00:03हर साल भाद्रपद महां के शुक्रपक्ष की तृत्यातिती को हर्ताली का तीज का व्रत रखा जाता है।
00:30पहला इस व्रत को बहुती विधिविधान से करती हैं। वहीं इस व्रत में हर्ताली का तीज की कथा सुनना और
00:37पढ़ना बहुती ज़रूरी है। इसके बिना व्रत का पूनेफर नहीं मिलता। ऐसे में चलिया आपको बताते हैं हर्ताली का तीज
00:45की व्रत कथा।
01:00उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया था मातापारवती की कठिन साधना देखकर उनके पिता हिमाले बहुत चिंतित रहते थे इस
01:08दोरान एक दिन महार्शी नारत भगवान विश्णु की ओर से विवाह का प्रस्ताव लेकर हिमाले के पास पहुची हिमाले ने
01:16इस प्रस्ताव क
01:17स्विक्यार कर लिया जब ये बात मातापार्वती को पता चली तो बहुत दुखी हो गए
01:22वो भगवाण शिव को अपना पती बनाना चाहती थी अपनी एक सखी को उन्होंने बताया
01:47भगवान शिव की अरादना करनी शुरू की
01:49मानेता है कि भादरपद महा के शुक्रपक्षकीत रित्याती थी को
01:53हस्त नक्षत्र में मातपारवती ने रेत में शिवलिंग बनाया
01:58इसके बाद उन्होंने भगवान शिव की पूजा की और पूरी राद जागरन कर तपस्या की
02:04उनकी कठिन साधना से प्रसन होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिये
02:09साथ ही उन्हें पत्मी के रूप में सुविकार करने का वर्दान दिया
02:13उमीद करते हूँ आपको एक अथा पसंद आई होगे
02:15फिलान हमारे इस वीडियो में दना ही वीडियो को लाइक शिर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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