00:04गणेश चतुरती 14 सतंबर सोंबार को पढ़ रही है जो लोग अपने घर पर गणेश जी की स्थापना करना चाहते
00:11हैं और बिना पंडिक जी के स्वयम पूजा करने की सोच रहे हैं तो उन लोगों को गणेश स्थापना से
00:17जुड़े मुहुरत,
00:18पूजा विदी, मंत्र और मूर्ती से जुड़े कुछ जरूरी मियमों का पालन करना लापदायक होगा आपको बता दें कि गणेशी
00:26का जन्म भादर पर शुक्ल चतुरती को दोपहर के समय हुआ था इस बार चतुरती तिती 14 सतंबर को सुब
00:337 बचकर 6 मिनट से शुरू हो रही
00:35है और 15 सतंबर को सुब 7 बचकर 44 मिनट तक रहेगी गणेशी का जन्म दोपहर के समय हुआ इसलिए
00:42उस समय ही मूर्ती स्थापना और पूजा का शुम नहुरत सुब 11 बचकर 2 मिनट से दोपहर 1 बचकर 31
00:53मिनट तक रहेगा इसी बीच राहुकाल का समय 7 बचकर 57 मिनट से 9 ब�
01:02पूजा पाट और स्थापना ना करें इस साल एक और अच्छी और खास बात यह है कि भद्रा का भेट
01:07करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है क्यूंकि इस बार भद्रा 14 सतंबर की शाम 7 बचकर 20 मिनट से 15
01:14सितंबर की सुबर 6 बचकर 25 मिनट तक है इस समय स्थापना का कोई मुह
01:19पूरत है ही नहीं वहीं बता दे कि इस बार गनेश उत्सव 10 नहीं 12 दिनों तक मनाई जाएगी जो
01:2514 सितंबर से शुरू होगी और 25 सितंबर तक अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होगी वहीं गनेश श्यतूर्थी के दिन
01:33चंद्रमा भी नहीं देखना चाहिए चतूर्थ
01:48ना किस संपोर्ण होगे थी बात करेंगर सामग्री की तो बट्टी के गनेशी की मूर्ती जिनकी सून बाई ओर हो
01:55लकडी की चोकी लाल्य पीला नया कपड़ा अक्षत रोली संदूर चंदन जनेयो कलावा गंगाजल किस दूर्वा लाल फूल आम के
02:05पत्ते तांबे अपीतल
02:07एक नारियल, सुपारी, एक का सिक्का, मोदक या बेसन के लट्टू, रितुफल, धू, देसीखी का दीपक और करपूर
02:15अब पूजा स्थान को गंगाजल से पवत्र करें, चोकी पर नया लाल या पीला कपड़ा बच्छाएं और उस पर अक्षत
02:22चावल की धेली बनाएं, ये सबाब को शुपमुरत में ही करना है
02:27गणेशी की मूर्ती को अक्षत के उपर स्थापत करें, मूर्ती का मुख पूर्व्य उत्तर दिशा की ओर रखें, स्थापना के
02:34बाद ही मूर्ती के चेहरे से कपड़ा हटाएं
02:36चौकी की दाई और तांबे का कलश रखें, उसमें जल, गंगा जल, सिक्का, सुपारी और अक्षत डाल दें
02:43कलश पर आम के पत्ते रखकर लाल कपड़े में लपेटा नारियल स्थापत करें
02:47दूर्वा की मदद सिव नूर्ती परजल और पंचामरत के चीटे दें, गणेश जी को जनेयों, कलावा, रोली, चंदन और अक्षत
02:55का तिलत लगाएं
02:56गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठेक और लाल फूल चड़ाएं, मोदग, बेसन या मोती चूल के लड़ू और फलो
03:04का भोग लगाएं
03:06ध्यान रहे गणेश जी की पूजा में न तुलसी का प्रयोग करें, न भोग नोने तुलसी अर्पत करें
03:12अब धूप दीप जलाकर परिवार के साथ जैगनेश, जैगनेश, आर्ती गाय, पूजा के अंत में भूल चोक के लिए श्रमा
03:19बांगें
03:19मंत्र जाप करना चाते हैं तो ओम गन गन पते नम, दूरवा चड़ाते शमय, श्री गणेशाय नम, वहीं वक्रुतुंड, महाकाय,
03:28सूरी कोटी, समप्रभ, निर्विग्नम, पुरुमे देव, सर्वकारेशु, सर्वदा, इस मंत्र का भी जाप आप कर सकते हैं
03:34नियान रहे, घर में अगर पहली बार गणेशी को स्थापित कर रहे हैं, तो आप अपनी सुवधा के अनुसार स्थापना
03:41के समय ही, ये संकल पिलें कि उन्हें देड़ दिन, तीन दिन, पाच दिन, या साथ दिन, या फिर बारह
03:47दिनों तक स्थापित करने के बाद ही उनका
03:49विसर्जन करेंगे, अगर आप उनका विसर्जन नहीं करना चाते और मूर्ती को घर में ही रखना चाते हैं, तो आप
03:56उनका कलश विसर्जन भी इन बताए गए दिनों के अनुसार कर सकते हैं, मूर्ती को आप घर में ही रखें,
04:02लेकिन कलश विसर्जन करना ज़रूरी है, त
04:05पिल्हाल से वेडियो में इतना ही वेडियो को लाइक और शेयर करें साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें
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