00:00क्या UPI transactions पर लगने वाले charges को लेकर जो बवाल मचा है वो सिरफ एक सियासी ड्रामा है
00:06क्या जिसे आज राहूल गांदी American दबाव और देश के साथ धोका बता रहे हैं
00:12उसके पीछे खुद Congress Party की अपनी ही राह और उनके senior नेताओं की मोहर शामिल थी
00:19आज की इस कहानी में हम इस पूरे मामले की तह तक जाएंगे
00:23हम समझेंगे कि कैसे अचानक से digital payments, merchant discount rate यानी MDR और 2000 रुपे से उपर के transactions
00:32पर
00:32ये सियासी बवाल क्यों शुरू हो गया और सबसे बड़ा सवाल ये कि अगर ये plan पहले से ही parliamentary
00:39panel का हिस्सा था
00:41जिसमें Congress के बड़े नेता शामिल थे तो आज इस पर इतनी आग क्यों लग रही है
00:47आईए शुरू करते हैं इस पूरे सियासी किस्से की गहराई में उतरना और समझते हैं कि क्या है पूरा माजरा
00:54कुछ दिन पहले जब सरकार की तरफ से एक खबर आई कि 2000 उपे से उपर के UPI payments पर
00:59merchant charges यानि एक sustainable revenue model पर विचार किया जा रहा है
01:05तो देश की राजनीती में भूचाल आ गया ओपोजिशन के बड़े नेता और लोगसभा में लीडर ओफ ओपोजिशन राहुल गांदी
01:12ने इस फैसले पर आकरमन करते हुए कहा
01:14कि सरकार ने आम जनता और छोटे व्यापारियों की जेप पर डाका डाला है राहुल गांदी का आरोप था कि
01:22ये सब अमेरिका के दबाव में किया जा रहा है और इसका फाइदा विदेशी payment companies को पहुँचाया जा रहा
01:29है
01:29उन्होंने इसे सीधे तोर पर एक नया UPIA टाक्स ही बता दिया लेकिन जैसे ही राहुल गांदी का ये बयान
01:37आया वैसे ही दिल्ली की सियासी गलियारों में ब्यूरोक्राटिक सर्कल्स में एक ऐसी खबर बहार आई जिसने पूरे रुख को
01:45ही बदल दिया
01:46सरकार के एक सीनियर फंक्शनरी ने सामने आकर एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया जिसने कॉंग्रेस पार्टी को खटगेरे में
01:53खड़ा किया है
01:54उन्होंने सीधा सवाल पूचा कि आकर राहुल गांधी उस चीज़ का विरोध क्यों कर रहे हैं जिस पर उनकी अपनी
02:00पार्टी के सीनियर नेताओं ने सालों पहले और पार्लिमेंटरी पैनल के अंदर अपनी पूरी सहमती दी थी
02:06यहीं पर इस कहानी का सबसे दिल्चस्प मोडाता है आये जानते हैं कि आखिर परदे के पीछे कहानी चल क्या
02:13रही है जब हम पार्लिमेंट की स्टैंडिंग कमिटी और फाइनांस की रिपोर्ट को देखते हैं जिसे बीजेपी की एमपी भरत्रुहारी
02:20महतब हैड कर रही थ
02:36उसमें कॉंग्रेस के कई दिगत सांसत भी मौझूद थे इनमें देश के फॉर्म और फाइनांस मिनिस्टर पीछ दामरम शामिल थे
02:43यूपी ए गवर्मेंट में मंत्री रहे मनीश तेवारी शामिल थे इसके अलावा गौरफ गुगोई किशोरी लाल और के गोपिनाथ जैस
03:05पर कोई डिसेंट या विरोध दर्ज नहीं करवाया था सब ने चुप चाप इस फाइनांशिल मॉडल और टायर्ड MDR श्रक्चर
03:13की जरूरत को समझा और उस पर अपनी सहमती दी थी अब सवाल ये उठता है कि अगर कमिटी के
03:18अंदर कॉंग्रेस के निताओं ने इस रिवे
03:33पाजनीती का एक नया हतियार इस पूरे विवाद का दूसरा पहलू ये है कि डिजिटल पेमेंट्स का ये पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर
03:41इतना बड़ा हो चुका है कि इसको चलाने के लिए हजारों करोड रुपे की लागत आती है कमिटी की रिपोर्ट
03:48खुद इस बात पर
