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देश में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट और संभावित शुल्कों को लेकर इस समय देश की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे सीधा यूपीआई टैक्स करार दिया है। राहुल गांधी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी कंपनियों और विदेशी दबाव के आगे झुककर यह फैसला लिया है। उनका कहना है कि दो हजार रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाले इस शुल्क से आम जनता की जेब पर भारी बोझ बढ़ने वाला है। सरकार और वित्त मंत्रालय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह कोई टैक्स नहीं बल्कि इकोसिस्टम को मजबूत करने का माध्यम है। हैरानी की बात यह है कि जिस यूपीआई चार्ज को लेकर कांग्रेस पार्टी आज आक्रामक तेवर दिखा रही है, उसकी परतें खोलने पर एक अलग ही सच्चाई सामने आई है। संसद की फाइनेंस पर बनी स्टैंडिंग कमेटी में कांग्रेस के अपने वरिष्ठ सांसद भी शामिल थे जिन्होंने इस वित्तीय मॉडल का समर्थन किया था। इस कमेटी की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया था कि यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए एक तयशुदा रेवेन्यू मेकैनिज्म बहुत जरूरी है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस का विरोध सिर्फ राजनीतिक स्टंट है या फिर उनका दोहरा चरित्र जनता के सामने आ गया है। इस पूरे वीडियो में हम इसी सियासी ड्रामे और इसके पीछे छिपे असली सच की पूरी गहराई से विश्लेषण करने वाले हैं।
A massive political firestorm has erupted across India following the introduction of a new framework involving merchant discount rates and transaction charges on specific UPI payments. Leader of Opposition Rahul Gandhi launched a fierce attack on the central government, terming the move a hidden UPI tax and accusing the administration of succumbing to American pressure. Gandhi claimed that allowing charges on merchant transactions above two thousand rupees will ultimately squeeze common citizens and benefit foreign payment firms. Meanwhile, the government and the finance ministry strongly defended the decision, clarifying that the charges are neither a tax nor collected by the government, ensuring zero impact on regular person-to-person transfers. However, a shocking twist in the tale emerged when records showed that senior Congress MPs were part of the parliamentary standing committee that actually emphasized the need for a viable revenue framework to sustain digital payments. This glaring contradiction has raised serious questions about whether the ongoing Congress opposition is a genuine public concern or merely a calculated political maneuver. Critics are now pointing out that the policy framework being vocally opposed today had tacit backing from the party's own members in legislative committees. This video deeply investigates the entire controversy, uncovering the hidden realities and political double standards governing India's digital payment ecosystem today.

#UPICharge #RahulGandhi #UPITax #ModiGovernment #IndianPolitics #DigitalPayments #CongressPlan #UPINews

