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100% US Tariff को लेकर India और America के बीच नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी संसद में पास हुए नए बिल के बाद Russia से oil और gas खरीदने वाले देशों पर 100% तक tariff लगाने का रास्ता खुला है। India के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि Russian Oil उसकी energy supply का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। Trump Tariff के दबाव के बीच India ने कहा है कि वह अपने trade और economic interests की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। इस वीडियो में समझिए US Tariff on India, India Russia Oil, Trump Tariff, US Sanctions और India-US Trade से जुड़ी पूरी कहानी।

The 100% US Tariff threat has raised fresh questions over India’s Russian oil imports and its trade relationship with the United States. A new US bill could allow the Trump administration to impose tariffs of up to 100% on countries that continue buying Russian oil and gas. India is closely watching the developments and has said it will take necessary steps to protect its trade and economic interests. With Russian crude remaining an important part of India’s energy supply, the issue could have wider implications for energy security and global trade. Watch the full video for the latest India-US-Russia oil developments.

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~HT.410~PR.540~ED.542~GR.508~VG.HM~

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Transcript
00:00अमेरिका ने रूस से तेल खरिदने वाले देशों पर 100 फिजदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोल दिया है।
00:06अब नजर भारत पर है लेकिन भारत ने भी साफ कर दिया है कि उसकी उर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों
00:12से समझोता नहीं होगा।
00:14कहानी शुरू होती है अमेरिकी संसद से। 16 सेतंबर को अमेरिकी संसद ने रूस और इरान पर नए प्रतिबंधों से
00:21जुड़ा एक बड़ा बिल पास किया।
00:23इस बिल में अमेरिकी राष्टपती को रूस से तेल और गैस खरिदने वाले बड़े देशों पर 100 फिज़दी तक टैरिफ
00:30लगाने का अधिकार का प्रावधान है यानि ये अधिकार अब राष्टपती को मिल चुका है।
00:35बिल पहले ही अमेरिकी सेनेट से पास हो चुका था और अब इसे राष्टपती डोनाल ट्रम के पास भेजा गया
00:42है।
01:05कि वो इस कानून के संभावित असर से निपटने के लिए देश के व्यापार और उद्दोग संगठनों के साथ मिल
01:12कर काम करेगा।
01:14अब सवाल है कि अमेरिका की चिंता आखिर भारत तक क्यों पहुँच रही है।
01:19इसकी सबसे बड़ी वजा है रूसी कच्चा तेल।
01:22पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक एहम शरोत बन गया है।
01:28रूस से मिलने वाला तेल कई बार दूसरे स्रोतों की मुकाबले कम कीमत पर उपलब दरहा है।
01:34ऐसे में भारतीय रिफाइनरियोक ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है।
01:39भारत के लिए मामला सिर्फ रूस से तेल खरीदने का नहीं है।
01:42इसके पीछे देश की उर्जा सुरक्षा भी जुड़ी हुई है।
01:46भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्जा बाजारों में से एक है।
01:50करोणों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर उद्योग, परिवहन और बिजली तक हर जगह तेल और गैस की जरूरत
01:57है।
01:57इसलिए विदेश मंत्राले ने कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की उर्जा सुरक्षा को प्राथमिक ताद देता रहेगा
02:06और अलग अलग सुरोतों से उर्जा हासिल करता रहेगा।
02:10मंत्राले ने ये भी कहा कि खरीद के फैसले बदलते बाजार हालात को भी ध्यान में रख कर लिये जाएंगे।
02:17यानि भारत का संदेश ये है कि किसी एक देश पर निर्भर रहने की बजाए वो अलग-अलग सुरोतों से
02:24उर्जा हासिल करने की नीथ पर कायम रहेगा।
02:27लेकिन अमेरिका के ने कानून का असर सिर्फ टेल की खरीद तक सीमित नहीं रह सकता अगर भविश्य में भारत
02:34जैसे बड़े खरिदार पर सो फिजदी तक अत्रिक्ट अमेरिकी टेरिफ लगाया जाता है तो इसका असर भारत अमेरिका व्यापार पर
02:42भी पढ़ सकता है।
02:57भारत ने दुपक्षिय संबंधों और वैश्रिक उर्जा बाजार पर पढ़ने वाले संभावित प्रभाव को भी सामने रखा है। अब आगे
03:05की नजर अमेरिकी राष्टपती के फैसले पर है। कॉंग्रेस से बिलपास हो चुका है लेकिन इसके बाद क्या कदम उठाया
03:11
03:12ये अभी तय होना बाकी है। अगर राष्टपती टरंप इसे कानून का रूप देते हैं और भारत पर इसका इस्तिमाल
03:19होता है तो नई दिल्ली के सामने उर्जा, सुरक्षा और व्यापारिक हितों के बीज संतुलन बनाने की चुनौती होगी। लेकिन
03:27अभी भारत ने अ�
03:41खरीत को लेकर फैसला करेगा। इसलिए असली कहानी सिर्फ सव फिजदी टैरिफ की धंकी की नहीं है। असली सवाल ये
03:48है कि अगर अमेरिका इस कानून का इस्तिमाल करता है तो भारत अपनी उर्जा जरूर्तों, रूसी तेल की खरीद और
03:55अमेरिका के साथ व्यापारिक र
04:05रिष्टों की दिशा ट्रै करने वाला है।
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