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Ganesh Chaturthi Vrat Vidhi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 14 सितंबर 2026 की सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 15 सितंबर 2026 की सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा. उदयातिथि के नियम के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को मनाया जाएगा.Ganesh Chaturthi Vrat Vidhi 2026: Vrat Kaise Kare,Kitne Din Ka Rakhna Chahiye,Parana Kab Kare ?

According to the Hindu calendar, this year, Bhadrapada Shukla Chaturthi Tithi will begin at 7:06 am on September 14, 2026, and end at 7:44 am on September 15, 2026. According to the Udayatithi rule, the auspicious festival of Ganesh Chaturthi will be celebrated on Monday, September 14, 2026.

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~HT.178~PR.111~ED.464~VG.HM~

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Transcript
00:04गणेश चतूर्थी का पर्व इस साल 14 सितंबर दिन सोंवार को मनाय जा रहा है
00:09वही आपको बता दें कि गणेश ओट्सव का तेवहार भी इसी दिन से शुरू होकर अनन्त चतूर्दशी यानिकी 25 सितंबर
00:17तक मनाय जाएगा
00:18अगले 10 दूनों तक गणपती बप्पा और उनके भक्तों की बीच का ये तेवहार जोरशोर से मनाय जाता है
00:24लेकिन अब सवाल योडता है कि गणेश चतूर्थी या गणेश ओट्सव कवरत कब रखें, कितना रखें, कब खोला जाए
00:32आईए इन सभी सवालों के जवाब आपको से विडियो में देते हैं
00:35सबसे पहले दो चीजों पर ध्यान देना होगा
00:38अगर आप बिना मूर्ती स्थापना के केवल घर पर पूजा करके ही गणेश चतूर्थी का वरत रखना चाहते हैं
00:45तो इसके नियम अलग होंगे
00:46लेकिन अगर आप घर में गणपती बप्पा की मूर्ती स्थापना कर रही हैं
00:51तो आपको वरत के कई अलग मियामों के पालन करने होंगे
00:54बिना मूर्ती स्थापना के आप केवल गणेश चतूर्थी के दिन ही वरत रख सकते हैं
00:59और अगले दिन इसका सूर्योदे के बाद पारण कर सकते हैं
01:02यानि कि 15 सितंबर 2026 दिन मंगलवार
01:05वहीं अगर आप घर पर इस बार गणपती बपा की मूर्ती लेकर आ रहे हैं
01:10तो ऐसे में आप चतूर्थी से शुरू होकर अनंत चतूरदशी तक 10 दिनों का वरत कर सकते हैं
01:16लेकिन अगर आपके लिए 10 दिन वरत रखना संभव नहीं है
01:19तो आप डेड़ दिन, 3 दिन, 5 दिन या 7 दिन का वरत भी रख सकते हैं
01:25वरत की शुरुवात दोनों ही स्थितियों में चतूर्थी की सुर्योदे के बाद से ही होगी
01:29ऐसे में गणे चतूर्थी के दिन सुबस नानादी से निवरत्त होकर
01:34हाथ में गंगाजल, अक्षत और फूल लेकर गड़पती बपा के वरत और पूजा का संकल्प लें
01:40इसके बाद से आपके वरत की शुरुवात हो जाएगी फिर आप अपने नियमानोसार ऐसे वरत को पूरा करें
01:45ध्यान रहे वरत का संकल्प लेते समय ही अपनी संख्या जरूर बता दें
01:50वह इस वरत के दोरान केवल एक बार फलाहार ग्रहन करें
01:55दूद, फल, साबुदाना, कुट्टू लिया जा सकता है और पारण भी सात्विक भोजन के साथ ही करें
02:01ध्यान रहे गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा दर्शन करना वर्जित रहता है
02:06ऐसे में गलती से भी चांद को न देखें इससे जूटा कलंक लगने का पर दोश होता है
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