~HT.178~PR.512~ED.348~GR.508~VG.HM~

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Transcript
00:00क्या UPI transactions पर लगने वाले charges को लेकर जो बवाल मचा है वो सिरफ एक सियासी ड्रामा है
00:06क्या जिसे आज राहूल गांदी American दबाव और देश के साथ धोका बता रहे हैं
00:12उसके पीछे खुद Congress Party की अपनी ही राह और उनके senior नेताओं की मोहर शामिल थी
00:19आज की इस कहानी में हम इस पूरे मामले की तह तक जाएंगे
00:23हम समझेंगे कि कैसे अचानक से digital payments, merchant discount rate यानी MDR और 2000 रुपे से उपर के transactions
00:32पर
00:32ये सियासी बवाल क्यों शुरू हो गया और सबसे बड़ा सवाल ये कि अगर ये plan पहले से ही parliamentary
00:39panel का हिस्सा था
00:41जिसमें Congress के बड़े नेता शामिल थे तो आज इस पर इतनी आग क्यों लग रही है
00:47आईए शुरू करते हैं इस पूरे सियासी किस्से की गहराई में उतरना और समझते हैं कि क्या है पूरा माजरा
00:54कुछ दिन पहले जब सरकार की तरफ से एक खबर आई कि 2000 उपे से उपर के UPI payments पर
00:59merchant charges यानि एक sustainable revenue model पर विचार किया जा रहा है
01:05तो देश की राजनीती में भूचाल आ गया ओपोजिशन के बड़े नेता और लोगसभा में लीडर ओफ ओपोजिशन राहुल गांदी
01:12ने इस फैसले पर आकरमन करते हुए कहा
01:14कि सरकार ने आम जनता और छोटे व्यापारियों की जेप पर डाका डाला है राहुल गांदी का आरोप था कि
01:22ये सब अमेरिका के दबाव में किया जा रहा है और इसका फाइदा विदेशी payment companies को पहुँचाया जा रहा
01:29है
01:29उन्होंने इसे सीधे तोर पर एक नया UPIA टाक्स ही बता दिया लेकिन जैसे ही राहुल गांदी का ये बयान
01:37आया वैसे ही दिल्ली की सियासी गलियारों में ब्यूरोक्राटिक सर्कल्स में एक ऐसी खबर बहार आई जिसने पूरे रुख को
01:45ही बदल दिया
01:46सरकार के एक सीनियर फंक्शनरी ने सामने आकर एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया जिसने कॉंग्रेस पार्टी को खटगेरे में
01:53खड़ा किया है
01:54उन्होंने सीधा सवाल पूचा कि आकर राहुल गांधी उस चीज़ का विरोध क्यों कर रहे हैं जिस पर उनकी अपनी
02:00पार्टी के सीनियर नेताओं ने सालों पहले और पार्लिमेंटरी पैनल के अंदर अपनी पूरी सहमती दी थी
02:06यहीं पर इस कहानी का सबसे दिल्चस्प मोडाता है आये जानते हैं कि आखिर परदे के पीछे कहानी चल क्या
02:13रही है जब हम पार्लिमेंट की स्टैंडिंग कमिटी और फाइनांस की रिपोर्ट को देखते हैं जिसे बीजेपी की एमपी भरत्रुहारी
02:20महतब हैड कर रही थ
02:36उसमें कॉंग्रेस के कई दिगत सांसत भी मौझूद थे इनमें देश के फॉर्म और फाइनांस मिनिस्टर पीछ दामरम शामिल थे
02:43यूपी ए गवर्मेंट में मंत्री रहे मनीश तेवारी शामिल थे इसके अलावा गौरफ गुगोई किशोरी लाल और के गोपिनाथ जैस
03:05पर कोई डिसेंट या विरोध दर्ज नहीं करवाया था सब ने चुप चाप इस फाइनांशिल मॉडल और टायर्ड MDR श्रक्चर
03:13की जरूरत को समझा और उस पर अपनी सहमती दी थी अब सवाल ये उठता है कि अगर कमिटी के
03:18अंदर कॉंग्रेस के निताओं ने इस रिवे
03:33पाजनीती का एक नया हतियार इस पूरे विवाद का दूसरा पहलू ये है कि डिजिटल पेमेंट्स का ये पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर
03:41इतना बड़ा हो चुका है कि इसको चलाने के लिए हजारों करोड रुपे की लागत आती है कमिटी की रिपोर्ट
03:48खुद इस बात पर
03:49चिंता जाहिर कर चुकी है कि डिजिटल ट्रांजाक्शन को मेंटेन करने के लिए जो कॉस्ट आती है वो लगभग 20
03:56,700 करोड रुपे के आसपास है जबकि इसके मुकाबले जो बजट अलोकेशन मिलता है वो सिरफ 2,000 करोड रुपे
04:03का है ये जो 18,000 करोड से जादा का financial mismatch है
04:08इसको लेकर bank और payment gateways लगातार सरकार से गुहार लगा रहे थे कि अगर digital payments को देश में
04:16बिना किसी रुकावट के इसी तरह चलाना है तो एक viable revenue model बना नहीं होगा बरना आने वाले समय
04:23में system पर बोज़ पढ़ सकता है या फिर service डाउन हो सकती है
04:27सरकार और finance ministry का ये साफ कहना है कि ये जो charges है गो आम व्यक्ति या दो लोगों
04:33के बीच होने वाले person to person transactions पर बिलकुल नहीं लगेंगे
04:39ये सिरफ उन बड़े merchants या commercial transactions पर हैं जो 2000 रुपे से उपर है ताकि digital ecosystem को
04:47एक healthy financial backbone मिल सके
04:49लेकिन इस तकनीकी और financial सच्चाई को छोड़ कर जब इसे एक political रंग दिया जाता है तो आम जंता
04:56confuse हो जाती है
04:57सोचने वाली बात ये है कि जब देश digital economy की तरफ तेजी से बढ़ रहा है तब क्या इस
05:03तरहां के मुद्धों पर राजनीती करना देश के हित में है
05:05एक तरफ Congress के अनुभवी नेता जिसे पीचे दामरम और मनीश तिवारी बंद कमरे में, meetings और parliamentary panels में
05:14ये मानते हैं कि digital infrastructure को चलाने के लिए एक sustainable revenue model और tiered MDR की ज़रूरत है
05:21और दूसरी तरफ party के top leaders बहारा कर इसे public sentiment को भढ़काने के लिए एक बड़ा मुद्धा बना
05:28लेती हैं
05:28ये जो भीड और निताओं के भाषणों के बीच का फरक है यही असली राजनीती है
05:33जनता को इस समय ये बताना जरूरी है कि कोई भी policy अचानक या रातो रात हवा में नहीं बनती
05:39उसके पीछे लंबी committees होती है, experts की राय होती है और देश के सभी दलों के सांसद उन committees
05:45का हिस्सा होती है
05:46जब वहां सबकी सहमती बनती है तब जैसे ही वो policy बहार आती है उस पर political फायदे के लिए
05:53ऐसी बयानबाजी शुरू होती है जो पूरे system को रुला देती है
05:57अब भाईया, आखिरकार सच क्या है? सच ये है कि UPI Charge का ये model एक आर्थिक ज़रूरत हो सकता
06:04है जिसे सभी दलों के नेताओं ने माना और समझा था
06:07लेकिन चुनाव और सियासी फायदे के चकर में जब इसे public के सामने लाया गया तो ये एक बड़ा विवाद
06:13बन गया
06:14अब देखना ये है कि आगे चल कर इस मुद्दे पर जनता का क्या रुख रहता है और क्या सरकार
06:19अपने इस कदम पर कायम रहती है या फिर इस सियासी दबाफ के आगे जुग जाती है
06:24आज के इस visualization में बस इतना ही लेकिन एक बात जरूर समझ लीजिए घादर्शकों कि UPI transactions में जो
06:31person to person relation है उसमें कोई पैसा नहीं है
06:49और बहुत limited लेकिन थोड़ी सी महेंगाई शायद बढ़ जाए पर दर्शकों ये बाद भी समझना जरूरी है कि इसके
06:58पीछे की जो सियासत है उसमें कितना दम है
07:01ऐसे में जो भी आपकी राए है हमें comment section में जरूर बताइएगा अब देख रहे हैं One India मैं
07:07हूँ आ कुर्श कौशेक
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