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Transcript
00:00दुनिया के शीर संस्थानों में भारतिये कहीं नजर नहीं आते
00:03भारतिये माने भारतिये संस्थान
00:05वो दुनिया के जो संस्थान है उसमें भारतिये नजर आते हैं
00:08वो कूट-कूट के वाँ पहुचते हैं
00:09बड़ी खुशी मनाते हैं कि एड्मिशन मिल गया फ़लानी उनिवर्सिटी में, आस्टेलिया की, अमेरिका की, पर भारत में ऐसे संस्थान
00:14विक्सित नहीं हो पर।
00:15अंग्रेजों के आने से पहले लगभग हजार साल तक भारत में एक भी उनिवर्सिटी नहीं बनाई गई, दिल दहलाने वाली
00:22बात है कि नहीं है, क्योंकि विश्योद्याले का मतलब होता है, सोचने समझने की जगह, और भारत ने विचार से
00:30बिलकुल ही नाता तोड़ लिया,
00:32क्योंकि समाज चलना चाहता है रूडियों पर, और रूडियों पर चलते समाज के बीच में एक विश्योद्याले खड़ा हो जाए,
00:37जो कहरा है नहीं, हम जानना चाहते हैं, हमें बताओ, हमें समझाओ, समाज कहेगा यह विश्योद्याले बंद कर दो, इसको
00:43आर लगा, और
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