपणी ने
00:14बहस को नया मोर दे दिया.
00:15एक याचिका पर सुनवाई के दोरान, जब एक वकील सीनियर एडवोकेट का दरजा पाने की कोशिश कर रहा था, तब
00:22कोट ने उसकी दलीलों और व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई.
00:26इसी सुनवाई के दोरान, CGI सूर्यकांत ने समाज और सिस्टम पर टिपणी करते हुए, कुछ युवाओं के लिए बेहत तीखी
00:34भाषा का इस्तमाल किया.
00:35उन्होंने कहा कि कुछ युवा ऐसे होते हैं, जिन्हें रोजगार नहीं मिल पाता, और वे अलग-अलग रास्तों पर चले
00:42जाते हैं.
00:42उनके अनुसार कुछ मीडिया में, कुछ सोशल मीडिया में और कुछ RTI आक्टिविस्ट बन कर सिस्टम पर सवाल उठाने लगते
00:50हैं.
00:51इसी संदर्भ में उन्होंने एक तुलना करते हुए कौक्रोच जैसा शब्द इस्तिमाल किया, जिससे विवाद खड़ा हो गया.
00:58ये टिपणी सुनते ही कोट रूम का माहौल गंभीर हो गया.
01:02कई लोगों को ये भाशा कठोर लगी, जबकि कोट का तर्क था कि ये टिपणी उस मानसिक्ता पर थी, जो
01:08व्यवस्था को लगातार चुनौती देती है और बिना जिम्मिदारी के हमले करती है.
01:13लेकिन बाहर आते ही, ये बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, और अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने
01:19आने लगी.
01:20सुनवाई के दौरान मामला केवल टिपणी तक सीमित नहीं था.
01:24बेंच उस वकील के आचरण से भी नाराज दिखी, जो सीनियर एडवोकेट बनने की कोशिश कर रहा था.
01:30कोर्ट ने साफ कहा कि सीनियर एडवोकेट का दरजा कोई स्टेटस सिंबल नहीं है, जिसे हासिल करने के लिए हर
01:37तरीका अपनाया जाए.
01:38ये एक जिम्मेदारी है, जो व्यक्ती के काम और व्यवहार पर आधारित होती है.
01:43CGI सूरेकांत ने ये भी सवाल उठाया, कि क्या ये सही है कि कोई व्यक्ती लगातार उस पद की और
01:49भागे और अपने आचरण को नजर अंदाज कर दे.
01:52उन्होंने ये संकेत दिया, कि कोट में पेशेवर इमानदारी और आचरण सबसे एहम होते हैं.
01:58इस पूरे मामले में जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही, वो थी युवाओं और मीडिया को लेकर की गई
02:04टिपणी.
02:05कुछ लोगों ने इसे बेरोजगारी और सामाजिक दबाव से जोड कर देखा, तो कुछ ने इसे व्यवस्था की आलोचना करने
02:12वालों पर टिपणी माना.
02:13सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई कि क्या इस तरह की भाषा अदालत जैसी जगह पर इस्तिमाल होनी चाहिए
02:20या नहीं.
02:20दूसरी तरफ कुछ लोगों का मानना है कि कोट का उद्देश किसी वर्ग को नीचा दिखाना नहीं था, बल्कि उन
02:27प्रवृत्तियों पर टिपणी करना था, जो बिना जिम्मेदारी के सिस्टम पर लगातार हमला करती हैं.
02:33इस पूरे घटना करम ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि न्याय पालिका में दिये गए
02:38शब्दों की व्याख्या समाज में कैसे की जाती है. एक तरफ अदालत का अनुशासन है और उसकी नाराजगी है, तो
02:46दूसरी तरफ समाज की समवेदन शीलता और प्रति
03:03आप खूँ कर एक दोस्व्झेस और नाराजगी है और इस और लिए नाराजगी है. एक बार नाराजगी है, तो दूसरी
03:08नाराजगी है.
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