00:00रूस से तेल खरीदना भारत को पढ़ेगा भारी
00:04यूएस सेनेट का बड़ावार
00:06इंडिया चाइना पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ
00:10रूस से तेल खरीदने वाले बड़े देशों को निशाना बनाने वाला एक बड़ा प्रतिबंध विधेयक अमेरिकी सेनेट से पास हो
00:17गया है
00:18इस बिल में रूस के बड़े तेल और गैस खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100% सीसदी तक
00:23टैरिफ लगाने का रास्ता साफ किया गया है
00:25और यही वज़ा है कि भारत के लिए भी ये खबर बेहद महत्वपूर्ण हो गई है
00:30अमेरिकी सेनेट ने लिंसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया और इरान आक्ट ऑफ 2026 को 86 के मुकाबले 11 वोट से
00:38मनजूरी दी
00:39इस कानून का मकसद रूस की उर्जा से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है
00:43क्योंकि अमेरिका का आरोब है कि रूस की तेल और गैस से होने वाली आए यूक्रेन युद्ध को जारी रखने
00:49में मदद करती है
00:50अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि इससे भारत को क्या आसर पड़ेगा
00:54तो आपको बता दें कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है
00:58रूस यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की ओर से रूसी तेल पर प्रतिबंद और कीमतों की सीमा लगाये जाने
01:05के बीच
01:05भारत ने रूस से मिलने वाले डिसकाउंटिट क्रूट का फायदा उठाया
01:09इससे भारत की रिफाइनरिंग कमपनियों को भी फायदा हुआ
01:12और देश की उर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली
01:15लेकिन अब अमेरिकी कानून में रूस के बड़े खरीदारों को निशाना बनाने का प्रावधान
01:20भारत के लिए चिंता का विशय बन सकता है
01:22मौजूदा बिल में राश्ट्रपती को रूस के प्रमुख तेल और गैस खरीदार देशों से
01:26आयात होने वाले सामान पर सौ फीसिदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात है
01:31ये सीधे भारत पर ततकाल टैरिफ लगने का अधेश नहीं है
01:35बलकि अमेरिकी राश्ट्रपती को भविश्य में ऐसा कदम उठाने की शक्ती देता है
01:39हाला के विधयक में सभी देशों को एक साथ निशाना नहीं बनाया गया है
01:42संशोधित प्रावधानों के मुताबिक फोकस रूस के सबसे बड़े पांच तेल खरीदारों पर रखा गया है
01:48उपलब्द अमेरिकी सिनेट संबंधी जानकारी में भारत और चीन उन प्रमुख खरीदारों में शामिल बताए गए हैं जिन पर इसका
01:55असर पढ़ सकता है
01:56इसका मतलब ये हुआ कि अगर आगे चलकर अमेरिकी राष्ट्रपती इस अधिकार का इस्तमाल करते हैं तो भारत से अमेरिका
02:03जाने वाले कुछ सामान पर भारी शुलक लग सकता है
02:05और अगर 100 फीसिदी टारिफ लागू होता है तो भारती उत्पाद अमेरिकी बाजार में काफी महंगे हो सकते हैं
02:11भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले अलग-अलग ओध्योगिक और उपभूगता उत्पादों पर इसका असर पढ़ सकता है
02:17हाला कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि कौन-कौन से भारती उत्पाद प्रभावित होंगे
02:22क्यूंकि बिल में राष्ट्रपती को अधिकार दिये जाने के बाद वास्तविक टैरिफ का दायरा और संभावित छूट अलग से तै
02:28की जा सकती है
02:29अब सवाल ये भी है कि अमेरिका इतना बड़ा कदम क्यों उठा रहा है
02:33तो उसके पीछे की वज़ा है वाशिंग्टन की रणनेती जो रूस की उर्जा आये को कमजोर करना चाहती है
02:38अमेरिका चाहता है कि रूस के बड़े खरीदार रूस से तेल और गैस खरीद कम करें
02:43इसके जरीए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ा कर यूकरेन यूद्ध को लेकर उसकी क्षमता को कमजोर करने की कोशिश की
02:49जा रही है
02:50फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिकी सिनेट केस फैसले ने दोनों को एक नए दबाव के दौर में पहुचा दिया
02:56है
02:56एक तरफ रूस से सस्ता तेल भारत के लिए आर्थिक रूप से एहम है तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ
03:02व्यापारिक रिष्टे भी उतने ही महत्वपूर्ण है
03:04अब गेंड अमेरिकी प्रतिनिधी सभा और उसके बाद राष्ट्रपती के पाले में है
03:08लेकिन इतना तय है कि रूस का तेल अब सिर्फ उर्जा का मुद्धा नहीं रहा
03:12ये वैश्विक राजनीती और भारत अमेरिका संबंधों का बड़ा मुद्धा बन चुका है
03:16फिलहाल के लिए बस इतना ही
03:18बाकी अपडेट्स के लिए बने रहिए One India हिंदी के साथ
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