00:00Soch yeh, aeg taraf aeg tataqtwar fawajee amir
00:02aur dursri taraf baania pakistan ki hamshira
00:05kya zhabardas mokabila hoga na?
00:07Aaj ke es jayizae meh hum 1965 ke
00:10un sadaaritiy intichabat ki baat ker rae hay hein
00:12jenhe pakistan ki tariq ka eek behad sansni khayiz
00:15aur fesla kun siasi marka manajata hai
00:17Yaha eek sawal akstar zhehen mein aata hai
00:20Agar 1965 meh borae raast aam awam ko vote ndalnye ka hak hota
00:24to natiijah kya hota?
00:26Opposition jamaatou ka to yeh hi dawa tha
00:28That, if the decision was made in the US, it was the one that had very strong.
00:34That's it.
00:39So today we are going to get back to the political process.
00:41Today we are going to talk about what is happening in our lives in the US.
00:43We are going to talk about the history of Pakistan.
00:45We are going to talk about the history of Pakistan.
00:47We are going to talk about it in 1965.
00:4865 के नताइज और आखिर में उनके अजीम वरासे पर बात करेंगे
00:51चलें पहले हिस्से से शुरुआत करते हैं मादरे मिल्लत का तारूफ
00:56इन तारीखी इंतिखाबात की गहराई को समझने के लिए
00:59इस अजीम शख्सियत के पसे मंजर को जानना बेहत जरूरी है
01:03इनकी जिंदगी के चंद एहम संगे मील पर नजर डालते हैं
01:061893 में काठिया वार्ड में पैदाईश हुई
01:08लेकिन हैरान कर देने वाली बात ये है कि 1923 में उन्होंने डेंटिस्ट्री की डिग्री ली
01:14जी हां गैर मुनकस्म हिंदुस्तान की पहली खातून डेंटिस्ट
01:17फिर 1929 में काठिया आजम की एहलिया की वफात के बाद
01:21उन्होंने अपना किरिनिक बंद कर दिया और अपने भाई की सबसे करीबी साथी बन गई
01:24और फिर 1947 में उन्होंने पहली कानुनसाज असेमली के जलास में भी शिरकत की
01:28अब बढ़ते हैं दूसरे हिस्से की जानब तहरीक पाकिस्तान में इनका किरदार
01:33क्याम पाकिस्तान की जिद्दुजाहद में इनका अपना आजादाना किरदार इंतहाई मतहर्रक था
01:39वो महज कायद आजम की बहन नहीं थी बलके बजाते खुद एक जबरदस स्यासी रहनुमा थी
01:44जरा सोचिए 1941 में उन्हें मुस्लिम विमन स्टूडेंट्स फेडरेशन बनाई
01:49क्या में पाकिस्तान के दौरान विमन्स रिलीफ कमीटी कायम की
01:52जो बाद में एपवा यानी ओल पाकिस्तान विमन्स असोसियेशन की बनियाद बनी
01:56लेकिन दिल्चस्प और गदरे हैरान गुन बात ये है
01:59कि बानिय पाकिस्तान की वफात के बाद रियासत के साथ उनका एक तनाव शुरू हो गया
02:041951 में उनकी एक रेडियो तक्रीर को बाकाइदा सेंसर कर दिया गया
02:08जिससे पता चलता है कि वो रियास्ती पॉलिस्यों और सुभायत पर किस कदर खुलकर तनकीद कर रही थी
02:141951 का उनका ये मशहूर इक्तिबास जरा गौर से सुनिये
02:19ना धमकियों से गरें और ना वादों के फरेब में आये
02:22वोट एक मुकद्दस इमानत है इसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता
02:26ये अलफास बताते हैं कि वो जमूरी हुकूक की कितनी कटर हामी थी
02:30और बिल्कुल यही वो सोच थी जिसने बाद में उनकी सियासत में वापसी की राह हमबार की
02:35तीसरा हिस्सा अयूब खान के खिलाफ मोहम
02:381964 का वो संसनी खेस दोर जब उन्होंने अपनी खुज सखता रिटार्मेंट खतम की
02:43और आपोजिशन की क्यादत संभाल ली
02:451965 के इंतखाबात में दरसल दो बिलकुल मुतजाद नजरियात आमने सामने थे
02:50एक तरफ सदर जनरल अयूब खान थे जिनकी कन्वेंशन मुस्लिम लीग का इंतखाबी निशान गुलाब का फूल था
02:56और दूसरी तरफ मौतरमा फात्मा जना जो छे उपोजिशन जमातों के इताहत की नुमाइंदगी कर रही थी
03:02और उनका निशान था लाल टेन
03:04अयूब खान का ये बियानिया था कि एक औरत मुल्क चलाने के लिए मौज़ू नहीं
