00:00दोस्तो इस नए तज्जिये में आप सब को खुशाम दीद। आज हम एक नहायत ही दिल्चस्प तहकीक करने जा रहे
00:06हैं।
00:07कभी आपने सोचा है कि अजीम सल्तनतें जब किसी नए खिते पर कब्जा करती हैं तो वहां अपने माद्दी और
00:13तामीराती निशानात कैसे छोड़ती हैं।
00:15आज हम एकैडमिक थियोरी को ठीक तारीखी हकाइक और सरकारी दस्तावेजात के साथ जोड़ कर देखेंगे।
00:22मतलब हम ये समझेंगे कि तारीख सिर्फ किताबों में नहीं बलके हमारे इर्दगिर्द मौजूद पत्थरों और इमारात में कैसे महफूज
00:29होती है।
00:30शुरू करने से पहले एक बड़ा सवाल जो हम सब के जहन में आना चाहिए।
00:35क्या हिंदुस्तान में बरतानवी सामराज एक मुकमल जाबिराना निजाम था या ये एक मुत्तफिका और मिल जुल कर चलने वाला
00:43अमल था।
00:44दरसल ये सवाल सीधा एक मास्टर स्थेसिस से लिया गया है जो आबादियाती दोर के फने तामीर यानी कोलोनियल आर्किटेक्चर
00:52पर मबनी है।
00:53आज के सफर में हम इस सवाल को एक तारीखी राज के तौर पर सुलजाने की कोशिश करेंगे।
00:58ओके चलिए इस खयाल की गहराई में उतरते हैं। ये कोटना एक बहुती गहरी बुनियाद रखता है। इसका मतलब यह
01:05है के बृतानवी हुक्मरानों ने इस बिलकल अजनबी और मुख्तलिफ खिते को समझने के लिए एक अजीब सा तरीका अपनाया।
01:12उन्होंने इस अनोखी, exotic, दुनिया को अपने जाने पहचाने घरेलू अंदाज में ढालने की कोशिश की। असान अलफाज में कहूं
01:19तो उन्होंने इस अजनबियत को एक ऐसी शकल देने की कोशिश की जो उनके अपने मानूस महल से मिलती जुलती
01:25हो ताके इस पूरे खिते
01:41और आखिर में, preserving a complex legacy. एक clear roadmap है हमारे पास. तो पहला हिस्सा, the British colonial encounter.
01:50आगाज वही से करते हैं जब British East India Company ने अपना इक्तिदार कायम करना शुरू किया. अब ज़रा खुद
01:55सोचिए, एक ऐसी society पर हुकूमत करना जो तहजीब, मजहब और नसल के इतिबार से इस कदर पेचीद
02:10ती जिसने दुनिया को दो बिल्कुल अलग हिस्सों में बांट दिया. एक तरफ मानूस योरप था, जिसे हम या वेस्ट
02:17कहा गया, और दूसरी तरफ अजनबी मश्रिक, जिसे वो या औरियंट समझा गया. ये जो हम, मुकाबिल वो का concept
02:25था न, इसने शुरूवाती मेल जोल
02:27को पूरी तरह शकल दी और हाकिम और महकूम के दरमयान एक जबरदस्त नफसियाती दिवार खड़ी कर दी. इस सब
02:34के बाद, इस खिते को फिजिकली कंट्रोल करने के लिए उन्होंने जमीनी सर्वेस किये और कदीम इमारात को महفوظ करना
02:40शुरू किया. हैरत की बात ये है कि
02:43उन्होंने हमारी तारीख को एक फ्रोजन पास्ट यानि एक मुझमिद माजी के तौर पर पेश किया. एक तरह से उन्होंने
02:50तस्वीरे खैच कर वक्त को रोक दिया ताके वो दुनिया को बता सकें कि देखो हम ही इस माजी के
02:56असली मुहाफिज हैं और अपनी हुकूमत को जा
03:121947 के दर्मियान इस शहर ने ऐसी तेजी से तरकी की और ऐसी करवट ली कि इसकी शकल ही मुकमल
03:19तोर पर बदल गई. जरा इस सफर पे एक नजर डालिये. 1849 से 1857 तक जदीदियत का बीच बोया गया.
03:26फिर 1858 से 1914 तक अरली राज का दौर चला जहां शहर ने प्रॉपरली कोलोनि
03:38एक भूम आया. और आखिरकार 1935 से 1947 तक कराची एक प्राउड कैपिटल बन कर उभरा. इंतहाई तेजी से होने
03:46वाली इस तबदीली को फील करें एक मामूली सी मचेरों की बंदरगाह से ये शहर देखते ही देखते एक आलीशान
03:52कलोनियल कैपिटल बन गया. लेकिन ये तरक
04:07शराबे की असली अकासी करते थे और दूसरी तरफ ते कोलोनियल अबोर्ड जहां बाहर से लाए गई मगरिबी सोच और
04:14बरतानवी शनाख्त को मुसल्लत किया गया था. ये फासला सिर्फ जहनी नहीं था बलके जगा और फिजा ने अमली तोर
04:20पर शहर को दो हिस्सों में का�
04:45कराती हैं तो नतीजा क्या निकलता है?
