00:04गणेश शतूर्थी पर बगवान श्री गणेश की कृपा सकारात्म कूर्ज और घर से विगनों को दूर करने के लिए हवन
00:10या आहूती देना अत्यंत शुब होता है।
00:36ही हवन कर ना शुब रहेगा।
01:00हवन कुंड है तो वो भी बहतर रहेगा।
01:02हवन कुंड में आमकी लकडियां सजाएं कपूर और गाय का घी लगाकर ओम अगनेयनम बोलते वे पवित्र अगनी प्रज्वलित करें।
01:09अब अगनी देव के जलने पर सबसे पहले गाय के शुद्ध घी से तीन या पांच आहूतियां दें।
01:13मंत्र ओम प्रजापतय स्वाहा इदम प्रजापतय इदम नमम इस मंत्र का जाप करें।
01:2021 या 108 बार हवन करना है तो हवन सामगरी में थोड़ा घी, कालितिल, जौं और मोदक या लड़ो मिलाकर
01:26गणेची के मुख्य मंत्रों से आहूति दें।
01:29प्रतेक मंत्र के अंत में स्वाहा बोलते वे सामगरी अगनी में डाल दें।
01:33मंत्र होंगे ओम गन गन पते नम स्वाहा या फिर ओम वक्रतुंडाय हुम स्वाहा या फिर ओम एक दंताय विदमहे
01:42वक्रतुंडाय धीमही तन्नो दंती प्रचोदयात स्वाहा।
01:48अब पूर्णा आहूती देते समय एक सूखे नारियल में थोड़ा सा घी रोली सुपारी लौंग और इलाइची को कलावे से
01:55लपेट कर बाढ़ दें।
01:56अब दोनों हातों से ओम, पूर्ण, मदः, पूर्ण, मिदम इस मंत्र का जाप करते हुए हवन कुंड के बीच में
02:04से अर्पित कर दें।
02:05हवन की अगनी शांत होने पर गणेश जी की आरती करें। हवन के बाद उठने वाली भस्म का तिलक अपने
02:12और अपने परिवार के सदस्यों को लगाए।
02:14बची हुई सामगरी को वापस से स्टोर कर लें और अगले हवन में इस्तमाल कर सकते हैं।
02:19हवन की राख को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दे या अपने पेड़ पौधो में डाल सकते हैं।
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