00:00Assalamualaikum
00:01Today we are going to talk about a very good stuff
00:03about what we are going to talk about
00:05We will see what Pakistan has become so good and good and good
00:08and good and good and good
00:08that our 2026
00:10and good and good and good
00:12and good and good
00:13we'll see
00:14as soon as we go to
00:16and is 1947
00:17we will look at this modern
00:20modern war
00:20and we will look at this
00:21which can be
00:22we will be
00:23and will be
00:23without any
00:24further
00:25we will
00:27आज की इस गुफटगू में हम जिन एहम बातों का इहाता करेंगे उन में शामिल हैं आजादी का असल मतलब,
00:33तहरीक आजादी की पूरी टाइम लाइन, कुछ बहुत ही दिल्चस्प तारीखी संग्मील, 2026 की आतिश बाजी और तखरीवात की तफसीलात
00:41और हाँ उन तखरी�
00:52पाकिस्तान काइद आजम मुहम्मद अली जिना के ये तीन सुनहरी अलफाज, इमान, इतिहाद, तन्जीम, हम सब ने बच्पन से सुन
01:01रखे हैं, लेकिन सच पूछें तो ये महस कोई आम सा नारा नहीं है, ये तो वो ताकतवर और बुन्यादी
01:07फलसफ़ा है जिसने इस प�
01:20बैर मामूली और वाज़ सोच की जरूरत थी, और ये असूल आज भी हमारे लिए उतने ही एहम हैं जितने
01:26उस वक्त थे, और इसी नजरियाती सोच की सबसे बड़ी बन्याद था दो कौमी नजरिया, यानि ये वाज़ तसवर के
01:33बर्रे सगीर के हिंदू और मुसल्मान दो �
01:43इसलिए ये बात बिलकुल वाज़ थी, कि एक ही रियासत में बराबरी की बन्याद पर एक साथ रहना मुम्किन नहीं
01:49था, सची बात तो ये है कि यही नजरिया हमारे इस मुल्क की सबसे बड़ी और मजबूत नजरियाती बन्याद बना,
01:55लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इ
01:57आज़ादी के असल कीमत क्या थी? 1947 की तकसीम कोई आम वाकिया नहीं था, ये इनसानी तारीख की सबसे बड़ी
02:03हिजरतों में से एक थी, चश्मे जदन में एक से दो करोड़ लोगों ने अपना घरवार अपना सब कुछ छोड़
02:08कर हिजरत की, और एक अंदाजे के मुताबि
02:10दस से बीस लाक लोगों ने इस आज़ादी को पाने के लिए अपनी जानों का नजराना पेश किया. जब हम
02:16आज के दोर में ये जशन मनाते हैं न, तो हमें इन अजीम कुर्बानियों को कभी नहीं भूलना चाहिए. ये
02:20कोई प्लेट में सजीवी आज़ादी नहीं थी, इस
02:37का बकाइदा आगाज 1857 की जंग अज़ादी से होता है, फिर 1906 में All India Muslim League का क्याम अमल
02:44में आया. इसके बाद 1930 का वो तारीखी लमहा जब अल्लामा अकबाल ने खुदबा अलाबाद में एक अलग रियासत का
02:52वाज़े और रोशन खाका पेश किया. फिर 1940 की करादाद लाहॉर
02:57इस खाब को एक बाकाइदा और मजबूत मतालबे में बदल दिया और बिलाखिर इतनी बेपना जिद्दो जहद और कुर्बानियों के
03:05बाद 1947 में एक नया मुल्क दुनिया के नक्षे पर उबरा. वाकई, ये कितना जबरदस्त और वलवलांगेज सफर था. अब
03:13आते हैं त
03:27थीक बारा बजने वाले हैं और अचानक रिडियो पर एक गुंजदार आवाज उभरती है. ये पाकिस्तान ब्रॉडकास्टिंग सर्विस है. ये
03:33तारीखी अलफाज मुस्तफ़ा अली हमदानी सहब ने अदा किये थे. ये लमहा, ये अलफाज, एक नई कौम का दुनिया के
03:561948 में काइद आजम ने आजादी की पहली सालगिरा के मौके पर कौम से अपना तारीख ही खिताब किया. बिलकुल
04:03उसी दिन बरतानवी टिकेटों को हटा कर पाकिस्तान के अपने पहले कौमी डार्क टिकेट जारी किये गए. फिर 1955 में
04:10मुलक का पहला रंगीन डार्क टिकेट
04:12और एक इंतहाई दिल्चस्प बात, 1953 में लाहॉर में पाकिस्तान की पहली कौमी साइकल मुतारिफ कराई गई जिसका नाम था
