00:00अमेरिका ने रूस से तेल खरिदने वाले देशों पर 100 फिजदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोल दिया है।
00:06अब नजर भारत पर है लेकिन भारत ने भी साफ कर दिया है कि उसकी उर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों
00:12से समझोता नहीं होगा।
00:14कहानी शुरू होती है अमेरिकी संसद से। 16 सेतंबर को अमेरिकी संसद ने रूस और इरान पर नए प्रतिबंधों से
00:21जुड़ा एक बड़ा बिल पास किया।
00:23इस बिल में अमेरिकी राष्टपती को रूस से तेल और गैस खरिदने वाले बड़े देशों पर 100 फिज़दी तक टैरिफ
00:30लगाने का अधिकार का प्रावधान है यानि ये अधिकार अब राष्टपती को मिल चुका है।
00:35बिल पहले ही अमेरिकी सेनेट से पास हो चुका था और अब इसे राष्टपती डोनाल ट्रम के पास भेजा गया
00:42है।
01:05कि वो इस कानून के संभावित असर से निपटने के लिए देश के व्यापार और उद्दोग संगठनों के साथ मिल
01:12कर काम करेगा।
01:14अब सवाल है कि अमेरिका की चिंता आखिर भारत तक क्यों पहुँच रही है।
01:19इसकी सबसे बड़ी वजा है रूसी कच्चा तेल।
01:22पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक एहम शरोत बन गया है।
01:28रूस से मिलने वाला तेल कई बार दूसरे स्रोतों की मुकाबले कम कीमत पर उपलब दरहा है।
01:34ऐसे में भारतीय रिफाइनरियोक ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है।
01:39भारत के लिए मामला सिर्फ रूस से तेल खरीदने का नहीं है।
01:42इसके पीछे देश की उर्जा सुरक्षा भी जुड़ी हुई है।
01:46भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्जा बाजारों में से एक है।
01:50करोणों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर उद्योग, परिवहन और बिजली तक हर जगह तेल और गैस की जरूरत
01:57है।
01:57इसलिए विदेश मंत्राले ने कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की उर्जा सुरक्षा को प्राथमिक ताद देता रहेगा
02:06और अलग अलग सुरोतों से उर्जा हासिल करता रहेगा।
02:10मंत्राले ने ये भी कहा कि खरीद के फैसले बदलते बाजार हालात को भी ध्यान में रख कर लिये जाएंगे।
02:17यानि भारत का संदेश ये है कि किसी एक देश पर निर्भर रहने की बजाए वो अलग-अलग सुरोतों से
02:24उर्जा हासिल करने की नीथ पर कायम रहेगा।
02:27लेकिन अमेरिका के ने कानून का असर सिर्फ टेल की खरीद तक सीमित नहीं रह सकता अगर भविश्य में भारत
02:34जैसे बड़े खरिदार पर सो फिजदी तक अत्रिक्ट अमेरिकी टेरिफ लगाया जाता है तो इसका असर भारत अमेरिका व्यापार पर
02:42भी पढ़ सकता है।
02:57भारत ने दुपक्षिय संबंधों और वैश्रिक उर्जा बाजार पर पढ़ने वाले संभावित प्रभाव को भी सामने रखा है। अब आगे
03:05की नजर अमेरिकी राष्टपती के फैसले पर है। कॉंग्रेस से बिलपास हो चुका है लेकिन इसके बाद क्या कदम उठाया
03:11�
03:12ये अभी तय होना बाकी है। अगर राष्टपती टरंप इसे कानून का रूप देते हैं और भारत पर इसका इस्तिमाल
03:19होता है तो नई दिल्ली के सामने उर्जा, सुरक्षा और व्यापारिक हितों के बीज संतुलन बनाने की चुनौती होगी। लेकिन
03:27अभी भारत ने अ�
03:41खरीत को लेकर फैसला करेगा। इसलिए असली कहानी सिर्फ सव फिजदी टैरिफ की धंकी की नहीं है। असली सवाल ये
03:48है कि अगर अमेरिका इस कानून का इस्तिमाल करता है तो भारत अपनी उर्जा जरूर्तों, रूसी तेल की खरीद और
03:55अमेरिका के साथ व्यापारिक र
04:05रिष्टों की दिशा ट्रै करने वाला है।
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