05:05So, the crucial point is, इन शानदार घरों की तामीर के पीछे एक बहुत बड़ा खौफ चुपा हुआ था. जी
05:12हाँ, खौफ. बरतानवी लोगों को डर था कि अगर वो इस exotic महौल के ज्यादा असर में आ गए, तो
05:18उनका अपना तहजीबी वकार और बड़तरी कहीं खतम ना हो जाए. इस
05:35इस तहजीबी कश्मकश और थियोरी से निकल कर अब हम आज के दौर में आते हैं जहां ये माजी सरकारी
05:42कागजात का हिस्सा बन चुका है. अब जरा इस नंबर पर गौर करें.
05:46211. ये सिर्फ एक अदद नहीं है. सिर्फ सिंध की सुबाई हुकूमत ने 211 इमारात को प्रोटेक्टेड हेरिटेज करार दिया
05:53है. और ठहरिये, इस फहरिस में विफाकी हुकूमत और यूनेस्को के साइट्स तो शामिल ही नहीं है. इस से आप
05:58अंदाजा लगाएं कि जो �
05:59अकेडेमिक थियरी हम डिसकस कर रहे थे, वो दरसल जमीन पर कितनी बड़ी और ठोस हकीकत है. हुकूमत ने इस
06:05वसी तारीख को संभालने के लिए मुक्तलिफ कैटेग्रीज बनाई है. फेडरल साइट्स, नैशनल मॉनुमेंट्स, यूनेस्को की आलमी विर्सा लिस्ट और
06:12पिर सिन गौर्ण्मन का अपना प्रोटेक्टिड हेरिटेज. इस चोटी से लिस्ट में आबादियाती दौर से हजारों साल पहले के खंडाराच
06:19से लेकर बरतानवी दौर की अमारात तक सब कुछ शामिल है. पूरी तारीख जैसे इन ही कैटेग्रीज में सिमिट आई
06:26है.
06:26And this brilliantly illustrates अगर आप इस जद्वल या टेबल को देखें तो आपको एक अजीब सा हुसन नजर आएगा.
06:33एक ही सरकारी फैरिस्ट में कराची की आबादियती दौर के शानदार महलात, लरकाना के कदीम खंडरात और हाइदराबाद के सूफियों
06:40के मज़रात एक साथ खड़े हैं
06:42ये मुख्तलिफ मकामात कागस पर आपस में जगा बांट कर हमारी तवील और पेचीदा तारीख की एक मुकमल तस्वीर पेश
06:49कर रहे हैं
06:49सची बात बताओ, इस गज़ेट की वस्त वाकई दंग कर देने वाली है
06:54एक तरफ मोहिंजोदारों और मकली के हजारों साल पुराने खंडरात खामोशी से खड़े हैं
07:00तो दूसरी तरफ इल्फिन स्टोन और सॉमर्सेट स्ट्रीट्स के वो कलोनियल तिजारती ब्लॉक्स हैं जो कभी मगरबी राज की निशानी
07:07थे
07:07जिस माजी को कभी बरतानवी हुकमरानों ने महفوظ करने की कोशिश की थी, आज किसमत का खेल देखें
07:13खुद बरतानवी सल्तनत की बाकियात उसी माजी के साथ सरकारी फेहरिस्ट में महفوظ हो चुकी है
07:18Life comes full circle, doesn't it?
07:21कराची में मौझूद ये खास इमारात इस बात का सबूत हैं कि तारीख रुकी नहीं रहती
07:26फ्लैक स्टाफ हाउज, खालिक दीना हॉल, वजीर मैंशन और महटा पैलिस
07:31ये इमारात अब सिर्फ बाहर से आय हुकमरानों की निशानिया नहीं रहीं, हमने इन्हें एक नई शनाख दे दी है
07:36जो अमारात कभी अजनबियत का एहसास दिलाती थी, आज वो हमारी कौमी तारीख और वकार का हिस्सा है, हमने उन्हें
07:43अपना लिया है
07:43तो आखिर में वापिस अपने शुरुआती सवाल पर आते हैं, क्या ये बचे हुए पत्थर सिर्फ एक जबरदस्ती मुसल्ट किये
07:51गए जबराना निजाम की कहानी सुनाते हैं, या फिर ये एक ऐसी पैचीदा, लंबी और गहरी शराकतदारी की गवाही देते
07:58हैं, जिसने
07:59जमीन का नक्षा हमेशा के लिए बदल कर रख दिया, ये सरकारी फैरिस्त और ये शानदार इमारत आपको दावत देती
08:04हैं, कि आप अपने शहर की इस खामोश तारीख को खुद महसूस करें, आज के इस तजजिये में बस इतना
08:10ही उम्मीद है, तारीख को देखने का ये न
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