03:08जबकि मौतरमा फात्मा जना ने इस इलेक्शन को आमरियत और जम्हूरियत के दर्मियान एक वाज़ जंग के तौर पर पेश
03:14किया
03:14इस दोरान मश्रिकी पाकिस्तान यानि आज के बंगला देश में एक कमाल का वाक्या हुआ
03:20चिट्टा गाउन तक के 200 मील के सफर में इनकी ट्रेन अवाम के बेपना हुजूम की वज़ा से पूरे 30
03:27घंडे लेट हो गई
03:28और जब वो वहां पहुँचे तो एक मोहतात अंदाजे के मताबिक 10 लाख लोग उनके इस्तकबाल के लिए मौजूद थे
03:34ये बेपना अवामी जोशो खरोश उस वक्त के सख्त इंतिखाबी निजाम के बिलकुल बरक्स एक खुली बगावत जैसा था
03:42लेकिन उस सारी कहानी में सबसे हैरान कुन चीज एक मकसूस नंबर है
03:4780,000 जी हाँ लाखों करोडों की आबादी
03:51मगर सदर को वोट डालने का हक सिर्फ और सिर्फ इन 80,000 बेसिक डिमोक्रैट्स को हासल था
03:57ये इलेक्टोरल कॉलिज मश्रिकी और मगरबी पाकिस्तान में बिलकुल आधा आधा तक्सीम था
04:03मतलब आम अवाम का ब्राहरास्ट इंतिखाब में कोई किरदार नहीं था
04:07इस कड़े वक्त में मौलाना मौदूदी का एक जुमला सूरत इहाल को बिलकुल वाज़े कर देता है
04:12उन्होंने कहा एक तरफ एक मर्द है जिसमें उसकी सिन्फ के इलावा कोई खुबी नहीं
04:16और दूसरी तरफ एक औरत है जिसमें उसकी सिन्फ के इलावा कोई खामी नहीं
04:20ये बियान दिखाता है कि कदामत पसंद हलके भी मार्शल लॉस से छुटकारा पाने के लिए किस हद तक यगजान
04:25हो चुके थे
04:26आप चलते हैं चौते हिस्से की तरफ 1965 के इंतिखाबी नताइज
04:31दो जन्वरी 1965 को होने वाले इन इंतिखाबात के सरकारी आदाद और शुमार पर एक गैर जानिब दाराना नजर डालते
04:38हैं
04:38मजमुई सरकारी नताइज के मताबिक इन 80,000 वोटों में से अयूब खान ने 63.3 फीसद वोट लेकर आराम
04:46से काम्याबी हासिल कर ली जबके महतरमा फात्मा जना को 36.4 फीसद वोट मिले
05:04पूरे मगरीबी पाकिस्तान में रियासती मशीनरी का गहरा असर होने के बावजूद कराची जैसे बड़े शहर में महतरमा फात्मा जना
05:11ने 1049 वोट लेकर अयूब खान को शिकस्त दे दी
05:15अयूब खान को यहां महज 837 वोट मिले
05:18ये इस बात का जीता जाकता सबूत था कि पड़े लिखे शहरी हलकों में मादरे मिल्लत किस कदर मकबूल थी
05:24पांचवा और आखरी हिस्सा वफात और अजीम विर्सा
05:27इंतिखाबात के बाद क्या हुआ और तारीख में इनका मकाम कैसे तैप आया आईए देखते हैं
05:331965 की इंतखाबी मोहिम के वाद 1967 में इनका कराची में इंतकाल हो गया
05:38इनके जनाजे में लाखों लोगों का हजूम उनकी बेपना मकबूलियत की गवाही दे रहा था
05:43यहां एक और हैरान अंगेज हकीकत बताते चलें
05:46उन्होंने 1955 में अपने भाई पर एक किताब लिखी थी जिसका नाम था My Brother
05:51इसे 32 साल तक छपने ही नहीं दिया गया
05:54और जब 1987 में ये बिलाखिर शाया हुई भी तो नजरियाती वजुहात की बिना पर इसके कुछ सफात बकाइदा सेंसर
06:01कर दिये गए
06:01इनका तारीखी विर्सा किसी एक किताब या एलेक्शन तक महदूद नहीं है
06:06कौम ने इन्हें मादर मिल्लत और खातून पाकिस्तान के शानदार अल्काबाद दिये
06:121965 के इस मारके ने इन्हें सिर्फ बानी पाकिस्तान की बहन के रुद्बे से आगे बढ़ा कर
06:18मुल्क में जमूरी मुजाहमत और असूलों की सबसे बड़ी और मजबूत अलामत बना दिया
06:24और इस तमाम गुफटगू के बाद एक सवाल जो हमें गहरी सोच पर मजबूर कर देता है
06:29अगर एक इलेक्शन जिसे बजाहर एक उमीदवार को दबाने के लिए डिजाइन किया गया था
06:34वही इलेक्शन इसी उमीदवार को हमेशा के लिए एक नाकाबल शिकस जमूरी आइकन बना दे
06:41तो जरा सोचिए दरहकीकत 1965 में जीत किस की हुई
06:45तारीख का ये वो सवाल है जो हमेशा गुंचता रहेगा
06:49आज के इस मालूमाती जाइजे में हमारे साथ रहने का बहुत शुक्रिया
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