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रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका ने बड़ा दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी सीनेट ने Russia Sanctions Bill को 86-11 वोट से पास कर दिया है। इस बिल में रूस के बड़े तेल खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन संभावित रूप से प्रभावित देशों में शामिल हैं। हालांकि यह टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है और बिल को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी लेनी होगी। इस वीडियो में जानिए अमेरिका के इस कदम का भारत पर क्या असर हो सकता है और रूस से तेल खरीदना भारत के लिए कितना बड़ा मुद्दा बन गया है।

The US Senate has passed a major Russia sanctions bill that could allow tariffs of up to 100% on goods from countries that are among the largest buyers of Russian oil and gas. India and China could be among the countries affected. However, the tariffs are not automatic and the bill still needs consideration by the US House of Representatives before becoming law. Watch this report to understand why Washington is targeting major Russian energy buyers, how India could be affected, and what this development means for India-US trade relations and India's Russian oil strategy.

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Transcript
00:00रूस से तेल खरीदना भारत को पढ़ेगा भारी
00:04यूएस सेनेट का बड़ावार
00:06इंडिया चाइना पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ
00:10रूस से तेल खरीदने वाले बड़े देशों को निशाना बनाने वाला एक बड़ा प्रतिबंध विधेयक अमेरिकी सेनेट से पास हो
00:17गया है
00:18इस बिल में रूस के बड़े तेल और गैस खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100% सीसदी तक
00:23टैरिफ लगाने का रास्ता साफ किया गया है
00:25और यही वज़ा है कि भारत के लिए भी ये खबर बेहद महत्वपूर्ण हो गई है
00:30अमेरिकी सेनेट ने लिंसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया और इरान आक्ट ऑफ 2026 को 86 के मुकाबले 11 वोट से
00:38मनजूरी दी
00:39इस कानून का मकसद रूस की उर्जा से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है
00:43क्योंकि अमेरिका का आरोब है कि रूस की तेल और गैस से होने वाली आए यूक्रेन युद्ध को जारी रखने
00:49में मदद करती है
00:50अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि इससे भारत को क्या आसर पड़ेगा
00:54तो आपको बता दें कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है
00:58रूस यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की ओर से रूसी तेल पर प्रतिबंद और कीमतों की सीमा लगाये जाने
01:05के बीच
01:05भारत ने रूस से मिलने वाले डिसकाउंटिट क्रूट का फायदा उठाया
01:09इससे भारत की रिफाइनरिंग कमपनियों को भी फायदा हुआ
01:12और देश की उर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली
01:15लेकिन अब अमेरिकी कानून में रूस के बड़े खरीदारों को निशाना बनाने का प्रावधान
01:20भारत के लिए चिंता का विशय बन सकता है
01:22मौजूदा बिल में राश्ट्रपती को रूस के प्रमुख तेल और गैस खरीदार देशों से
01:26आयात होने वाले सामान पर सौ फीसिदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात है
01:31ये सीधे भारत पर ततकाल टैरिफ लगने का अधेश नहीं है
01:35बलकि अमेरिकी राश्ट्रपती को भविश्य में ऐसा कदम उठाने की शक्ती देता है
01:39हाला के विधयक में सभी देशों को एक साथ निशाना नहीं बनाया गया है
01:42संशोधित प्रावधानों के मुताबिक फोकस रूस के सबसे बड़े पांच तेल खरीदारों पर रखा गया है
01:48उपलब्द अमेरिकी सिनेट संबंधी जानकारी में भारत और चीन उन प्रमुख खरीदारों में शामिल बताए गए हैं जिन पर इसका
01:55असर पढ़ सकता है
01:56इसका मतलब ये हुआ कि अगर आगे चलकर अमेरिकी राष्ट्रपती इस अधिकार का इस्तमाल करते हैं तो भारत से अमेरिका
02:03जाने वाले कुछ सामान पर भारी शुलक लग सकता है
02:05और अगर 100 फीसिदी टारिफ लागू होता है तो भारती उत्पाद अमेरिकी बाजार में काफी महंगे हो सकते हैं
02:11भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले अलग-अलग ओध्योगिक और उपभूगता उत्पादों पर इसका असर पढ़ सकता है
02:17हाला कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि कौन-कौन से भारती उत्पाद प्रभावित होंगे
02:22क्यूंकि बिल में राष्ट्रपती को अधिकार दिये जाने के बाद वास्तविक टैरिफ का दायरा और संभावित छूट अलग से तै
02:28की जा सकती है
02:29अब सवाल ये भी है कि अमेरिका इतना बड़ा कदम क्यों उठा रहा है
02:33तो उसके पीछे की वज़ा है वाशिंग्टन की रणनेती जो रूस की उर्जा आये को कमजोर करना चाहती है
02:38अमेरिका चाहता है कि रूस के बड़े खरीदार रूस से तेल और गैस खरीद कम करें
02:43इसके जरीए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ा कर यूकरेन यूद्ध को लेकर उसकी क्षमता को कमजोर करने की कोशिश की
02:49जा रही है
02:50फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिकी सिनेट केस फैसले ने दोनों को एक नए दबाव के दौर में पहुचा दिया
02:56है
02:56एक तरफ रूस से सस्ता तेल भारत के लिए आर्थिक रूप से एहम है तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ
03:02व्यापारिक रिष्टे भी उतने ही महत्वपूर्ण है
03:04अब गेंड अमेरिकी प्रतिनिधी सभा और उसके बाद राष्ट्रपती के पाले में है
03:08लेकिन इतना तय है कि रूस का तेल अब सिर्फ उर्जा का मुद्धा नहीं रहा
03:12ये वैश्विक राजनीती और भारत अमेरिका संबंधों का बड़ा मुद्धा बन चुका है
03:16फिलहाल के लिए बस इतना ही
03:18बाकी अपडेट्स के लिए बने रहिए One India हिंदी के साथ
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