04:19रुस्तम. ये चोटी-चोटी मगर एहम चीजें हमें बताती हैं कि किस तरह एक खुदमुखतार कौम अपना एक अलग और
04:25मुनफरिद तशखु
04:27अब जरा इन नंबर्स पर गोर करें 21 सालात और 35 साज हैरानी हुई ना? दरاصل हफीज जालंदरी साहब का
04:35लिखा हुआ हमारा खुबसूरत कौमी तराना जब 1954 में पहली बार रिकॉर्ड किया गया था तो इसकी मसहूर कुंधुन तर्तीब
04:41देने के लिए 21 मुखतलिफ आलात
04:44और 35 साज इस्तेमाल किये गए थे हमारा ये तराना दौरानिय में सिर्फ एक मिनिट और 20 सेकिंड का है
04:49लेकिन इसके पीछे जो महनत लगन और बारीक भी नी शामिल थी वो वाकिक अमाल थी
04:54चलें जी अब माजी से निकल कर हाल में आते हैं हमारा चौथा हिस्सा है 2026 की शांदार आतिश बाजी
05:01और तक्रीबात के हवाले से
05:03तो 2026 में पाकिस्तान के बड़े शहरों में तक्रीबात का जो जबरदस खाका बन रहा है वो कुछ यूं है
05:10लाहौर वालों के लिए लिबर्टी चोक और मिनारे पाकिस्तान के साय तले ग्रेटर इकबाल पाक में कॉंसर्ट्स, जबरदस्थ हुजूम और
05:17आतिश बाजी का एक शांदार इंतिजाच देखने को मिलेगा
05:20इसी तरह इसलामाबाद में F9 पाक का ड्रोन शो और H8 एक्सप्रेस वेपर एर फोर्स का फ्लाइ पास्ट ला जवाब
05:26होने वाला है
05:27और अगर आप कराची में है तो पोर्ट ग्रैंट पर आजादी फेस्टिवल और समंदर के खुबसूरत मनाजिर के साथ
05:32फैमिली राइट्स का बहतरीन मौका आपका मंतजिर होगा
05:35यानि हर शेहर का अपना एक अलग ही रंग होगा
05:38और हाँ इसलामाबाद के लिए बात सिर्फ आतिश बाजी या फ्लाइपास तक मेहदूद नहीं है
05:42इस बार डी चोक में एक बहुत ही शांदार स्टे परेट का इनिकाद भी किया जा रहा है
05:4714 अगस को शाम पांच बजेगर डी चोका रुख किया जाए
05:50तो वहाँ आपको जबर्दस सखाफ्ती शोज, मोहिब बेवतन तफ्रीही प्रोग्राम और सिक्यूरिटी इदारों की प्रेट देखने को मिलेगी
06:20वक्त क्या होना चाहिए
06:21देखें, जब हम 14 अगस्त की आतिश बाजी सुनते हैं, तो इसका मतलब अमूमन 13 अगस्त की रात ठीक 12
06:28बजे होता है
06:28तो अगर आप Liberty Choke या H8 Express Way पर रात वाली आतिश बाजी देखना चाहते हैं, तो आपको 13
06:35अगस्त की रात को ही पहुँचना होगा
06:36लेकिन इसके बरक्स, डीचो की परेड या फिर लाहोर में विलेंशिया टाउन की आतिश बाजी 14 अगस्त वाले दिन, यानि
06:43शाम या रात के वक्त होंगी
06:44इसलिए वक्त की ये दुरुस्त मनसुबाबंदी बहुत लाजमी है, ताके आपकी कोई भी फेवरिट तक्रीब मिसना हो जाए
06:51और देखिए, इतने बड़े हुजूम में जाकर जश्न मनाना मज़ेदार तो बहुत होता है, लेकिन थोड़ी सी एहतियाद भी उतनी
06:58ही जरूरी है
06:58निकलने से पहले ट्राफिक की ताजा तरीन सुरतेहाल लाजमी चेक कर लें, क्योंकि ऐसी रातों में सडके अकसर ब्लॉक हो
07:04जाती है
07:04और हाँ, घर से मामूल से काफी पहले निकलना चाहिए, ताके रश्ट से बच सकें
07:09एक और बहुत एहम बात, रश्ट में मोबाइल सिगनल्स का मसला हो सकता है
07:13इसलिए फैमिली के साथ पहले से ही कोई एक मीटिंग पॉइंट जरूर तैय कर लें, ताके अगर कोई बिछड जाए,
07:18तो वहीं मिल सके
07:19कम से कम और सिर्फ जरूरी सामान साथ रखें
07:21और सबसे बढ़कर पुलीस और सिक्यूरिटी की तमाम हिदायात पर सकती से अमल करें
07:26यकीन माने, इन छोटी छोटी बातों पर अमल करने से आपके जश्न का मज़ा बिलकुल खराब नहीं होगा, बलकि डबल
07:32हो जाएगा
07:33तो दोस्तो आखर में बस एक बात, जब 2026 में हम सब आसमान को रोशन करती, इन शांदार और रंग
07:39बरंगी आतिश बाजियों को देख रहे होंगे
08:20पाकिस्तान जिन्दाबाद
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