03:49चिंता जाहिर कर चुकी है कि डिजिटल ट्रांजाक्शन को मेंटेन करने के लिए जो कॉस्ट आती है वो लगभग 20
03:56,700 करोड रुपे के आसपास है जबकि इसके मुकाबले जो बजट अलोकेशन मिलता है वो सिरफ 2,000 करोड रुपे
04:03का है ये जो 18,000 करोड से जादा का financial mismatch है
04:08इसको लेकर bank और payment gateways लगातार सरकार से गुहार लगा रहे थे कि अगर digital payments को देश में
04:16बिना किसी रुकावट के इसी तरह चलाना है तो एक viable revenue model बना नहीं होगा बरना आने वाले समय
04:23में system पर बोज़ पढ़ सकता है या फिर service डाउन हो सकती है
04:27सरकार और finance ministry का ये साफ कहना है कि ये जो charges है गो आम व्यक्ति या दो लोगों
04:33के बीच होने वाले person to person transactions पर बिलकुल नहीं लगेंगे
04:39ये सिरफ उन बड़े merchants या commercial transactions पर हैं जो 2000 रुपे से उपर है ताकि digital ecosystem को
04:47एक healthy financial backbone मिल सके
04:49लेकिन इस तकनीकी और financial सच्चाई को छोड़ कर जब इसे एक political रंग दिया जाता है तो आम जंता
04:56confuse हो जाती है
04:57सोचने वाली बात ये है कि जब देश digital economy की तरफ तेजी से बढ़ रहा है तब क्या इस
05:03तरहां के मुद्धों पर राजनीती करना देश के हित में है
05:05एक तरफ Congress के अनुभवी नेता जिसे पीचे दामरम और मनीश तिवारी बंद कमरे में, meetings और parliamentary panels में
05:14ये मानते हैं कि digital infrastructure को चलाने के लिए एक sustainable revenue model और tiered MDR की ज़रूरत है
05:21और दूसरी तरफ party के top leaders बहारा कर इसे public sentiment को भढ़काने के लिए एक बड़ा मुद्धा बना
05:28लेती हैं
05:28ये जो भीड और निताओं के भाषणों के बीच का फरक है यही असली राजनीती है
05:33जनता को इस समय ये बताना जरूरी है कि कोई भी policy अचानक या रातो रात हवा में नहीं बनती
05:39उसके पीछे लंबी committees होती है, experts की राय होती है और देश के सभी दलों के सांसद उन committees
05:45का हिस्सा होती है
05:46जब वहां सबकी सहमती बनती है तब जैसे ही वो policy बहार आती है उस पर political फायदे के लिए
05:53ऐसी बयानबाजी शुरू होती है जो पूरे system को रुला देती है
05:57अब भाईया, आखिरकार सच क्या है? सच ये है कि UPI Charge का ये model एक आर्थिक ज़रूरत हो सकता
06:04है जिसे सभी दलों के नेताओं ने माना और समझा था
06:07लेकिन चुनाव और सियासी फायदे के चकर में जब इसे public के सामने लाया गया तो ये एक बड़ा विवाद
06:13बन गया
06:14अब देखना ये है कि आगे चल कर इस मुद्दे पर जनता का क्या रुख रहता है और क्या सरकार
06:19अपने इस कदम पर कायम रहती है या फिर इस सियासी दबाफ के आगे जुग जाती है
06:24आज के इस visualization में बस इतना ही लेकिन एक बात जरूर समझ लीजिए घादर्शकों कि UPI transactions में जो
06:31person to person relation है उसमें कोई पैसा नहीं है
06:49और बहुत limited लेकिन थोड़ी सी महेंगाई शायद बढ़ जाए पर दर्शकों ये बाद भी समझना जरूरी है कि इसके
06:58पीछे की जो सियासत है उसमें कितना दम है
07:01ऐसे में जो भी आपकी राए है हमें comment section में जरूर बताइएगा अब देख रहे हैं One India मैं
07:07हूँ आ कुर्श कौशेक
Comments