00:00इस खास तजिये में खुशामदेब, आज हम एक ऐसी दिल्चस्प कहानी पर बात करने वाले हैं, जिसका आगाज 19. सदी
00:06में कुदरत पर इनसान की शांदार फता से होता है, और फिर तेजी से हम एक जदीद कानूनी जंग की
00:11तरफ आएंगे, जो इसी अजीम विर्से को बचा
00:14आने के लिए लड़ी गई, हम बात कर रहे हैं तारीखी लैंस डाउन ब्रिज और हमारे दीगर कीमती सकाफती मकामात
00:19की, अब जरा इस बात पर गौर करें, 27 लाक रुपए, आज शायद ये इतनी बड़ी रकम ना लगे, लेकिन
00:25सोची 1880 की दहाई में जब इस हैरतंगेस प
00:42दरिया सिंध पर पुल की तामीर, इसकी लागत और जुड़ी हुई लोक कहानिया, विरसे को लाहक जदीद खतरात, फिर हाई
00:49कोट का इसमे आना और आखिर में तहफुज के लिए दिये गए एहकामात, यानि बरतानवी दोर की कमाल एंजिनिरिंग से
00:55लेकर 2023 के अदालती फ
01:11अफ़ार स्चीम फेरी की जगा तेज मतबादल चाहिए था, लेकिन दरिया सिंध का तेज बहाओ और वहां का जोग्राफिया एक
01:19बहुत बड़ी रुकावट थी, मसला क्या था? यहां इंजिनिरिंग के दो बिलकुल मुतजाद चैलेंजिस थे, एक तरफ सकर चैनल था
01:26जि
01:41यहीं पर एंट्री होती है कमाल के इंजिनिर सर अलेक्जांडर मेडोज रैंडल की, जिन्होंने केंटिलेवर डिजाइन का आइडिया पेश किया.
01:48असान लफजों में, दरिया की इस गेर मुस्तहकम रेतिली तह पर सुतून खड़े करने के बजाए, उन्होंने बड़े और
01:54लंगर अंदाज केंटिलीवर्स के जरिए धांचे को किनारों से मौलक करने का फैसला किया. इस वक्त के लिहास से ये
02:00एक शांदार और बेमिसाल एंजिनिरिंग थी. दूसरा हिस्सा लागत, तामीर और लोग कहानिया. अब देखते हैं कि इस तारीखी पुल
02:09को बनाने के ल
02:13लगी, जो अपने वक्त में दुनिया का सबसे तवील केंटिलीवर पुल बनकर उभरा. 1885 से 99 तक कि ये टाइम
02:20लाइन वाकई बहुत दिल्चस्प है. इंजिनिर फ्रेडरिक एवरेट रोबर्टसन की निगरानी में ये हैरत अंगेस तामीर महस चार साल के
02:27मुक्तसर अरसे म
02:28मुकमल हुई. जी हाँ, सिर्फ चार साल. अगर्चे इस बड़ी कोशिश में अफसोसनाक तौर पर छे मजदूरों की जाने भी
02:34गई, लेकिन उनकी महनत हमेशा के लिए तारीख का हिस्सा बन गई. और फॉलाद और लोहे की इन सخت हकीकतों
02:41से हटकर इस पुल के साथ एक बड
02:58पूरे जमाना गीत तखलीक किया जिसे आज भी हम हो जमालू के नाम से जानते हैं. तीसरा हिस्सा, सनत बमकाबला
03:05तारीख. अब हम माजी से निकल कर 21 सदी के जदीद दोर की तरफ आते हैं. वक्त गुजरने के साथ
03:11इन अनमोल तारीखी यादगारों को एक बिलकुल नए औ
03:15पर हैरान कुन दुश्मन का सामना करना पड़ा. और वो है गैर मुनजम सनती स्टोन क्रशिंग यानि पत्थर तोड़ने की
03:22सनत. दोजार तैस की अदालती दस्ताविजात को देखें तो सक्कर और खैरपूर के अजला में मौजूद कई एहम सकाफती मकामात
03:31बिराय रास्त �
03:32इस सनती दरांदाजी के खत्रे में हैं. इन में हमारा यही लैंस डाउन ब्रिज, सतीन जो अस्तान, लिखन जो दुडो,
03:39किला भक्र, कदीम स्टोन टूल फैक्टरी और किला कोड डिजी जैसे अनमोल विर से शामिल हैं. होता दरसल यह है
03:46कि इन तारीखी मकामात के करीब ल�
04:00रही है, बलकि इन तारीखी ढाचों को भी तबहा कर रही है. चौथा हिस्सा, हाई कोट का इकदाम और जमीनी
04:07हकाइक. इस मसलसल तबाही को देखते हुए सिंध हाई कोट ने सخت एक्शन लिया. अदालत ने महकमों से सخت तामीली
04:14रिपोर्ट्स तलब की और ग्राउन पर असल
04:29जमीनी हकाइक को जरूर वाज़ कर दिया. ये बताता है कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं होता, इसे लागू
04:36करवाना असल चैलेंज है. लेकिन जरा यहां गोर करें, इस सरकारी नोटिस में सूरतिहाल कहीं ज्यादा तश्वीश नाग थी. कदीम
04:43स्टोन टूल फैक्
05:02ये संगीन सूरतिहाल बिलाखर हाई कोर्ट की जानिब से उन जामे कानूनी हिदायात की तरफ ले जाती है, जो इस
05:09शांदार तारिक को महफूज रखने के लिए जारी की गई. अदालत ने माहुलियात और वर्से के तहफूज को तीन सخت
05:16ओपरेशनल मराहिल में तक्सीम किया
05:18पहला कदम किसी भी तारीखी मकाम के एक किलोमीटर के दायरे में क्रशिंग पर मुकम्मल पाबंदी, दूसरा अलूदगी कम करने
05:25के लिए वेट क्रशिंग टेक्नॉलजी और तीसरा धूल काबू करने के लिए डेस्ट कलेक्टर्स की लाजमी तनसीब का हुकम. सिर्फ
05:33यही
05:46और इसके साथ-साथ, मजदूरों के हुकुक के तहफुज के लिए तमाम वरकर्स की सोशल सेक्यूरिटी यानि S.E.C.
05:52और E.O.B.I. में रिजिस्ट्रेशन सख्ती से नाफिस कर दी गई.
05:55बिलाँखिर लेंज्डाउन ब्रेज और दीगर सकाफ्ती मकामात की ये कहानी हमें एक इंतहाई एहम सवाल पर लाकर खड़ा कर देती
06:02है. तरक्की पजीर खिते जिने सनत और मईशत की अशद जरूरत है. वो किस तरह इस तेज रफ़तार सनती तरक्की
06:08और अपने शांदार
06:09सकाफ्ती विर्से की अनमोल कदर के दर्मियान एक मौसर तवाजन काइम कर सकते हैं. ये एक ऐसी फैसला कुन सोच
06:15है जिस पर हम सब को गोर करने की जरूरत है. इस मालूमाती तजजिये में साथ रहने का बहुत शुक्रिया.
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