00:00एक बार की बात है, रामू और शामू नाम के दो मित्र थे.
00:07रामू स्वभाव से आलसी और काम चोड़ था.
00:10वो हर वक्त कोई काम करने या महनद करने से पीछे हटता था.
00:15रामू की माा अक्सर उसे डांटती रहती.
00:17अरे कलमुहे कुछ काम कर ले, कब तक घर पर दिन भर बैठा मुफ्त की रोटिया तोड़ेगा, जब देखो सोता रहता है निकम्मा
00:26अरे मा क्यों सारा दिन मुझ पर चलाती रहती हो, काल लोंगा काम, अभी तो मेरी सोने और खाने पीने क्यों मर है
00:36ये बोलके रामु गुसे में पैर पड़कते हुए घर से बाहर जाने लगा, तब ही शामु आ गया और बोला
00:43अरे दोस्त, इतने गुसे में कहा भाग रहे हो, रुको रुको
00:48अरे शम्बू, मा सारा दिन बोलती रहती है, काम कर, काम कर, काश ऐसा हो, मुझे कोई काम ना करना पड़े
00:57बहुस आराम से बैठ कर खाने को मिलता रहे, फिर तो जन्दगी के मज़े ही मज़े है
01:04ये खयाली पुलाओ बनाना छोड़ो, और मुझे किसी काम से दूसरे शहर जाना है, तुम भी साथ चलो, इसी बहाने थोड़ा मन भी भहल जाएगा
01:14चल या शम्बू, इसी बहाने मा की डाट से कुछ देर के लिए बच जाऊंगा
01:19अब दोनों शहर की ओर रवाना हो गए, चलते चलते शामू ने बोला
01:25दोस्त रामू, थोड़ी देर यहां रुपकर विश्राम कर लेते हैं, वैसे भी रात हो चुकी है
01:31दोनों वहीं एक पेड़ के नीचे बैठ गए, रामू की नजर पेड़ की टहनी पर कुछ चमकती हुई चीज़ पर पड़ी, उसने बोला
01:40शामू, ये क्या चमक रहा है? आओ देखें क्या है?
01:47अरे दोस्त रहने दो, पता नहीं क्या है, हम यहां से चलते हैं
01:52तुम भी खा मखा डड़ते हो, एक बार पेड़ पर चड़ कर देखें तो सही, आकिर है क्या?
01:59दोनों जैसे ही पेड़ पर चड़ने लगे, तभी उन्हें एक आवाज आई
02:04रुको
02:05एक महात्मा, जो वहीं नस्देक विश्राम कर रहे थे, उन्होंने दोनों को रुका, और बोला
02:12ये रोश्नी उस जादुई घर से आ रही है, जो उस पेड़ के पीछे बना है
02:18रामु ने जब पेड़ की और देखा, तो हैरान हो गया
02:22जादुई घर, अब ये क्या है, और इसमें इतनी रोश्नी क्यूं है
02:28इस घर की एक खासियत है, इसमें रहने वाले व्यक्ती को कोई भी काम नहीं करना पड़ता
02:34और ना ही कोई मेहनत करनी पड़ती है, बस आराम से बैठ कर खाओ और सो जाओ
02:39इस घर में अपने आप सब कुछ पस्तित हो जाता है, और वो भी बिना परिश्रम के
02:45रामो की आखों में एक चमक सी दोड़ गई, और वो बोला
02:49सच में महराजी, इस घर में रहने वाले व्यक्ती को कोई मेहनत का काम नहीं करना पड़ता
02:57हाँ, बिल्कुल ऐसा ही है इस चादूई घर में
03:00रामो ने मनी मन सोचा, काश इस घर में रहने को मिल जाए, फिर तो आराम की ही जिन्दगी गुजरे
03:08ना कोई मेहनत करनी पड़े, और ना रोज-रोज मा के ताने सुनने को मिले
03:14रामो महत्मा जी से बोला
03:17महत्मा जी, अगर मुझे इस घर में रहने को मिल जाए, तो आपकी बड़ी कृपा होगी
03:24हाँ, रह सकते हो, पर इसके लिए तुम्हें एक बात याद रखनी होगी
03:29यदि तुमने एक बार इस जादोई घर में प्रवेश कर लिया, तो फिर मेरे बुलाए बिना तुम कभी बाहर नहीं आ सकते
03:36अब रामो सोचने लगा की
03:39मुझे तो बस मेहनत करने से बचना है, ऐसे आलिशान जादोई घर को छोड़ कर कौन आना चाहेगा, जहां सब कुछ अपने आप मिल जाता है
03:50दोस्त, ये तुम क्या सोच रहे हो, चलो चलते हैं यहां से, देर हो रही है
03:55तुम जाओ, मैं अब इसी जादोई घर में रहूंगा
04:00रामो जादोई घर में जाने लगा, उसने शामू की एक न सुनी, शामू क्या करता, वहां से मायूस होकर चला गया
04:08चमकते जादोई घर को देखकर, रामो दंग रहे गया
04:12जैसे ही उसने घर के भीतर प्रवेश किया, घर का दरवासा बंध हो गया
04:19रामो बहुत खुश था, उसने सोचा
04:22बहुत थक गया हूँ, अब कुछ खाने को मगवाता हूँ
04:27मुझे भूक लगी है, कुछ खाने को दो
04:30धेर सारे पकवान रामो के सामने लग गये
04:33रामो इतने देर सारे पकवान देखकर खुशी से चिलाया
04:37इतने सारे पकवान और वो भी बैठे बैठे
04:41अब आएगा ना जिन्दगी का मज़ा
04:44भोजन करने के पश्चात रामो ने सोचा
04:47थोड़ी देर सो जाता हूँ, बहुत नींदा रही है
04:52रामो सो गया, कुछ देर बाद वो सो कर उठा
04:57और फिर कुछ खाने के लिए मंगवाने लगा
05:00फिर उसके आगे धेर सारे पकवान आ गए
05:03कोच दिनों तक ऐसे ही चलता रहा
05:05रामो जो मांगता, जादूई घर में उसे वही खाने को मिल जाता
05:10अब धीरे धीरे रामो उबने लगा
05:12क्यूंकि उसके पास खाने और सोने के अलावा
05:16कोच करने को था ही नहीं
05:18उसी एक घर में खाओ और सो जाओ
05:20उसको समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें
05:24पर ये उसके खुद की इच्छा थी
05:26कि उसे ऐसी जिंदगी मिले
05:28जहां मेहनत करें बिना सब कुछ मिल जाए
05:30पर कब तक आप बिना हाथ पेर हिलाए
05:33बिना पसीना बहाए
05:35कोई काम किये बिना बैठ कर खा सकते हों
05:38रामो जोर-जोर से चिलाने लगा
05:41भातमा जी मुझे इस घर में नहीं रहना
05:44मुझे यहां से बाहर जाना है
05:46मैं मेहनत करके कमा कर खालूंगा
05:49पर यहां तो मैं पागल हो जाऊंगा
05:51मा, मेरा मित्र शम्भू कोई भी नहीं है
05:55मुझे उनके साथ ही रहना है
05:57मात्मा जी, मुझे वापिस भेश दो
06:00वापिस भेश दो मुझे मात्मा जी
06:02चिलाते हुए अचानक से रामू को आवाज आई
06:06अरे निकठ्थू उट्चा सूरज सर पर चढ़ाया है
06:09कोई काम ढून ले
06:10अपने मित्र शम्भू से कुछ सीख ले
06:13वो कितनी मेनत करता है
06:15रामू टपक से उठा और घबराया हुआ बोला
06:18मा तुम मैं जादूई घर से बाहर आ गया
06:22या फिर कोई सपना देख रहा था
06:25रामू को समझा गया था
06:27कि बिना मेनत किये जीवन बेकार है
06:30शिक्षा हमें हमेशा परिश्रम करते रहना चाहिए
06:34क्योंकि परिश्रम का फल सदेव मीठा होता है
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